Mar 18, 2018

कीमत




एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह रास्ते से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी. रोटी पका कर, उस रोटी को वो खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था.

एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रास्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.”

दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा.

वो कुबड़ा रोज रोटी ले कर जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा."

वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी कि -"हे भगवान, कितना अजीब व्यक्ति है, एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका?"

एक दिन गुस्से में आकर उसने एक निर्णय लिया और बोली -"मैं इस कुबड़े से निजात पा कर ही रहूंगी."

और उसने क्या किया कि उस रोटी में ज़हर मिला दिया जो वो रोज़ उसके लिए बनाती थी, और जैसे ही उसने रोटी को खिड़की पर रखने कि कोशिश की, कि अचानक उसके हाथ कांपने लगे और वह रुक गई ओर वह बोली - "हे भगवान, मैं ये क्या करने जा रही थी?" और उसने तुरंत उस रोटी को चूल्हे की आँच में जला दिया. एक ताज़ा रोटी बनायीं और खिड़की के सहारे रख दी.

हर रोज़ कि तरह वह कुबड़ा आया और रोटी ले कर, "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा" बड़बड़ाता हुआ चला गया. इस बात से बिलकुल बेख़बर कि उस महिला के दिमाग में क्या चल रहा है.

हर रोज़ जब वह महिला खिड़की पर रोटी रखती थी तो वह भगवान से अपने पुत्र कि सलामती और अच्छी सेहत और घर वापसी के लिए प्रार्थना करती थी, जो कि अपने सुन्दर भविष्य के निर्माण के लिए कहीं बाहर गया हुआ था. महीनों से उसकी कोई ख़बर नहीं थी.

ठीक उसी शाम को उसके दरवाज़े पर एक दस्तक होती है. वह दरवाजा खोलती है और भौचक्की  रह जाती है. अपने बेटे को अपने सामने खड़ा देखती है.
वह पतला और दुबला हो गया था. उसके कपडें फटे हुए थे और वह भूखा भी था. भूख से वो बेहद कमज़ोर हो गया था.

जैसे ही उसने अपनी माँ को देखा, उसने कहा- "माँ, यह एक चमत्कार है कि मैं यहां हूं. आज जब मैं घर से एक मील दूर था, मैं इतना भूखा था कि मैं गिर गया. मैं मर गया होता. लेकिन तभी एक कुबड़ा वहां से गुजरा. उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. भूख के मारे मेरे प्राण निकल रहे थे. मैंने उससे खाने को कुछ मांगा. उसने नि:संकोच अपनी रोटी मुझे यह कह कर दे दी कि- "मैं हर रोज़ यही खाता हूं, लेकिन आज मुझसे ज़्यादा जरुरत इसकी तुम्हें है. तो ये रोटी तुम ले लो और अपनी भूख मिटाओ.”

जैसे ही माँ ने उसकी बात सुनी, माँ का चेहरा पीला पड़ गया और अपने आप को संभालने के लिए उसने दरवाज़े का सहारा लिया. उसके दिमाग में वह बात घुमने लगी कि कैसे उसने सुबह रोटी में जहर मिलाया था. अगर उसने वह रोटी आग में जला कर नष्ट नहीं की होती तो उसका बेटा उस रोटी को खा लेता और अंजाम होता उसकी मौत?

और इसके बाद उसे उस कुबड़े के उन शब्दों का मतलब बिलकुल स्पष्ट हो चुका था कि "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा, और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा."

"सारांश"
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हमेशा अच्छा करो और अच्छा करने से अपने आप को कभी मत रोको. फिर चाहे उसके लिए उस समय आपकी प्रशंसा हो या ना हो.
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