Feb 9, 2018

हँसना और रोना




1. एक छोटा बच्चा – उसकी हंसी देखो. उसका रोना देखो. उसका नाचना देखो. कितना नेचुरल. कितना गहरा. कितना सहज. वह इसी तरीके से अपने समाज से जुड़ता है. उसका हिस्सा बन जाता है.

2. सच तो ये है कि यदि आप हंस नहीं सकते तो रो भी नहीं सकेंगे. हंसना और रोना एक दूजे के पक्के दोस्त हैं. ये एक घटना के हिस्से हैं जो आपको परिपक्व, सच्चा और ईमानदार बनाते है. रोना कोई कमज़ोरी नहीं है. ये भी सच के साथ बह जाने की एक अवस्था है. हंसना और रोना दोनों ही आपको हल्का करते हैं. बस दोनों एक्टिविटी नेचुरल होनी चाहिये और आप ध्यान में उतर जाते हो. विचारहीन. जीरो. अब आप बच्चे हो गए दोबारा. इसे मत छोड़ना.

3. यदि आप ठीक से हंस सको और रो सको, तो ही जिन्दा हो. मरा हुआ आदमी कैसे हंसेगा? और कैसे रो सकेगा? वो तो बस सीरियस मालूम पड़ेगा. एक आवरण ओढें हुए नकली सी डेड बॉडी. और कुछ नहीं.


4. एक मरा हुआ आदमी आपकी क्या मदद करेगा? वो तो अपने इर्द-गिर्द मुर्दों की फ़ौज चाहेगा. जिंदा आदमी से नफ़रत करेगा क्योंकि उसका फ्लेवर ही ऐसा बन चुका है. वो आपको नकार देगा. दगा देगा. तो आप सावधान रहना. वो सिर्फ़ सीरियस बातें करेगा और आपको भी मुर्दा बना डालेगा. जिंदा आदमी आपको जिंदगी देगा. हसंना सिखाएगा. रोना सिखाएगा. चुनाव आपका है कि जिंदा रहना है या मुर्दा. इसलिए जीने के लिए हंसना और रोना दोनों ज़रूरी है और गंभीरता मतलब मृत्यु.

5. करोड़ों लोग हैं जिनके आंसू सूख गए है. उनके जीने की चाहत, आत्मा से जुड़ाव मर चुका है. उन्हें ख़ुद पर रोना और हंसना सीखना होगा. कब तक दूसरों के दुखों में खुशियाँ तलाशते खुद को संतुष्ट करने का ग़लत प्रयास करते रहेंगे? उन्हें जुड़ना होगा एक बच्चे की तरह और मुस्कुराना होगा नहीं तो पृथ्वी मानो साँस लेते मुर्दों का बोझ सह रही है.

6. याद रखिये कि हंसते हुए थॉट्स रुक जाते हैं. जैसे कोई शानदार चुटकुला सुना तो जोर की हंसी अपने आप आ जाती है. उस अवस्था में चल रहे विचार थम जाते हैं. आप की ऊर्जा लौट आती है. अगर आप हंसते हुए भी विचार करते चल रहे हो तो आपका हंसना कमज़ोर और बेमानी होगा. आपकी हंसी अपंग और नकली होगी. हंसना, रोना और नाचना तीनों ही परिपक्वता के दरवाजे हैं. पर ये तभी खुलेंगे जब आप दिल से करोगे. दिखाने के लिए करोगे तो मतलब साफ़ है कि अभी जिंदा नहीं हुए हो. कब्र पर कब्ज़ा किये बैठे हो कि जमीन का ये हिस्सा सिर्फ़ मेरा है.

7. लाफिंग बुद्धा को देखो. बस हंसता ही दिखता है. आप किसी के बारें में पूछो और वो हंसता रहेगा. आप किसी के बारें में ना भी पूछो और वो हंसता रहेगा. बोलेगा कुछ नहीं. बस हंसना ही उसका संदेश है. और उसको देख कर सब हंसते हैं. वो क्या सोच के हर बात पर मुस्कुराता है, ये कमाल की साइंस है पर क्या हमारी साइंस सीरियसनेस के अलावा भी कुछ और सिखा रही है?


अंत में जाते जाते...
हंसना मना है: एक ऑफिस में बॉस अपने वर्कर्स को चुटकुले सुना रहा था. सब लोग हंस रहे थे. बॉस चुटकुला सुनाये तो हँसना तो पड़ता ही है. नौकरी जो बचानी है आख़िर. वर्कर्स में से एक महिला रिसेप्शनिस्ट बिल्कुल चुप थी. बॉस ने पूछा व्हाई आर यू नौट लाफिंग? महिला ने उत्तर दिया – ‘मैं इस महीने के अंत में जॉब से रिजाइन दे रहीं हूँ तो हंस कर क्या मिलेगा?’.

सार: मतलब ये कि अब हंसना भी एक बिज़नेस हो चला है. इसकी प्यूरिटी ख़त्म हो रही है. सच मानिये कि अगर आप हंसना भूल रहें हैं तो बड़ी भारी भूल कर रहे हैं. अपनी ओरिजिनालिटी, अपना भोलापन खो रहे हैं. दूसरों को हंसाएं और खुद हंसी आपके गले से लिपट जाएगी. और जब आप को दूसरों का अच्छा करके रोना भी पड़े तो रो लेना. वो ख़ुशी के आंसू होंगे जो आपको जिंदा करते रहेंगे हमेशा. आपके रोने को नेचुरल कर देंगे. आपकी हंसी को नेचुरल कर देंगे, एक बच्चे की हंसी जैसा. बस सच के साथ बहना. फिर कोई दुःख आपको सता नहीं सकेगा. और ये पैसे से नहीं खरीदा जा सकता.


जिंदा रहिये. जिंदा रखिये.