Feb 11, 2018

हाथी और रस्सी




एक व्यक्ति रास्ते से गुजर रहा था. तभी उसने देखा कि एक हाथी एक छोटे से लकड़ी के खूंटे से बंधा खड़ा था. व्यक्ति को देखकर बड़ी हैरानी हुई कि इतना विशाल हाथी एक पतली सी रस्सी के सहारे उस लकड़ी के खूंटे से कैसे बंधा हुआ है?

ये देखकर व्यक्ति को आश्चर्य भी हुआ और हंसी भी आयी. उस व्यक्ति ने हाथी के मालिक से कहा – “अरे ये हाथी तो इतना विशाल और ताकतवर है फिर इस पतली सी रस्सी और खूंटे से क्यों बंधा है”? ये चाहे तो एक झटके में इस रस्सी को तोड़ सकता है लेकिन ये फिर भी क्यों बंधा है?

हाथी के मालिक ने व्यक्ति से कहा कि श्रीमान जी, जब यह हाथी छोटा था, मैंने उसी समय इसे रस्सी से बांधा था. उस समय इसने खूंटा उखाड़ने और रस्सी तोड़ने की पूरी कोशिश की थी. लेकिन यह छोटा था, शायद इसलिए नाकाम रहा. इसने हजारों कोशिश कीं लेकिन जब इससे यह रस्सी नहीं टूटी तो हाथी को यह विश्वास हो गया कि यह रस्सी बहुत मजबूत है और वह रस्सी को कभी नहीं तोड़ पायेगा. इस तरह हाथी ने रस्सी तोड़ने की कोशिश ही खत्म कर दी.

आज यह हाथी इतना विशाल और ताकतवर हो चुका है, लेकिन इसके मन में आज भी यही विश्वास बना हुआ है कि वह इस रस्सी को कभी नहीं तोड़ पायेगा. इसलिए यह इसे तोड़ने की कभी कोशिश ही नहीं करता. इसलिए इतना ताकतवर होकर भी यह हाथी एक पतली सी रस्सी से बंधा है.

उस हाथी की तरह ही हम इंसानों में भी शायद कई ऐसे विश्वास बन जाते हैं, जिनसे हम कभी पार नहीं पा पाते. एक बार असफल होने के बाद हम ये मान लेते हैं कि अब हम सफल नहीं हो सकते और फिर हम कभी आगे बढ़ने की कोशिश ही नहीं करते और झूठे विश्वासों में बंधकर पूरी जिंदगी इस हाथी जैसी गुजार देते हैं.



वो पतली रस्सी इतनी मजबूत नहीं थी कि टूट न सके. बस नज़रिए का कमाल है. कुछ रस्सी पर भरोसा कर लेते हैं और कुछ खुद पर. और रस्सी आपसे ताकतवर होती नहीं. कभी नहीं. ये तो मानते ही होंगे आप? कोई मुर्दा चीज़ आख़िरकार जिंदा आदमी से ताकतवर हो भी कैसे हो सकती है?