Mar 26, 2018

गुस्सा

गुस्सा आना आज एक स्टेटस सिंबल बन गया है. 
हम अगर गुस्सा नहीं करेंगे तो सबको पता कैसे चलेगा कि हम किस लेवल के व्यक्ति हैं.

जितना ज्यादा गुस्सा, उतनी हाई-फाई हमारी पर्सनालिटी.
पर आपने देखा होगा कि हमें गुस्सा हमेशा किसी और पर या किसी और की वजह से आता है.
हमें कभी नहीं लगता कि गुस्से की वजह हम ख़ुद भी हो सकते हैं.
गुस्सा सिचुएशनअल होता है लेकिन हम इसको बबलगम की तरह लम्बा खीचनें लगते हैं. गलती किसी की भी हो, समाधान तो शांतिपूर्वक ही निकल सकेगा.

सही समय पर सही मात्रा में गुस्सा करना जहां हेल्थ के लिए बेहद जरुरी है वहीं इसे पालतू बना लेना समझदारी तो नहीं कही जा सकती. 

स्ट्रेसफुल वातावरण के चलते अब गुस्सा आना स्वाभाविक माना जाने लगा है लेकिन वातावरण स्ट्रेसफुल बन क्यों रहा है? अगर इस पर ध्यान दे दिया जाये तो शायद गुस्सा भी मुस्कराहट लाने में हमारी मदद कर सके. 
आइये देखें कभी-कभी क्या कर लेने से हम रिलैक्स हो सकते हैं?

1.      जब कभी आप किसी भी कारण उदास महसूस कर रहे हों तो कुछ ना करें. या तो टहलने निकल जायें ये चुपचाप जाकर सो जायें. थोड़ी देर बाद उदासी गायब.

2.      मूड ज्यादा ही ख़राब लग रहा हो तो शीशे के आगे खड़े हो जायें. 50 सेकंड्स तक ख़ुद पर हसें और ख़ुद से कहें “ मैं नहीं भी होता, तो क्या दुनिया नहीं चलती”. ख़ुद को डेड-सीरियस होने से रोक लें. कमाल का रिलैक्सेशन मिलेगा.

3.      किसी बात पर गुस्सा आ रहा हो या आने वाला हो तो झट से पानी पी लें. 10 गहरी सांस लें. बहुत आराम मिलेगा.

4.      शोर्ट टर्म गुस्सा ख़त्म करना हो तो दूसरों को माफ़ करना सीख लें.

5.      हमेशा के लिए गुस्सा ख़त्म करना हो तो ख़ुद को और दूसरों को इस ब्रह्माण्ड में एक छोटे से करैक्टर से ज्यादा न समझें. सबका रोल डिफाइंड हैं. सब एक दिन टाटा-बाय-बाय करके निकल लेंगे. जब आप ऐसा न्यूट्रल इफ़ेक्ट ख़ुद में ले आते हैं तो आप देखेंगे कि आप गहन शांति में आ गए.

6.      जिस पर गुस्सा आ रहा हो, तुरंत उसके पॉजिटिव पॉइंट्स ख़ुद को याद दिलाएं. ये नुस्खा भी बढ़िया काम करता है.

7.      गुस्से पर कंट्रोल नहीं कर पा रहें हो तो जिसकी वजह से गुस्सा आ रहा हो, उसकी जगह ख़ुद को एक बार रख कर देखें. क्या पता गलती आपसे ही ना हो गयी हो?

8.      याद रखिये, 95% गुस्से का कारण सिर्फ़ मिस-कम्युनिकेशन होता है. ये दूर करिए तो सब ठीक होने लगेगा.

9.      किन्हीं परिस्थितियों में सामने वाले से आपको बहुत दिक्कतें आने लगी हैं और उसको देखते ही गुस्सा आने लगे तो तुरंत अपना रास्ता बदल लें. उससे दूर रहना शुरू कर दें. अगर वो गलत होगा, तो थोड़े समय बाद वो इस चीज़ को समझ लेगा. आखिर उसे भी एक मनुष्य ही बनाया गया है. उसको भी ख़ुद की परख कर लेने का एक मौका दें. अपने अंदर हर किसी को मालूम होता है कि क्या सही है और क्या गलत.

गुस्सा भी साइंटिफिक लॉजिक पर काम करता है. जैसे गुस्से के इनपुट पैरामीटर्स क्या हो सकते हैं? 
  • हम सिंगल हैं तो इनपुट - हमारे फैमिली मेम्बेर्स या फ्रेंड्स या उनसे जुड़ा कोई Issue.
  • हम डबल यानि शादीशुदा हैं तो इनपुटफैमिली मेम्बेर्स, लाइफ पार्टनर, बच्चे, फैमिली फ्रेंड्स या उनसे जुड़ा कोई Issue
  • बिजनेसमैन हैं तो इनपुट- रेपुटेशन या पैसे का नुकसान या एम्प्लाइज से जुड़ा कोई Issue
  • जॉब में है तो इनपुट- काम और सैलरी, साथी एम्प्लाइज के साथ तालमेल, काम करने के तरीकों में डिफरेंस या उनसे जुड़ा कोई Issue
  • बेरोजगार हैं तो इनपुट- Frustration और रिलेटेड Issues
  • ऊपर दिए गए इनपुट्स का कॉमन आउटपुट- हमारा गुस्सा
अब गलत कौन है, किस पॉइंट पर है, क्यों हैं और कितना है? ये आप आसानी से पता लगा सकते हैं. तो अब किस बात का गुस्सा. गुस्सा थूक दीजिये. 
संसार में सबकी हालत आपके जैसी ही है. फर्क सिर्फ़ इतना है कि किसी का गुस्सा दिख रहा है और किसी का दिख नहीं रहा है.
एक शानदार और सबसे सस्ता तरीका और है. ये है ख़ुद को बेवकूफ और बाकी सबको समझदार समझने का. इससे आपको कुछ मिले या न मिले, पर आप हँसने जरुर लगेंगे. करके देखिये. सामने वाले को ही समझदार हो जाने दीजिये. क्या पता आप और स्वस्थ हो जाएँ? वो भी बिना पैसे खर्च किये.

अगर फिर भी समाधान दिखाई न दे और गुस्सा आना न रुके तो किसी बढ़िया डॉक्टर से सलाह लें. बस डॉक्टर गुस्से वाला ना हो. कहीं गुस्से में हमें एडमिट ना कर ले. उसको बढ़िया डॉक्टर बनाने में हमारा ही सबसे बड़ा योगदान है. जितनी बड़ी भीड़, उतना ही बड़ा डॉक्टर.