Jan 17, 2020

वो हाईएस्ट पोसिबिलिटी क्या है, जिसे आप छू सकते हैं?





आप कैसे दिखते हैं
या किसी भी सिचुएशन में कैसे रियेक्ट करते हैं
या किस साइज़ के मकान में रहते हैं
या कितना बैंक-बैलेंस रखते हैं
या कितने ज्ञान से भरे हैं,
ये सब दूसरे लोगों के डिस्कशन का मुद्दा तो
बन सकता है
जिससे आप समय को लंबा
खींचते हुए चल सकते हैं,
लेकिन अपने भीतर आप कैसा महसूस करते हैं,
ये आपके जीने का असली सब्जेक्ट है.

सुविधाओं से भरे जीव आज  
ज्यादा अशांत और परेशान हैं.
उनमें शंका, डर और सुपीरियर बने रहने की
घबराहट है.
वो कुछ कहें या ना कहें.
लेकिन वो दर्द में हैं.
उन्हें कोई मरहम चाहिए ताकि वो
अपने जीने को जिंदा रख सकें.
अभी दौड़ जारी है.
बड़ी तेज, बिना रुके.

ये फ्यूचर के लिए बेहतरीन हो सकता है या नहीं,
पता नहीं चलता 
लेकिन उससे
बढ़ रही आपसी दूरियाँ और 
तनाव, जीवन को जकड़ डालता है.

अगर कोई भी ख़ुद पर थोड़ा ध्यान दे कि
वो कैसे बैठ रहा है,
चल रहा है
और उसकी सांसें किस फ्रीक्वेंसी से दौड़ रही हैं
तो ये जीने का एक सिंपल और 
असाधारण तरीका होगा.

शुरुआत आप ख़ुद से करें.
फ़िर ये जानना दिलचस्प होता जाएगा कि
आपको कितना और कहां तक दौड़ना चाहिए?

वो हाईएस्ट पोसिबिलिटी क्या है,
जिसे आप छू सकते हैं?
क्या वो हीरे हैं?
या नोटों की गड्डियां?
या प्यार?

या फ़िर इन सबसे भी बेहतर कुछ और.
कुछ ऐसा जिसके साथ आप हमेशा टिक सके.
इधर भी और उधर भी.
उजाले में भी और अंधेरे में भी.
जागते हुए भी और सोते हुए भी.


तो इससे पहले कि
कोई और आपको डिफाइन करने की कोशिश करे
कोई और ये बताए कि आप क्या हैं
और आपको क्या होना चाहिए
कोई और आपकी इमेज बिल्डिंग करे
कोई और आपकी गाइडिंग फ़ोर्स बने,

समय रहते ख़ुद की हाईएस्ट विश को चेक करें
कि आप सबसे ज्यादा रिलैक्स और
आनंदित कब महसूस करते हैं
और ये किन पलों में होता है और कैसे होता है.

तब शायद एक झलक मिले कि वास्तव में
आपके जीवन को क्या होना चाहिए.

क्योंकि अगर संसार की सारी चमकती चीज़ों को
हासिल कर लेने के बाद भी
आपका मुहं शिकायतों के लिए खुला मिलता है 
तो समझिए कि हाथ ख़ाली ही रह गए.

और अगर किसी भी एक चीज़ ने
आपको आभार से भर डाला
तो फ़िर आप यक़ीनन कह सकेंगे कि मैं जीया.

हर जीवन को उस लेवल पर जाकर ही थमना चाहिए जो उसके लिए सबसे ऊँची संभावना बने.

और इसके लिए ख़ुद को जान लेने की
ज़रूरत भर है.

तो एक सुबह अपनी पसंद तय करें
और उसे मनपसंद तक लेकर जाएं.

अब निहाल होना सच बनता जाएगा.


इमेज सोर्स: गूगल