Jan 24, 2018

स्टीव जॉब्स : A True Leader



कौन था वो, जिसके अपने ही माता-पिता ने उसे किसी और के पास भेज दिया था. जिसे रास्ता दिखाने वाला कोई नहीं था. जिसे कॉलेज के 6 महीने बाद ही कॉलेज छोड़ना पड़ा था. लेकिन वो रोया नहीं, कष्टों के आगे झुका नहीं. ईश्वर ने उसकी खूब परीक्षा ली. उसे जिंदा रखा, उससे क्या करवाना चाहता था भगवान? शायद कुछ ऐसा कि जो दुनिया में किसी और ने सोचा नहीं था. पहले ऐसा कभी हुआ नहीं था. और वो जीता खुद से. उसने हराया डर को, नाकामयाबियों को और जो उसने किया, वो उसको टेक्नोलॉजी की दुनिया के महानतम महारथियों की लिस्ट में अव्वल स्थान पर ले गया. आज ये शख्स विश्व भर में कंप्यूटर के इनोवेटिव अवतार माने जातें हैं, जिन्होंने कंप्यूटर और उसकी दुनिया को एक नए यूनिवर्स में बदल डाला. बेशक आज वो हमारे बीच नहीं हैं परन्तु टेक्नोलॉजी और अध्यात्म के इस अद्भुत दूत के बारे में पढ़कर और जानकर उनके लिए कुछ शब्दों की रचना करके हमें भी बेहद ख़ुशी का अनुभव हो रहा है.  
जी हां. हम बात कर रहे हैं स्टीव जॉब्स की. वो आदमी, जो सदियों तक याद रखे जाने का हुनर जानता था. आइए जाने क्या थे स्टीव और क्या देकर और कह कर अलविदा हुए.
·        पूरा नाम    – स्टीवन पॉल जॉब्स
·        जन्म       – 24 फ़रवरी 1955
·        जन्मस्थान   – सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया, अमेरिका
·        पिता        – पॉल रेनहोल्ड जॉब्स
·        माता        – क्लारा जॉब्स
·        पत्नी       – लोरेन पॉवेल
·        बच्चें        – लिसा ब्रेनन, आयलैंड सिएना, ईव और रीड जॉब्स

जन्म के बाद स्टीव के माता-पिता ने उन्हें किसी को गोद देने का फैसला किया. स्टीव को पॉल और क्लारा ने गोद लिया. स्टीव को अब अपना नया परिवार मिल गया था. पॉल 1961 में कैलिफ़ोर्निया के माउंटेन व्यू में शिफ्ट हो गये. यही से स्टीव की पढ़ाई शुरू हुई. पॉल ने घर चलाने के लिए एक गैराज खोल लिया और यहीं से शुरू हुआ  स्टीव और टेक्नोलॉजी का सफ़र. स्टीव गैराज में रखे इलेक्ट्रॉनिक के सामान के साथ छेड़-छाड़ करने लगे और ये उन्हें पसंद आने लगा था. स्टीव होशियार थे पर उन्हें स्कूल जाना पसंद नहीं था. स्कूल जाते तो शरारतें करते. दिमाग तेज था तो टीचर्स ने उन्हें समय से पहले ही ऊंची कक्षा में भेजने की बात की पर पॉल ने मना कर दिया.

13 साल की उम्र में उनकी मुलाकात हुई स्टीव वोज्नैक से हुई. उन्हें भी इलेक्ट्रॉनिक से बहुत प्यार था. शायद इसीलिए दोनों में जल्द ही दोस्ती हो गयी. स्कूल की पढ़ाई पूरी होने पर स्टीव का दाखिला रीड कॉलेज में हुआ. कॉलेज की फ़ीस बहुत ज़्यादा थी और स्टीव के माता-पिता बड़ी मुश्किल से खर्चा चला पा रहे थे. इसलिए स्टीव  ने फैसला किया की वे कॉलेज छोड़ देंगे. कॉलेज छोड़ने के बाद वो एक कैलीग्राफी क्लासेज में जाने लगे. ये एक ऐसा दौर था जब स्टीव के पास पैसे नहीं होते थे. वे अपने दोस्त के कमरे में फर्श पर सोते, कोका-कोला की बोतलें बेचकर खाना खाते और हर सन्डे सात मील की दुरी चल के एक मंदिर में जाते जहाँ उन्हें मुफ़्त में पेट भर खाना मिल जाता था.

