Dec 3, 2020

 



गलतियाँ

हर किसी से होती हैं.

कौन इससे बचा रह सका है.

 

हम अतीत का स्ट्रेस लेते हैं

क्योंकि उस समय हुई गलतियां

हमें परेशान किए रखती हैं.

 

हम भविष्य से डरते हैं

क्योंकि डर सताता है कि

कोई फ़ैसला कर लेने पर वो

गलती में ना बदल जाए.

 

कई बार हम वर्तमान में भी

सहमे होते हैं कि

किसी काम में या सिचुएशन में

ग़लत साबित ना हो जाएं.

 

कुल मिलाकर अगर हम कुछ भी ना करें

तो शायद गलती ना हो वरना

गलती होने के चांसेस 100% हैं.

 

अब हाथ में हाथ धरे बैठ कर

तो कुछ किया नहीं जा सकता.

 

इसमें सिंपल सा एक फंडा है जो

कारगर है कि अगर आप समस्या पर

ना रूककर समाधान पर जाकर रुकने लगें

तो चीज़ें बदल सकती हैं.

 

यानि जब आपको गलती करने,

उनको एक्सेप्ट करने,

और उन्हें सुधारने में कोई समस्या नहीं होती,

तब आपसे शायद ही कोई गलती होगी.

 

तो एक्सेप्ट करना एक गुण है, दब्बूपन नहीं.

गलती सुधारने के साथ आगे बढ़ते रहें

और एक दिन आप गलती फ्री हो जायेंगे.

बिना डरे,

बिना मरे.

 

इमेज सोर्स: गूगल