Feb 21, 2018

Happiness





खुश रहना और हैरान होना मनुष्य की जन्मजात नेचर है. एक छोटा बच्चा अक्सर खुश और हैरान क्यों रहता है? क्योंकि इन बेसिक, V r born with इनबिल्ट Happiness एंड Surprises. 

पर जैसे-जैसे बड़े होते हैं तो हमें Environment और Society के चेहरे देख कर लगता है कि जो सीरियस हैं, वो ही समझदार माने जायेंगे और हम क्या करते हैं? समझदार होना शुरू कर देते हैं. अब जो समझदार हो गया, जिसे दुनियादारी की ABCD आ गयी, वो हंसेगा किस बात पर? दुनिया में तो तनाव ही तनाव है. एक दुसरे की टांग खिचाई है. 

तो होता क्या है? Impurity आना start हो गया. अपना-पराया, तेरा-मेरा, आगे निकलने की मैराथन, दूसरों के दुःख में सुख आने का स्वाद और Critism में Satisfaction का तो मज़ा ही सबसे निराला. असर क्या हुआ? हर बात के मायने फायदे-नुकसान के तराजू में तुलने शुरू. 

नतीज़ा? आप और समझदार हो गए और Happiness का स्टेट ऑफ़ माइंड, Sadness की स्टेट ऑफ़ लिविंग में बदल गया.

अब आप किसी छोटे बच्चे को दोबारा करीब से देखो. 
आपने लाख कमा लिए होंगे पर उस के आगे गरीब से ही लग रहे हो. पैसा आ गया. शोहरत मिल गयी. सोशल – सर्किल माशा अल्ला. पर आप खो गए. उसके पल्ले कुछ नहीं. फ़िर भी वो अमीर दिख रहा है. नेचुरल प्रतीत होता है. हैरानी से आपको देख रहा है. उसे नहीं पता कि उसके सामने कोई समझदार खड़ा है जो उम्र में उससे काफ़ी बड़ा है. और अब आप सोच रहे हो कि मेरे समझदार हो जाने से क्या मकसद हल हुआ? आज हुआ या कल हुआ? बच्चे के सामने एक समझदार Body खड़ी है. आप ख़ुद तो नहीं हो वहां.


और तभी लोग बचपन में वापिस लौटना चाहते हैं. क्यों? क्योंकि वहां Purity है. ख़ुशी है. हैरानी है. आप हो. कैसे भी सही. पर आप ही हो वहां. 

तो जब 70 साल बाद भी वो ही तलाश करना पड़े जो 7 साल की उम्र में ही आपके पास था, फ़िर 63 साल क्या किया??  

तो अब?
अब क्या...
अपनी ख़ुश रहने की Natural State को बचाएँ और धमाल मचाएं.

बाकी आप ख़ुद ही समझदार हैं. आपको सबकुछ पहले से ही पता है. इनबिल्ट है. Try कर के देखिये. और कोशिशें कामयाब होती हैं.

आप कब हैरान हो रहे हैं? 

समझदार होने के बाद Last Time कब हैरान हुए थे? 


जाते-जाते

एक बार मुल्ला नसीरूद्दीन ने एक आदमी से कुछ उधार लिया था. मुल्ला समय पर उधार चुका नहीं पाया तो उस आदमी ने इसकी शिकायत बादशाह से कर दी. बादशाह ने मुल्ला को दरबार में बुलाने का आदेश दिया.

मुल्ला बेफिक्री के साथ दरबार पहुंचा. मुल्ला के दरबार पहुंचते ही वह आदमी बोला - बादशाह सलामत, मुल्ला ने बहुत महीने पहले मुझसे 500 दीनार बतौर कर्ज लिए थे और अब तक नहीं लौटाए. मेरी आपसे दरख्वास्त है कि बिना किसी देरी के मुझे मेरा उधार वापस दिलाया जाए.

यह सुनने के बाद मुल्ला ने जवाब में कहा - हुजूर, मैंने इनसे पैसे लिए थे मैं यह बात मानता हूं और मैं उधार चुकाने का इरादा भी रखता हूं. अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपनी गाय और घोड़ा दोनों बेचकर भी इनका उधार चुकाऊंगा.

तभी वह आदमी बोला - यह झूठ कहता है हुजूर इसके पास न तो कोई गाय है और न ही कोई घोड़ा. अरे इसके पास ना तो खाने को है और न ही एक फूटी कौड़ी है.

इतना सुनते ही मुल्ला नसीरूद्दीन बोला - जहांपनाह! जब यह जानता है कि मेरी हालत इतनी खराब है, तो मैं ऐसे में जल्दी इसका उधार कैसे चुका सकता हूं? जब मेरे पास खाने को ही नहीं है तो मैं उधार दूंगा कहां से?


बादशाह ने यह सुना तो ख़ूब हैरान हुए, फ़िर जोर से हंसे और मामला रफा-दफा कर दिया. अपनी हाजिर जवाबी से मुल्ला नसीरूद्दीन एक बार फिर बच निकलने में कामयाब हो गया.