1972 में स्टीव ने अटारी नाम की एक वीडियो गेम कंपनी में काम करना शुरू किया । उनका मन यहाँ नहीं लगा और कुछ पैसे इकट्ठा करके वे 1974 में घुमने भारत चले गये. वो भारत में सात महीने रहे. उन्होंने बौध धर्म को पढ़ा और समझा. इसके बाद वे अमेरिका वापस चले आये. फिर से अटारी कंपनी में काम करना शुरू किया और अपने माता-पिता के पास रहने लगे.

स्टीव और वोज्नैक अब अच्छे दोस्त बन चुके थे. दोनों ने मिलकर कुछ काम करने का प्लान बनाया. प्लान था ‘कंप्यूटर बनाना’. उन्होंने एक कंप्यूटर बनाया जिसे नाम दिया गया ‘एप्पल. जब ये सबकुछ हो रहा था तब स्टीव मात्र 21 साल के थे. दोनों दोस्तों ने मिलकर ‘Apple कंप्यूटर’ को छोटा, सस्ता और ज़्यादा फंक्शनल बनाया । उनके काम को वेंडर्स और कस्टमर्स ने इतना पसंद किया कि दोनों ने मिलकर कई लाख डॉलर कमाये. ‘एप्पल 1’ ने 7,74,000 डॉलर्स की कमाई की वही इसके 3 साल बाद लांच हुआ ‘एप्पल 2’  जिसने सेल को 700 प्रतिशत बढ़ा दिया और वो हो गया $139 बिलियन. केवल 10 साल में ही ‘एप्पल एक जानी मानी कंपनी बन गयी जो बिलियन डॉलर्स कमाने लगी लेकिन ‘एप्पल 3’ को लोगों ने ज़्यादा नहीं सराहा. कंपनी को घाटा हुआ. नुकसान का ठीकरा स्टीव पर फूटा और 17 सितम्बर 1985 के दिन उनको कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

स्टीव अब टूट चुके थे लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने नयी शुरुआत करने की ठानी. स्टीव ने ‘नेक्स्ट’ नाम से कंपनी खोली और पहला प्रोडक्ट बनाया ‘हाई एंड पर्सनल कंप्यूटर’. पर बात बनी नहीं. फिर उन्होंने अपने कंपनी को एक सॉफ्टवेयर कंपनी में बदल डाला. उसके बाद तो मानो किस्मत के दरवाजे खुल गये. उनकी कंपनी ने शानदार कमाई की और 1986 में स्टीव ने 10 मिलियन डॉलर से एक ग्राफिक्स कंपनी खरीदी और उसका नाम रखा ‘पिक्सर’.  इसके बाद तो स्टीव की जिंदगी इन्द्रधनुष जैसी हसीन हो गयी.  ‘पिक्सर’ को  डिज्नी  का साथ मिला और कंपनी सफलता के सातवें आसमान पर पहुँच गयी.
उधर ‘एप्पल’ घाटे में थी. उसने 477 मिलियन डॉलर खर्च कर ‘नेक्स्ट ’को खरीद लिया और स्टीव बन गए ‘एप्पल’ के सी.ई.ओ. ये वही समय था जब ‘एप्पल’ ने ग़जब के प्रोडक्ट्स लांच किये जिनमे ‘आईपॉड’ और ‘एप्पल’ का पहला मोबाइल फ़ोन शामिल था जिसने मोबाइल फ़ोन के बाज़ार में धूम मचा दी. अब स्टीव स्टार बन चुके थे. 

अचानक इसी बीच उन्हें कैंसर जैसी बीमारी ने घेर लिया और 5 अक्टूबर 2011 में उन्होंने अपनी आखिरी साँसे ली. पर जाने से पहले स्टीव हमें संघर्ष और सफ़लता का महान अनुभव दे गए.

आइये देखें स्टीव जॉब्स के वो विचार जिन्हें अपना कर ये लड़का कीचड़ में कमल की तरह खिला और अपनी खुशबू से पूरी दुनिया को महका गया.

·       इस बात को याद करना कि एक दिन मरना है, किसी चीज को खोने के डर को दूर करने का सबसे अच्छा  तरीका है. आप पहले से ही नंगे हैं. ऐसा कोई कारण नहीं है की आप अपने दिल की ना सुने."

·     समाधिस्थल में सबसे अमीर आदमी बनने से मुझे कोई मतलब नहीं है. मैं रात में अपने बिस्तर पर जाने से पहले ये कहूँ कि आज हमने कुछ आश्चर्यजनक किया है ये मेरे लिए महत्वपूर्ण है.

