Feb 9, 2018

‘पैडमैन’



‘P’ अक्षर से शुरू होने वाली फिल्मों का जलवा देखते ही बन रहा है. पहले ‘पद्मावत’ और अब अक्षय कुमार की 'पैडमैन'. फ़िल्म 9 फ़रवरी को रिलीज़ हुई. सामाजिक संदेश देती इस फ़िल्म को दर्शकों का अच्छा साथ मिला और फ़िल्म ने पहले ही दिन 14 करोड़ का बिज़नेस दिया. फ़िल्म का कुल बजट सिर्फ़ 20 करोड़ था. इस तरह देखा जाये तो ये फ़िल्म तो चल निकली.

जानकारों के मुताबिक पहले सप्ताह तक फ़िल्म 70 करोड़ तक कमा सकती है और उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही ये 200 करोड़ क्लब में दस्तक दे सकती है.

ये फ़िल्म क्यों बनी? क्या मोटिवेशन था? कौन है असली पैडमैन? क्यों बना पैडमैन? इन सब सवालों के जवाब आपको इस आर्टिकल से मिलेंगे. आइये यात्रा शुरू करें.

1. 'पैडमैन' रियल स्टोरी बेस्ड फ़िल्म है और अक्षय कुमार फ़िल्म में अरुणाचलम मुरुगअनंतम का किरदार निभा रहे हैं.

2. असली ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगअनंतम हैं जिन्होंने महिलाओं की माहवारी में इस्तेमाल होने वाले महंगे सैनिटरी पैड की जगह सस्ते सैनिटरी पैड बनाने की मशीन बनाई ताकि गावों और देहातों में रहने वाली गरीब महिलाएं साधारण कपड़े इस्तेमाल करने की बजाय पैड्स का यूज़ कर सकें.

3. उनके इस आविष्कार और सोशल रेस्पोंसिबिलिटी को देखते हुए उनको पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया है.

4. 'पैडमैन' फ़िल्म को डायरेक्शन आर. बाल्की ने दिया है और ट्विंकल खन्ना इस फिल्म की प्रोड्यूसर हैं.

5. आइये अरुणाचलम मुरुगअनंतम से मिलते हैं.


6. अरुणाचलम मुरुगअनंतम का जन्म 1962 में तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ.

7. अरुणाचलम का बचपन गरीबी में निकला. कोयंबटूर में वो सबसे गरीब परिवार से आते हैं.

8. उनके बचपन के समय ही उनके पिता का देहांत हो गया. उनकी मां ने मेहनत-मजदूरी कर के उन्हें पाला पोसा.

9. 14 साल की उम्र में उन्हें स्कूल छोड़ना पड़ा. इधर-उधर काम करके वो गुजारा चलाते रहे.

10. 1998 में उनकी शादी शांति जी से हुई.

11. अब यहीं से ‘पैडमैन’ की असली कहानी शुरू होती है. शांति जी को जब पीरियड्स होते थे तो वो कपड़े और अखबार के कागज का इस्तेमाल करती थीं. सैनेटरी नेपकिन क्या होता है, ये उन्हें कहां पता था? अरुणाचलम को जब इसकी ख़बर लगी तो वो हैरान से रह गए. जिसके बाद उन्होंने पैड मशीन बनाने की ठान ली ताकि शांति जी और दूसरी और महिलाओं को वो कपड़ों से होने वाले इन्फेक्शन से बचा सकें और सस्ते दामों पर पैड भी उपलब्ध करा सकें.

12. उनको मशीन बनाने में करीब 2 साल का समय लगा और पूरी जानकारी जुटा कर उन्होंने 65,000 रु. में पैड मशीन तैयार कर दी. फ़िर उन्होंने गांव-गांव जाकर महिलाओं को पैड के इस्तेमाल के प्रति जागरूक भी किया.

13. आज अरुणाचलम कोयंबटूर में अपनी खुद की कंपनी चलाते हैं और लगभग 5,000 गावों में उनके बनाये सैनिटरी पैड का इस्तेमाल किया जा रहा है.

14. अरुणाचलम के इस आईडिया को दुनिया भर में बहुत सराहा गया और उनके इस प्रयोग से कई महिलाओं की जिंदगी बदल गयी.

15. उनकी ये मशीन अभी भारत के 23 राज्यों में लगाई गई हैं और यहां बने पैड बाजार में मिलने वाले सैनिटरी पैड से लगभग एक तिहाई कीमत पर मिल जाते हैं.

16. अरुणाचलम अपने इस प्रोजेक्ट को अब 100 से ज्यादा देशों में लांच करने की तैयारी में हैं.

कोई प्रॉब्लम सामने आये तो अधिकतर लोग उसको ये सोच कर टाल जाने की कोशिश करते हैं की ये तो सबके साथ है और ठीक नहीं होगी. लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो प्रॉब्लम की जड़ तक जाते हैं और समाधान निकाल लाते हैं.
और शायद ग़रीबी से बड़ी प्रॉब्लम और क्या हो सकती है?


असली ‘पैडमैन’ को सलाम है और अक्षय कुमार को बड़ा सा थैंक यू जिन्होंने कमर्शियल कामयाब एक्टर होकर भी अपनी फिल्म के लिए ये सब्जेक्ट चुना.