Mar 29, 2018

छोटा लड़का

कोई भी युग हो और कोई भी समय-काल हो. कोई कहे या न कहे, कोई समझे या न समझे, कोई जाने या न जाने लेकिन मनुष्य जीवन का एक सच ये भी है कि सामाजिक, आर्थिक विकास के बावजूद भी उसके मानवीय गुणों को हमेशा पहले स्थान पर रखा जाता है. 

वैसे तो आज के दौर की लाइफ ही इतनी व्यस्त है कि जीते जी लोग बिना काम और बिना मतलब के किसी को भी याद करने में शर्म महसूस करने लगे हैं. लेकिन एक ख़ास बात ये है कि किसी के मरने के बाद उसके मानवीय चरित्र और गुणों-अवगुणों को आज भी सबसे पहले लोग याद करते हैं. 

और बड़ी अच्छी बात ये है कि जीते जी आपको चाहे कोई पानी ना पूछ पाए (Due टू बिजी लाइफ) लेकिन आपके निकल जाने के बाद आपके कुछ गुणों की तारीफ़ हो ही जाती है. इसलिए घबराइए नहीं, जिंदा न सही, उसके बाद आपकी तारीफें होंगी तो भी क्या कम है? आप बस ये सुन नहीं पाएंगे. कोई बात नहीं. 

आइये लाइफ के एक प्रैक्टिकल आस्पेक्ट की कहानी सुने. यह कहानी इंसानियत, दयालुता और अपने पर किए एहसान को याद रखकर उसकी कीमत चुकाने के बारे में बताती है. क्या पता, किसके काम आ जाये? 

ये कहानी उस आदमी की कहानी है जिसका नाम जाने-अनजाने हम सब ने सुना हुआ है. ये आदमी है फ़्रांस के महान सम्राट नेपोलियन. नेपोलियन को हमेशा अपनी बहादुरी, ईमानदारी और दृढनिश्चय के लिए याद किया जाता है. आपको पता ही होगा की नेपोलियन अपने पड़ोसियों, सामान्य लोगों और अपने साथ काम करने वाले सेनिकों के साथ भी बड़ी सहजता और सरलता से पेश आता था. इसके पीछे नेपोलियन का कोई लालच या स्वार्थ नहीं होता था. वो अच्छे मानवीय गुण का धनी था और इसलिए शायद जनता का सबसे लोकप्रिय योद्धा.

बचपन में नेपोलियन ने बहुत गरीबी झेली थी. कई बार उसके पास खाने के लिए पैसे नहीं होते थे. जहां वो पढ़ता था, उस स्कूल के मेन गेट के पास ही एक औरत फल और खाने की चीजें बेचा करती थी. कभी-कभी जब ऐसा होता कि नेपोलियन की जेब में पैसे का कोई सिक्का नहीं होता था, ऐसे में भूखा होने पर वो मजबूरी में उस औरत से खाने की चीजें उधार ले लिया करता और पैसे होने पर ईमानदारी से उसको वापिस कर देता. वह औरत भी नेपोलियन पर विश्वास कर उसे उधार दे दिया करती. उन दिनों विश्वास और ईमानदारी के अच्छे दिन हुआ करते.

धीरे-धीरे समय बीता. भाग्य, योग्यता, कड़ी मेहनत और अपनी धुन के चलते नेपोलियन फ़्रांस की सेना में एक सामान्य सैनिक से एक अफसर, फिर सेनापति और अंत में फ़्रांस का सम्राट बना

सम्राट बनने के कुछ दिनों के बाद उसे अपने पुश्तैनी गांव जाने का मौका मिला. गांव पहुचते ही सबसे पहले उसने लोगों से उस औरत का पता पूछा जो बचपन में उस पर यकीन करके उसे फ़ल और खाने की चीज़े दिया करती. 

नेपोलियन फ़ौज की वर्दी में था और सीधे ही उस औरत के घर पर उससे मिलने जा पहुंचा. उसने पूछा “मैडम, क्या आप मुझे पहचानती हैं?” उसे देखकर वह बूढी औरत थोड़ी सहम गयी फिर उसने हैरानी से कहा “माफ़ कीजियेगा, मैं आपको नहीं जानती”.

नेपोलियन ने प्यार से मुस्कुराते हुए कहा “हो सकता है, आप मुझे भूल गयीं हों, पर वह छोटा लड़का आपको अभी तक नहीं भूला है, जिसे आप खुशी ख़ुशी और बड़े प्यार से चीज़े उधार दे दिया करतीं थी”. औरत ने नेपोलियन को पहचान लिया और और वो ख़ूब ख़ुश हुई कि नेपोलियन ने उसे याद रखा. 

उन दोनों ने खूब देर बातें की और नेपोलियन ने उस बूढी औरत को सिक्कों से भरी एक थेली उपहार में देते हुआ कहा- “आपने बचपन में जो यकीन मुझ पर दिखाया, शायद उसकी वजह से ही मैं जीवन में इतना आगे बढ़ सका हूं”. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. ये कहकर उसका आशीर्वाद लेकर वो लौट गया.


सारांश
अलग-अलग देशों में राजा या सम्राट तो कई हुए होंगे हम उनमें से कितनों के नाम लोग याद रखते हैं? फ्रांस में नेपोलियन को उसके इंसानियत के गुणों के लिए हमेशा याद किया जाता है. 
इसलिए दोस्तों, हमेशा उन लोगों को याद रखिये जो आप पर यकीन करते हैं. आप पर भरोसा करते हैं. आपकी मदद करते हैं. हमेशा उनका एहसान सही तरीके से चुकाने की कोशिश कीजिये. उनको धोखा देकर उनका विश्वास मत तोड़िए. ये ही इंसानियत को हर समय–काल में जिंदा रखने का अकेला प्रैक्टिकल उपाय है.

भरोसा देते रहिये. इंसानियत जिंदा रखिये. आपकी पहल. जीवन सरल. 

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