·      गुणवत्ता का मापदंड बनिए, कुछ लोग ऐसे वातावरण के आदि नहीं होते जहाँ उत्कृष्टता की उम्मीद की जाती है.
·       आप कस्टमर से यह नहीं पूछ सकते कि वो क्या चाहते हैं और फिर उन्हें वो बना के दें. आप जब तक उसे बनायेंगे तब तक वो कुछ नया चाहने लगेंगे.

·       शायद मौत ही इस जिंदगी का सबसे बड़ा आविष्कार है.


·       आओ, आने वाले कल में कुछ नया करते हैं बजाए कि इसकी चिंता करने के, कि कल क्‍या हुआ था.

·       आज हम नए हैं, लेकिन कुछ दिन बीत जाने पर, हम भी पुराने हो जायेंगे और ये पूर्ण सत्य है.

·       यह निश्चय करना की आपको क्या नहीं करना है उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना की यह निश्चय करना की आप को क्या करना है.

·       महान कार्ये करने का एक मात्र तरीका यह है की आप अपने काम से प्यार करे.

·       कभी कभी ज़िंदगी आपके सर में पत्थर से चोट करती है। पर विश्वास मत खोना.

·       किसी खास समुदाय को ध्यान में रखकर उत्पादों के डिजाइन करना बेहद मुश्किल होता है  क्यूंकि बहुत से लोग नहीं जानते कि वे क्या चाहते है जब तक आप उन्हें दिखाएँ नहीं.

·       नयी खोज एक लीडर और एक अनुयायी के बीच अंतर बताती है.

·       आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत कीजिये. बेकार की सोच में मत फंसिए, अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइए.

·       औरों के विचारों के शोर में अपने अंदर की आवाज़ को, अपने इन्ट्यूशन को मत डूबने दीजिए.

·       डिज़ाइन सिर्फ यह नहीं है कि चीज कैसी दिखती या महसूस होती है, डिजाइन यह है कि चीज काम कैसे करती है.

·       मुझे लगता है कि हम मजे कर रहे हैं. मुझे लगता है कि हमारे ग्राहकों को वास्तव में हमारे उत्पाद पसंद हैं और हम हमेशा बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं.

·       इस बात को याद रखना की मैं बहुत जल्द मर जाऊँगा मुझे अपनी ज़िन्दगी के बड़े निर्णय लेने में सबसे ज्यादा मददगार होता है, क्योंकि जब एक बार मौत के बारे में सोचता हूँ तब सारी उम्मीद, सारा गर्व, असफल होने का डर सब कुछ गायब हो जाता है और सिर्फ वही बचता है जो वाकई ज़रूरी है.

·       किसी चीज़ को महत्वपूर्ण होने के लिए दुनिया को बदलने की जरुरत नहीं है.

·       यदि आपकी नज़र लाभ पर रहेगी तो आपका ध्यान उत्पाद की गुणवत्ता से हट जायेगा। लेकिन यदि आप एक अच्छा उत्पाद बनाने पर ध्यान लगाओगे तो लाभ अपने आप आपका अनुसरण करेंगा.

·       हम यहां पर ब्रह्मांड में सेंध लगाने के लिए है। अन्यथा हम यहां पर हैं ही क्यों ?

·       यदि आप वास्तव में बहुत बारीकी से देखोगे तो आप पाओगे की रातो रात मिलने वाली अधिकतर सफलताओ में बहुत लम्बा वक़्त लगा है.

·       मुझे यकीन है कि सफल और असफल उद्यमियों में आधा फर्क तो केवल दृढ विश्वास का ही है.

·       गुणवत्ता प्रचुरता से अधिक महत्वपूर्ण है. एक छक्का दो-दो रन बनाने से कहीं बेहतर है.

·       मैं अपने जीवन को एक पेशा नहीं मानता। मैं कर्म में विश्वास रखता हूं। मैं परिस्थितियों से शिक्षा लेता हूं। यह पेशा या नौकरी नहीं है यह तो जीवन का सार है.

·       ये मेरे मंत्रों में से एक है कि ध्यान केन्द्रित करो और सरल रहो. सरल भी जटिल से ज़्यादा दृढ़ हो सकता है.

