Mar 15, 2018

नवरात्रि



नौ देवियां
जीवनी शक्ति मां दुर्गा के नौ रूप हैं :
1. शैलपुत्री
2. ब्रह्मचारिणी
3. चंद्रघंटा
4. कूष्माण्डा
5. स्कन्दमाता
6. कात्यायनी
7. कालरात्रि
8. महागौरी
9. सिध्दीदात्री

नवरात्र क्यों, नव-दिन क्यों नहीं?
प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया. रात्रि में प्रकृति की बहुत सारी रुकावटें खत्म हो जाती  हैं. आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है. उदाहरण के लिए – अगर दिन में आप किसी को आवाज दें तो वह ज्यादा दूर तक नहीं जा पाती. लेकिन ये ही आवाज रात को दी जाए तो वह बहुत दूर तक जा सकती है. इसके पीछे दिन के डिस्टर्बेंस के अलावा एक वैज्ञानिक आधार यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें रेडियो तरंगों और साउंड की तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं. रेडियो इस बात का जीता-जागता प्रमाण है. कम पॉवर के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना यानि सुनना कई बार मुश्किल होता है. जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है. इसीलिए, भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है. और ये ही कारण है कि दीपावली, होली, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाया जाता है.

नवरात्र क्या है?
पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं. उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं. इस समय के दौरान रोगाणुओं, विषाणुओं आदि के आक्रमण की संभावना सबसे अधिक होती है. शारीरिक बीमारियाँ अचानक बढ़ जाती हैं. इसलिए इस समय पर अच्छा स्वस्थ रखने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तन-मन को निर्मल रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम ही 'नवरात्र' है. इस समय शक्ति (देवी) के नव रूपों की उपासना की जाती है. 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना गया है. नव का मतलब है 9.

वर्ष में दो बार नवरात्र?
भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है. विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक. और इसी प्रकार ठीक छह महीने बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पहले तक. सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के यज्ञ, व्रत, पूजन, भजन, आदि करते हैं. शक्ति के 51 पीठों पर भक्त शक्ति की उपासना करने जाते हैं. जो भक्त इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने घर पर ही शक्ति की पूजा-अर्चना करते हैं.

क्या है नवरात्रों के पीछे का वैज्ञानिक रहस्य?
सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती रहती है. इसीलिए ऋषि - मुनियों ने रात का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक कहा है. पूजा के समय, मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के वाइब्रेशन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है. यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है. जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में अपनी विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं. उनके शुभ संकल्प अवश्य पूर्ण होते हैं. ऐसा माना जाता है.

अष्टमी या नवमी?
यह कुल की परम्परा के अनुसार तय किया जाता है.

जय माता दी.