Feb 12, 2018

दामाद



मुझे नहीं पता था शादी का सही मतलब
सुना था एक रिवाज है जो निभाना पड़ता है
आसपास कितनी ही शादियाँ अटेंड की थी
एक लड़का और एक लड़की बड़ी सी कुर्सियों पर बैठते थे
उनके इर्द-गिर्द सभी रिश्तेदारों का जमावड़ा
फ़ोटो खिचवाने का जुनून और शगुन के लिफाफे 
आशीर्वाद के साथ
क्या मिला, किसने क्या दिया 
ये एक नेशनल डिबेट रहती थी
खाना कैसा बना है 
इसे लेकर सब संजीव कपूर दिखाई देते थे
लड़के को क्या चाहिए या 
लड़की के मन में क्या चल रहा होगा
इससे शायद ही किसी को मतलब रहता होगा
कुछ इतराते चेहरे और कुछ भविष्य के लिए सोचते चेहरे
और अगली सुबह सब पुराना हो जाता था
अब वो लड़की किसी की बहु थी 
पर उनकी नहीं रह गयी थी जिनकी थी
लड़का जो कल तक कुछ नहीं था आज किसी का दामाद था और गर्व से उसका सर ऊँचा था मानो
ओलिंपिक में मैडल जीत लाया हो
और जब मुझे तुम्हे देखने का निमंत्रण मिला तो मैं घबरा गया था
पता नहीं तुम कैसी होगी?
तुम्हारी उम्मीदें मुझसे कैसी होंगी?
क्या मुझ जैसे बेवकूफ से आदमी को पाना पसंद करोगी?
कही तुम अपना घर छोड़ कर अकेली तो महसूस नहीं करोगी?
क्या मैं तुम्हे खुश रखने का वादा तमाम उम्र निभा सकूँगा?
क्या मैं तुम्हे उतना ही खुश देखना चाह सकूँगा जितनी अपनी बहनों को देखना चाहता था?
क्या मैं अपना फ़र्ज़ निभा सकूँगा? 
या के फॉर्मेलिटी कर बैठूँगा? 
सवाल पूरी जिंदगी से जुड़े थे
डरना स्वाभाविक था
मैंने हाथ जोड़कर आसमान की ओर देखा
कृष्णा मुस्कुराये और मैं चल पड़ा तुमसे मिलने
तुमसे मिला तो तुम चुप थी
हालत मेरी भी नाजुक ही थी पर 
कॉन्फिडेंस मुझे ही दिखाना था
तुम्हारे परिवार के चेहरे मेरी तरफ बड़ी आशा से देख रहे थे
जैसे मैं किसी बड़े शहर से आया हूँ?
तुम्हे देख के मुझे लगा कि तुम माँ को माँ समझ पाओगी और माँ तुम्हे बेटी 
तुम बोली नहीं कुछ भी पर मैंने तुम्हे पढ़ लिया था
तुम सबसे अलग थी और
शायद वैसी ही जो मुझे झेल सकती थी अपनी सच्चाई से
मैंने फ़िर आसमान की और देखा
कृष्णा फ़िर मुस्कुराये 
और मैं समझ गया कि
मुझे यहाँ फोटो क्लिक करानी ही होगी 
और कुछ दिनों बाद 
तुम घर की अन्नपूर्णा बन कर पधार गयी.
इस 16 फ़रवरी को तुम्हे मुझे पनाह दिये 
15 साल होने जा रहे हैं और
सच कहूँ तो
मैं आज भी जब आसमान की और देखता हूँ 
तो कृष्णा उसी तरह मुस्कुराते हैं
तुम ही हो जिसे लेकर मेरा विश्वास कभी नहीं टूटा
तुम ही हो जिसने 
सही मायनों में मेरी आत्मा पर दस्तक दी
सिर्फ़ तुम्ही हो जिसने 
मेरी गलतियों और मूर्खताओं पर नाज किया
तुम्ही हो जब मुझे ज़रूरत पड़ी तो 
तुम दौड़ पड़ी ये सोचे बिना कि क्या होगा?
तुम्ही हो जो मुझे जिंदा रखती हो उस वक़्त भी जब मैं कुछ नहीं होना चाहता 
तुम्हारा सैक्रिफाइस तुम्हारा नहीं हमारा है
और तुमने जो परिवार को बांधे रखा वो कमाल है
तुमने जो माँ – पिता जी को मुस्कुराहट दी वो अतुल्य है
धन्य है तुम्हारे माँ-पिता जिन्होंने हम पर यकीन किया
धन्य है मेरी किस्मत कि मेरा नाम तुमसे जुड़ा
इस वैलेंटाइन पर तुम्हे दिल से कोटि-कोटि नमन
तुम्हारे प्यार और तुम्हारे प्रति सम्मान को जताने के लिए
मेरे शब्दों की डिक्शनरी अभी बहुत छोटी है
उम्मीद करूँगा की तुम्हे भी उतना ही अच्छा महसूस होता होगा
जितना मुझे हमेशा होता है
इतने साल गुजर गये
आज भी जब मैं आसमान की और देखता हूँ तो
कृष्णा मुस्कुराते हैं 
बिलकुल उसी तरह जैसे 2003 में मुस्कुराये थे
ये सिर्फ़ एक शादी नहीं, मेरी ख़ुशकिस्मती है

मैं जीवन में सिर्फ़ एक बार ही खुद को 

सही साबित कर सका हूँ जब मैंने तुम्हे पहली बार पढ़ा था 

मेरा वो एक नतीजा ही आज तक सही निकला बस 

तुम ऐसे ही मुस्कुराती रहना और 

मैं जिंदा रहूँगा. 

हैप्पी वैलेंटाइन्स डॉ. ऍम.
हैप्पी वैलेंटाइन्स मेरे कृष्णा.