·       आपको अपनी सोच को साफ और सरल बनाने के लिए मेहनत करनी चाहिए। मेहनत से मिली ऐसी सोच परिणाम के लिए बड़ा मूल्य रखती है क्योंकि इसे पाकर आप पर्वत को भी हिला सकते हैं.

·       आपका कार्य जि़न्दगी के एक बड़े भाग को संतुष्ट करना है और संतुष्टि प्राप्त करने के लिए वो करें जिसमें आप विश्वास करते हैं. महान कार्य करने का एक ही तरीका है आप जो करते हैं उससे प्रेम करें. यदि आप जो करना चाहते हैं वो प्राप्त नहीं हुआ है तो उसे खोजिए। स्वयं को ठहरने मत दीजिए.

·       हम कुछ खो सकते हैं - इस चिंता के जाल से मुक्त होने का सबसे अच्छा तरीका है कि इस बात को याद रखना कि ‘हम कभी मर जायेंगे’.

·       आप पहले से ही निर्वस्त्र हैं और कुछ खोने के लिए है ही नहीं. इसलिए ऐसी कोई भी वजह नहीं है कि आप अपने दिल की नहीं सुनें.

·       मैं सोचता हूँ कि यदि आप कुछ कर रहे हैं और वो अच्छा हो जाता है तो आपको इस कार्य पर अधिक विचार करने की बजाए कुछ और आश्चर्यजनक करना चाहिए। अगले कार्य के लिए विचार कीजिए.

·       आपको किसी चीज़ में विश्वास करना चाहिए। आपका साहस, नसीबऊर्जा या कर्म जिनमें भी आप चाहें. ये दृष्टिकोण आपको कभी गिरने नहीं देगा और जि़न्दगी में अनेंको विभिन्नतायें प्रदान करेगा.

·       मैं सहमत हूँ कि वो “जि़द (हठ)” ही है जो सफल उद्यमी और असफल लोगों को पृथक करती है.

·       रचनात्मकता कुछ विचारों और चीज़ों का जोड़ना है. जब आप किसी रचनात्मक व्यक्ति से पूछेंगे कि उसने ये कैसे किया है तो वो स्वयं को दोषी महसूस करेगा क्योंकि वो उसने वास्तव में किया ही नहीं है. उसने बस कुछ देखा और वो उसके समक्ष जाहिर हो गया.

·       महान लोगों और उत्तम उत्पादों का अंत कभी नहीं होता है.

·       संसार आपको तभी पहचान सकेगा जब आप संसार को अपनी क्षमताओं से परिचय करायेंगे.

·       यदि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया पर असफल हो गया तो भी अच्छा है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तो दिया.

·       जो लोग इस बात को दीवानगी तक सोचते हैं कि वो दुनिया बदल सकते हैं वही दुनिया को बदलते हैं.

·       मैं ब्रहाम्ण्ड में झंकार करना चाहता हूँ.

·       आपका जीवन कहीं ज्यादा व्यापक हो जाता है; जब आप इस आसान से तथ्य को जान लेते है: वह सबकुछ जो आपके चारों तरफ हैं और जिसे आप जीवन कहते है, वह लोगों द्वारा बना हैं और मजेदार बात यह है कि वे आपसे अधिक बुद्धिमान नहीं है और आप उसे बदल सकते है.

·       तकनीक कुछ नहीं है. महत्वपूर्ण बात यह है कि आपका लोगों पर भरोसा है कि वे मूल रूप से अच्छे और बुद्धिमान हैं और आप अगर उन्हें कोई औज़ार देते है तो वे उससे कुछ आश्चर्यजनक चीज कर दिखाएगें.

·       आप बिन्दुओं को आगे देखते हुए नहीं मिला सकते. उन्हें केवल पीछे देखकर ही मिलाया जा सकता है। इसलिए आपको यह विश्वास करना पड़ेगा कि किसी न किसी तरह आपके जीवन-बिन्दु भी भविष्य में जरूर मिलेगें। आपको कुछ चीजों, जैसे- दृढ़ निश्चय, भाग्य, जीवन, कर्म आदि पर विश्वास करना ही पड़ेगा. यही दृष्टिकोण मुझे कभी निराश नहीं होने देता और मेरी जिन्दगी में सारे बदलाव इसी से आए हैं.

·       यदि आज का दिन आपकी जिन्दगी का आखिरी दिन होता, तो क्या आप, आज जो करने वाले है, वो करेगें?

तुम्हें सलाम है जॉब्स.

स्त्रोत : आसानहै.नेट, हिंदीसाहित्यदर्शन.इन