Mar 15, 2018

इनपुट और आउटपुट


अभी कुछ पलों पहले ही महान साइंटिस्ट स्टीफन हाकिंग इस दुनिया को अलविदा कह गए. उन्होंने ब्रह्माण्ड की थ्योरी पर कमाल का काम किया था.
लेकिन उन्हें भी जाना पड़ा.
और कोई नहीं जान सका आज तक कि जाना क्यों पड़ता है? आप सोच सकते हैं, डिस्कस कर सकते हैं, ख़ुद को कन्विंस कर सकते हैं. डिबेट कर सकते हैं. अच्छा कह सकते हैं. बुरा कह सकते हैं. लेकिन जाना तो होगा ही.
ये ही एकमात्र स्टेबल थ्योरी है कि एक दिन कोई पॉवर आपको खींच लेगी. हमेशा के लिए. और ये सच सिर्फ़ आप तक सीमित रहेगा.
संसार में कितनी भी थ्योरी बन जायें. इस थ्योरी की सच्चाई और इसका पासवर्ड सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके पास ही सुरक्षित रहेगा, जो वहा गया होगा. और ये पासवर्ड कोई दूसरा चुरा ही नहीं सकता.
ये ओपन नेटवर्क है. कोई सिक्यूरिटी मैकेनिज्म नहीं है, फ़िर भी नज़ारा देखिये कि आपका पासवर्ड कोई और नहीं चुरा सकेगा. और कमाल ये है कि आपका ये पासवर्ड आपको पता होगा लेकिन आप चाह कर भी किसी को बता नहीं सकते. बताइए? क्या आप ऐसा कर सकेंगे?
ये तो क्लाउड कंप्यूटिंग, फ़ोग कंप्यूटिंग या बिग डाटा या फ़िर इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के भी बियॉन्ड का मामला लगता है. अभी तो साइंटिस्ट इनकी ही वर्किंग और सिक्यूरिटी पर काम कर रहे हैं.
पर उस नेटवर्क का क्या जो ओपन है. सबको पता है. सबके पास उसके लॉग इन और पासवर्ड है. लेकिन मज़ाल है कि कोई उस नेटवर्क में सेंधमारी कर सका हो? ये सचमुच हैरानी से भर देता है जीवन को.
आप अगर सोचें तो देखेंगे कि अमीर हो या गरीब, समझदार हो या नादान, मालिक हो या नौकर, राजा हो या प्रजा, और लाखों केटेगरी में जन्में अरबों जीव-जंतु, फूल, पत्ते, फसलें. इन सभी को एक समय अपने नेटवर्क में वापिस जाना होगा.
इसलिए कुछ ऐसा कर जायें कि दूसरे नेटवर्क के लोग भी ये कह सकें की कमाल का यूजर था. 
और ये सिर्फ़ अपने तक सोचने का विषय नहीं है. ये किस्मत का विषय नहीं है. ये टेक्नोलॉजी का विषय भी नहीं है. ये आपको स्वयं को पहचानने का विषय है. ख़ुद से मुलाकात का विषय है. 

प्रैक्टिकल लाइफ में भी तो आप ये ही सब करते होंगे. 
दूसरों से तो ख़ूब मिलते हैं. हम एक बार ख़ुद से ही मिलें. हमारा ही नेटवर्क है. पता तो चले कि हम ख़ुद की कंपनी में कैसा महसूस करते हैं? ख़ुद के विचारों के साथ ख़ुद कैसे जी पाते हैं. फ़िर किसी और नेटवर्क की और देखने और तुलना करने के बोझ से शायद मुक्ति मिले. आप अब अच्छा महसूस करेंगे और दूसरे नेटवर्क के लिए प्रोडक्टिव भी.
और करना भी क्या था? 
इसे भी आज़मा कर देखिये. और ख़ुद को याद दिलाते रहियेगा कि आपका पासवर्ड सिक्योर है. प्रोसेसर अपना काम ख़ुद कर देंगे.
शायद फ़िर हम देख पायें कि हमारा नेटवर्क एक ही है जस्ट विद यूनिक पासवर्ड फॉर इच. फ़िर हमें कुछ नहीं करना होगा. नेटवर्क ऑटो-मोड पर काम करेगा. जैसा आप इनपुट देंगे. आउटपुट मिल जायेगा.
अच्छा इनपुट देते रहिये. शानदार आउटपुट लेते रहिये. पहले देना पड़ता है. इनपुट पहले है, फ़िर आउटपुट. बाकी किस्मत.


क्या आप अब भी इसे सिर्फ़ किस्मत का दस्तूर मानते हैं? या ये आप से ही जुड़ा सीधा-साधा मामला है. आपको पता ही होगा कि आपका नेटवर्क कौन सा है? और पासवर्ड? और इनपुट भी?