Feb 11, 2018

व्यवहार का अर्थ



आध्यात्मिक गुरु व लाइफ कोच दीपक चोपड़ा.
जन्मदिन : 22 अक्टूबर 1946, नई दिल्ली
पेशा: Doctor, Public Speaker एंड Writer   
अचीवमेंट्स : 65 Books लिखी. 19 न्यूयार्क टाइम्स Bestsellers रही.
वर्ल्ड लेवल पर कई Reputed पुरस्कारों से सम्मानित
वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं.  

आइए उनके लिखे कुछ Quotes समझें. कमाल के है. कोई एक भी आपको Touch कर गया तो ये ब्लॉग लिखना मानो कामयाब रहा.

1.सोचना ब्रेन केमिस्ट्री का अभ्यास है.

2.आप जो पढ़ते हैं उससे परिवर्तित हो जायेंगे.

3.उनके साथ चलिए जो सत्य खोज रहे हैं. उनसे दूर भागिए जो ये सोचते हैं कि उन्होंने सत्य खोज लिया है.

4.आपको अपने भीतर वो जगह खोजनी होगी जहाँ कुछ भी असंभव नहीं है.

5.परम आनंद में होना बच्चों की प्रकृति है.

6.प्रेम को कारण की ज़रुरत नहीं होती. वो दिल के तर्कहीन ज्ञान से बोलता है.

7.ब्रह्माण्ड में तीन चीजें हैं जिन्हें नष्ट नहीं किया जा सकता. आत्मा, जागरूकता और प्रेम.

8.हर बार जब आप उसी पुराने तरीके से प्रतिक्रिया करने के लिए ललचाते हैं तो स्वयं से पूछिए कि आप भूत के कैदी होना चाहते हैं या भविष्य के अग्र-दूत.

9.आप जिस तरह सोचते हैं, जिस तरह व्यवहार करते हैं, जिस तरह खाते हैं, इसका अर्थ इतना व्यापक है कि वो आपके जीवन के 30 से 50 साल तक प्रभावित कर सकता है.

10. आपने इस क्षण अपने जीवन में जो भी सम्बन्ध आकर्षित किये हैं, ठीक वही इस क्षण आपके जीवन में आवश्यक है. हर घटना के पीछे एक छिपा अर्थ है और यह छिपा अर्थ ही आपके अपने विकास में सहायता कर रहा है.

11.अपने आनंद से पुनः जुड़ने से महत्त्वपूर्ण और कुछ भी नहीं है. कुछ भी इतना समृद्ध नहीं है. कुछ भी इतना वास्तविक नहीं है.

12. प्रसन्नता ऐसी घटनाओ की निरंतरता है जिनका हम विरोध नहीं करते.

13. यदि आप और मैं इस क्षण किसी के भी विरुद्ध हिंसा या नफरत का विचार ला रहे हैं तो हम दुनिया को घायल करने में योगदान दे रहे हैं.

14. जितना कम आप अपना ह्रदय दूसरों के समक्ष खोलेंगे, उतनी अधिक आपके ह्रदय को पीड़ा होगी.

15. आप और मैं अनंत विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं. हमारे अस्तित्व के हर एक क्षण में हम उन सभी संभावनाओं के मध्य में होते हैं जहाँ हमारे पास अनंत विकल्प मौजूद होते हैं.

16. उथल-पुथल और अराजकता के बीच अपने भीतर शांति बनाये रखें.

17. जब आप कोई विकल्प चुनते हैं, आप भविष्य बदलते हैं.

18. ब्रह्माण्ड में कोई भी टुकड़ा अतिरिक्त नहीं है. हर कोई यहाँ इसलिए है क्योंकि उसे कोई जगह भरनी है. हर एक टुकड़े को बड़ी पहेली में फिट होना है.

19. हमारी सोच और हमारा व्यवहार हमेशा किसी प्रतिक्रिया की आशा में होते हैं. इसलिए ये डर पर आधारित हैं.

20. हर व्यक्ति भ्रूण में एक भगवान है. उसकी सिर्फ एक इच्छा है ;पैदा होने की.

21. यह भौतिक दुनिया, जिसमे हमारा शरीर भी शामिल है, देखने वाले की प्रतिक्रिया है. हम अपना शरीर वैसा ही बनाते हैं जैसा हम अपने जीवन में अनुभव लेते हैं.

22. हम ऐसे समय में जी रहे हैं जब दुनिया ने अचानक भारत को खोज लिया है क्योंकि उसके पास कल्पना करने को कुछ नहीं बचा है. कल्पना के लिए यहाँ अनिर्मित वस्तुओं की कमी नहीं है.

23. यहाँ तक कि जब आप ये सोचते हैं कि आपका जीवन बिल्कुल ठीक है, कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो आपके भाग्य को ऐसे बदल देती हैं जैसा आपने कभी सोचा भी नहीं होता है.

24. किसी चीज को पकड़ कर बैठे रहना अपनी सांस रोकने के समान है. आपका दम घुट जायेगा. इस भौतिक जगत में कुछ भी पाने का एक ही तरीका है ; उसे जाने दें. इसे जाने दें और वो हमेशा के लिए आपकी हो जाएगी.

25. अहंकार, दरअसल वास्तविकता में आप नहीं हैं. अहंकार आपकी अपनी छवि है; ये आपका सामाजिक मुखौटा है; ये वो पात्र है जो आप खेल रहे हैं. आपका सामाजिक मुखौटा प्रशंसा पर जीता है. वो नियंत्रण चाहता है, सत्ता के दम पर पनपता है, क्योंकि वो भय में जीता है.

26. यदि आप भय और क्रोध से बिना उनका मतलब जाने छुटकारा पाना चाहते हैं तो वो और शक्तिशाली होकर लौटेंगे.

27. किसी कारणवश खुश होना एक दूसरे तरह का दुःख है क्योंकि कारण कभी भी हमसे छीना जा सकता है.

28. सबसे रचनात्मक कार्य जो आप कभी भी करेंगे वो स्वयं को बनाने का कार्य होगा.