Mar 27, 2018

डिप्रेशन, बेसब्री, ब्लड प्रेशर, शुगर आदि आदि...

मॉडर्न लाइफ स्टाइल और टेक्नोलॉजी ने हमें जहां एक छत के नीचे सारी सुख-सुविधाएं उपलब्ध करवाने में मदद की है वहीं तमाम् ऐशो-आराम की चीज़े हासिल होने के बाद भी बहुत कुछ या कहें सब कुछ पा सकने के मनुष्यों के सपने अधूरे दिखाई दे रहें हैं. 


अब तो हालत किसी कम्पटीशन से भी काफ़ी आगे निकल गए हैं. पहले हम खुद से फाइट करते थे कि अपना बेस्ट देकर आगे बढ़ना है. और अब फाइट है कि रुकना ही नहीं. रुक गए तो जैसे सबकुछ वापिस चला जायेगा या कोई और हमारी सीट पर कब्ज़ा जमा लेगा. 
इतना डर? 
देवताओं के देश में? 
किसी पर भरोसा करने का साहस ख़त्म? 
किसी को भरोसा देने की नीयत ख़त्म? 
सबकुछ शरीर पर टिका हुआ? और शरीर साइंटिफिक मिट्टी से अधिक कुछ नहीं. फ़िर भी इसकी इतनी फ़िक्र? 
बाकी सभी किनारे सूखे?

ऐसा लग रहा है जैसे हमें अमर होने का नुस्खा मिल गया हो. तभी सोच एकदम से कमर्शियल हो गयी होगी और इंसानियत किसी अँधेरे कमरे में जाकर सो गयी होगी. 

बड़ी दिलचस्प पिक्चर है आज की जिंदगी की. जिसके पास है, उसे सब्र नहीं (केटेगरी 1) और जिसके पास नही, उसे फ़िक्र नहीं (केटेगरी 2)
पहली केटेगरी के पास ज़रूरी सब साधन मौजूद. दूसरी केटेगरी के पास खाने के लाले.

लेकिन साइंटिफिक स्टडी बताने लगी है कि पहली केटेगरी अब एक गंभीर दौर का सामना कर रही है. वो है डिप्रेशन, बेसब्री, ब्लड प्रेशर, शुगर, लो-ऐज रेश्यो और छोटी-मोटी अन्य स्टैण्डर्ड बीमारियाँ. ऐसा क्यों? - क्योंकि हर हाल में बाकी बचे सपने पूरे करने का दबाव. स्टेटस मेन्टेन रखने का सामाजिक दबाव. और अनेकों अनकहे, अनसुलझे सवाल जो सही भी होंगे पर उनके सही आंसर तलाशने के समय का अभाव.

दूसरी केटेगरी फिलहाल आशावादी पाई जा रही है क्योंकि कुछ खोने को नहीं है उनके पास. उन्हें पता ही नही कि मंजिलें और सपने किस चिड़िया का नाम है. वो जिंदगी को वैसे ही जी पा रहें हैं जैसी मिली हुई है.

केटेगरी 1 को बहुत जल्दी हो गयी है सब कुछ पाने की. पेशेंस ख़त्म होने की लिमिट करीब है. केटेगरी 2 जीवन की ABC में ही मस्त है, फ़िर चाहे वो गरीब है. उन्हें ना हार्ट-अटैक का खतरा है और ना ही शुगर का. धूप में कड़ी मेहनत और शाम ढले चूल्हे पर सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी और प्याज उनको संसार की हर बीमारी से दूर रखे हुए है. और दूसरी तरफ़ सबकुछ AC लेकिन डॉक्टर अब हर दिन चेक-अप के लिए आने को तैयार.

ख़ुदा का कमाल का डायरेक्शन है. ख़ुशी, कामयाबी, सफलता, किसे माना जाये, ये एक खुबसूरत पहलू है? 

आप भी थोड़ा गौर फरमाइए. अपने नीचे वालों को देख के तनिक मुस्कुराइए. जब वो इतने इत्मीनान से जीते हैं तो आप किसलिए इतना गम पीते हैं?

गहरी चर्चा फ़िर कभी.