Feb 8, 2018

जगजीत सिंह




अब किसी से क्या कहें…
अपने दिल की दास्ताँ…।
बस खुदा का शुक्र है…
जो भी हुआ अच्छा हुआ…।
तुमने दिल की बात कह दी…
आज ये अच्छा हुआ… ।

जब भी गज़ल- गायकी की बात होती है. जगजीत सिंह से ही बातचीत की शुरुआत होती है. हो भी क्यों ना ? गजल को आम आदमी के बीच लोकप्रिय बनाने में जगजीत सिंह का योगदान हिंदुस्तान कैसे भूल सकता है? ग़ज़ल के महानायक जगजीत सिंह आज 8 फरवरी के दिन ही जन्मे थे. आज चाहे वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी मखमली आवाज आज भी हमारे जीवन में गुलाब की तरह महकती है.

आइये जानते हैं गज़ल की इस महान आत्मा के बारे में.
1. जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी 1941 को राजस्थान के श्रीगंगानगर में हुआ था.

2. उनकी Schooling खालसा स्कूल, श्रीगंगानगर में हुई. जालंधर के DAV कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया और हरियाणा की Kurukshetra University से उन्होंने हिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन की.

3. Kurukshetra University के उस समय के कुलपति प्रोफ़ेसर सूरजभान ने जगजीत सिंह जी की संगीत की प्रतिभा को भांप लिया और उनको म्यूजिक के फ़ील्ड में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित किया। उनके मोटिवेशन से जगजीत 1965 में मुंबई चले आये.

4. जगजीत सिंह ने अपनी संगीत समझ को गहराई देने के लिए पंडित छगन लाल शर्मा के मार्गदर्शन में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखा. उसके बाद उन्हें उस्ताद जमाल ख़ान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखने का अवसर भी प्राप्त हुआ.

5. अब उनके संघर्ष करने की बारी आ चुकी थी. मुंबई में शुरुआती दिनों में वो पेइंग गेस्ट के तौर पर रहे.

6. शुरू में पेट भरने के लिए वो विज्ञापनों के लिए जिंगल्स गाते और शादी या किसी फंक्शन में अपनी प्रस्तुति देकर  अपनी रोज़ी रोटी का जुगाड़ करते.

7. 1967 के दिनों में उनको मुलाकात चित्रा जी से हुई. दोनों को एक दूसरे का साथ अच्छा लगा और 1969 में दोनों ने शादी कर ली.

8. शुरू के दिनों में उन्हें कॉलेज स्टूडेंट्स की चॉइस के गाने ही गाने पड़ते थे क्योंकि शास्त्रीय संगीत को सुनने वाली ऑडियंस अभी जगजीत सिंह की रेंज से बाहर थी.

9. फिर एक दिन जगजीत का सितारा चमकने का दिन आ ही गया. मशहूर म्यूज़िक कंपनी H.M.V. को उस वक़्त एक क्लासिकल संगीत एल्बम बनानी थी. जगजीत ने मौका नहीं गवांया और नतीज़ा ये रहा कि 1973 में उनका पहला एलबम ‘द अनफ़ॉरगेटेबल्स’ रिलीज़ हुआ और सुपरहिट रहा. अब जगजीत सिंह का नाम और कद म्यूजिक इंडस्ट्री में बढ़ने लगा.

10. जगजीत सिंह गज़ल को आम आदमी तक ले जाना चाहते थे. उन्होंने इसके लिए गायकी में खूब Experiments भी किये. इस बात के लिये उन्हें उस समय के दिग्गजों की आलोचना भी सहनी पड़ी परन्तु वो अपना काम करते रहे.

11.  जगजीत साहब ने मीरो-ग़ालिब, फ़ैज-फ़िराक़, बशीर बद्र, गुलज़ार, निदा फ़ाज़ली और जावेद अख़्तर जैसे महान शायरों की गज़लों को अपनी मखमली आवाज़ दी.

12.  लता जी के साथ उन्होंने एल्बम ‘सजदा’ की, जो बहुत पसंद की गयी. निदा फ़ाज़ली के साथ एलबम ‘इनसाइट’ और जावेद साहब के साथ ‘सिलसिले’ सुपरहिट रहा.

13.  गुलज़ार के साथ उनकी दोस्ती भी एक मिसाल बनी. उनके साथ जगजीत सिंह ने ‘मिर्ज़ा ग़ालिब’, ‘मरासिम’‘, कहकशां, कोई बात चले’ और डिफ़रेंट स्ट्रोक्स जैसी Superduper ग़ज़ल एल्बम बनाई.

14. जिंदगी का सफ़र लेकिन सबके लिए हमेशा छावं नहीं देता. जगजीत सिंह को भी जिंदगी की कठिन परीक्षा देनी पड़ी. उनके इकलौते बेटे विवेक सिंह की साल 1990 में एक कार दुर्घटना में मौत हो गई. अपने बेटे की मौत से जगजीत सिंह टूट गए. वो सालों तक सदमे में रहे और  इस हादसे से उबरने में उन्हें काफी वक्त लगा.

15.  जगजीत सिंह ने न केवल हिंदी बल्कि पंजाबी, बंगाली, गुजराती और नेपाली भाषाओं में गाना गाकर हर वर्ग के श्रोता को अपना दीवाना बना लिया.

16.   ग़ज़ल गायकी में उनके योगदान को सम्मान देते हुए सरकार ने उन्हें पद्मश्री और पद्मविभूषण से भी नवाजा.

17.   अक्टूबर 10, 2011 को जगजीत सिंह साहब ने आखिरी सांसें ली.

18.  जगजीत सिंह ऐसे फनकार थे जिनकी तुलना किसी से करना जैसे सूरज को रोशनी दिखाने जैसा होगा. मोहब्बत के अलफ़ाज़, ज़ज्बात को बयाँ करना, और जुदाई के दर्द को सुरों में ढालना कोई जगजीत साहब से सीखे.

19. वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी.....तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो...तेरे आने की जब ख़बर महके....पत्थर के ख़ुदा, पत्थर के सनम....न जाने कितनी अमर गज़ल सुना गए जगजीत साहब. सुन कर लगता है कि हम सब की जिंदगी मानो जी हो जगजीत साहब ने....अकेले.


आज का ये आर्टिकल इस महान व्यक्तित्व को समर्पित.