Feb 10, 2018

स्टूडेंट्स और 500 रूपए




एक कॉलेज में प्रोफेसर साहब अपने लेक्चर में स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे थे. लगातार क्लासेज चलते रहने से स्टूडेंट्स थका हुआ और बोरिंग महसूस कर रहे थे. 

उन्होंने प्रोफेसर साहब से रिक्वेस्ट किया कि सब्जेक्ट टॉपिक से कुछ अलग हटकर बतायें ताकि उनका पढ़ने का इंटरेस्ट दोबारा बन सके.

स्टूडेंट्स को कुछ नया सिखाने के लिए प्रोफेसर ने जेब से 500 रुपये का एक नोट निकाला. स्टूडेंट्स की तरफ वो नोट दिखाकर पूछा – क्या आप लोग बता सकते हैं कि यह कितने रुपये का नोट है ?

सभी स्टूडेंट्स ने कहा – “500 रुपये का”

प्रोफेसर बोले – इस नोट को कौन-कौन लेना चाहेगा? सभी स्टूडेंट्स ने हाथ खड़ा कर दिया.

अब प्रोफेसर साहब ने उस नोट को मुट्ठी में बंद करके बुरी तरह मसला जिससे वह नोट बुरी तरह कुचल सा गया मगर फटा नहीं. अब प्रोफेसर ने फिर से स्टूडेंट्स को नोट दिखाकर कहा कि अब ये नोट कुचल सा गया है अब इसे कौन लेना चाहेगा?

सभी स्टूडेंट्स ने फिर हाथ उठा दिया.

अब प्रोफेसर साहब ने उस नोट को जमीन पर फेंका और अपने जूते से बुरी तरह कुचल डाला. फिर नोट को उठाकर फिर से स्टूडेंट्स को दिखाया और पूछा कि अब इसे कौन लेना चाहेगा?

सभी स्टूडेंट्स ने फिर से हाथ उठा दिया.

अब प्रोफेसर ने कहा कि डिअर स्टूडेंट्स “आज मैंने तुमको एक बहुत बड़ा पाठ पढ़ाया है. 
ये 500 रुपये का नोट था, जब मैंने इसे हाथ से कुचला तो ये नोट कुचल गया लेकिन इसकी कीमत 500 रुपये ही रही, इसके बाद जब मैंने इसे जूते से मसला तो ये नोट गन्दा हो गया लेकिन फिर भी इसकी कीमत 500 रुपये ही रही”.

ठीक वैसे ही आपकी जो वैल्यू है और जो काबिलियत है, वो हमेशा वो ही रहती है, फ़िर चाहे आपके ऊपर कितनी भी मुश्किलें आयें, कितनी ही मुसीबतों के पहाड़ आपके ऊपर आकर गिरें, लेकिन आपको अपनी वैल्यू नहीं गंवानी है. 
आप कल भी बेहतर थे, आज भी बेहतर हैं और आगे भी बेहतर ही रहेंगे.


ये सब देखने और सुनने के बाद वो स्टूडेंट्स फिर कभी बोर नहीं हुए. उनको अपनी वैल्यू का एहसास होना शुरू हो गया था.

जाते-जाते: 
आप भी समय-समय पर अपना वैल्यू इंडेक्स चेक करते रहिये. फ़िर शायद ही कभी बोरियत आपको तंग कर सके.