Mar 23, 2018

ईश्वर, तुम समझ रहे हो ना?

ये कहानी क्या है बस एक एहसास है. जिसे हो गया उसे हो गया. तो सुनिए साहब.

एक हलवाई की छोटी सी दुकान लेकिन अपने समोसों के लिए बड़ी फेमस. एक बड़े से कड़ाही में समोसे तले जा रहे थे. 

उनमें से एक समोसा अपने रंग-रूप में निखार आने से बेहद खुश था. वह उबलते तेल में से फुदक-फुदक कर इधर उधर देख रहा था. ख़ुशी के मारे मानो डांस कर रहा हो. उसे पता था कि कुछ देर के बाद वो जिंदा नहीं होगा. उसे जाना ही होगा. फ़िर भी वो ख़ुशी के गीत गा रहा था. बीच-बीच में वो थोड़ा इमोशनल भी हो रहा था. अब उसका नंबर आने वाला था.

जब उसे कड़ाही से बाहर निकालने का प्रोसेस चल रहा था तो उसने प्लेट परोसने वाले लड़के को र्इश्वर मान कर मन ही मन प्रार्थना की, हे र्इश्वर, मुझे उस कोने में बैठे प्रेमी-प्रेमिका के प्लेट में मत परोसना. वो टेबल नंबर 7 वाली जोड़ी. प्रेमिका के प्लेट में तो हरगिज ही नहीं. वह प्रेमी के सामने नाक सिकोड़ कर नखरें दिखाएगी, ”मैं नहीं खाऊँगी, तेल की बदबू है. कितना अजीब है ये.
फ़िर प्रेमी शान दिखाएगा, जानू, नहीं खाना है तो छोड़ दो इसे. चिप्स मंगवा दूं? कोल्ड ड्रींक ले लो? नहीं पसंद तो हम कहीं और चलते हैं. बोलो. तुम कहो तो आर्डर अभी कैंसिल कर दूं.

और वह जो सामने टेबल नंबर 3 पर बैठा गोलू, उर्मी सेठ का बेटा - उसकी प्लेट में भी, मुझे कतर्इ मत डालना. कब से राक्षसी नजरों से हमें ही देख रहा है. डाक्टर ने उसे ज्यादा खाने को मना किया है. संयम बरत रहा है बेचारा मोटू. फिर भी 4-5 तो जरुर खाएगा ही. खाएगा क्या, मुहं में ठूंसेगा। 4 से 5 डकार लेगा. पेट पर हाथ लगा कर देखेगा और फिर से क्या खाया जाए यह सोचने लगेगा.

दुकान के बाहर जो दिहाड़ी मजदूर खड़ा है, जो कि अब तक दो तीन बार हमारी कीमत पूछ चुका है. वह बहुत ही भूखा है. मुझे देख कर उसके मुहं में पानी आ रहा है. वो ललचाई नज़रों से हमारी तरफ़ न जाने कब से देखे जा रहा है. पर 6 रूपए एक समोसे पर खर्च करना उसे खल रहा है. फिर भी वह आएगा. भूख और लालच से थक-हार कर ही आएगा. देखेगा-परखेगा. भाव-तौल करने की असफ़ल कोशिश भी करेगा. तब जाकर एक खरीदेगा. फ़िर भले ही इस खर्च की भरपाई करने के लिए बस के बदले उसे 10 किलोमीटर पैदल चल कर घर क्यों ना वापिस जाना पड़े.

र्इश्वर, तुम मुझे ही उस मजदूर को खाने को देना. मुझे लेकर वो सामने लगे उस पीपल पेड़ के नीचे चला जाएगा. मुझे घूमा-फिरा कर हर तरफ़ से मुझे देखेगा. मेरे रंग-रूप को निहारेगा. मेरी सुगंध लेगा. फिर बड़े ही प्यार से थोड़ा-थोड़ा तोड़ कर मुंह में डालेगा. मेरे स्वाद से उसकी आत्मा प्रसन्न होती रहेगी. मुझे खाकर उसका पेट भले ही ना भरे, मन अवश्य ही तृप्त होगा. सामने हैंडपंप होते हुए भी, पानी पीकर वो मेरे स्वाद के अहसास को हरगिज खोना नहीं चाहेगा. वो मुझे याद रखेगा.