Mar 3, 2018

रहिमन धागा प्रेम का



जब आप स्कूल में पढ़ते थे तब छठी क्लास से रहीम के दोहे मास्टर जी पढाया करते थे. तब इन दोहों का मीनिंग सिर्फ़ Exam में पास होने तक सीमित रहा करता. धीरे-धीरे जब आप दुनियादारी की क्लास में आये तो रहीम के दोहे व्यवहारिक जीवन का अनमोल हिस्सा ज़रूर बने होंगे.

फ़िर समय तेज़ी से भागा और इस मॉडर्न जीवनशैली में हम रहीम जी की शिक्षाओं को आउटडेटिड समझ कर भूल गए. पर सच मानिये. उनके दोहे आज भी उतने ही अमर और वैल्युएबल हैं जितने पुराने समय में थे. ये आपको रिलैक्स करते हैं. असली जीवन से मिलवाने में मददगार हैं और जीवन को आसान बनाने वाले है.

आइये जानें क्या कहते हैं रहीम जी.


मीनिंग : बड़ी वस्तु को देख कर छोटी वस्तु को फेंक नहीं देना चाहिए. जहां छोटी सी सुई काम आती है, वहां तलवार बेचारी क्या कर सकती है?

बिगरी बात बने नहीं, लाख करो किन कोय.
रहिमन फाटे दूध को, मथे न माखन होय.
मीनिंग : मनुष्य को सोचसमझ कर व्यवहार करना चाहिए. क्योंकि किसी कारणवश यदि बात बिगड़ जाती है तो फिर उसे बनाना कठिन होता है. जैसे यदि एक बार दूध फट गया तो लाख कोशिश करने पर भी उसे मथ कर मक्खन नहीं निकाला जा सकेगा.

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय.
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय.
मीनिंग : प्रेम का नाता नाज़ुक होता है. इसे झटका देकर तोड़ना उचित नहीं होता. यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना कठिन होता है. और यदि मिल भी जाए तो टूटे हुए धागों के बीच में गाँठ पड़ जाती है.

ओछे को सतसंग रहिमन तजहु अंगार ज्यों.
तातो जारै अंग सीरै पै कारौ लगै.
मीनिंग : ख़राब लोगों का साथ छोड़ देना चाहिए क्योंकि उनसे हर स्तर पर, हमें नुकसान ही होता है. जैसे जब कोयला गर्म होता है तब तक शरीर को जलाता है और जब ठंडा हो जाता है, तो शरीर को काला करता है.

जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सकत कुसंग.
चन्दन विष व्यापे नहीं, लिपटे रहत भुजंग.
मीनिंग : रहीम कहते हैं कि जो अच्छे स्वभाव के मनुष्य होते हैं, उनको बुरी संगति भी बिगाड़ नहीं पाती. जहरीले सांप चन्दन के पेड़ से लिपटे रहने पर भी उस पेड़ पर कोई जहरीला प्रभाव नहीं डाल पाते.

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सौ बार.
रहिमन फिरि फिरि पोइए, टूटे मुक्ता हार.
मीनिंग : यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे, तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए, क्योंकि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पिरो लेना चाहिए.

दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय.
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे होय.
मीनिंग : संकट की घड़ी में हर कोई प्रभु को याद करता है पर खुशी में कोई नहीं. अगर आप खुशी में भी याद करते तो संकट आता ही नही.

दोनों रहिमन एक से, जों लों बोलत नाहिं.
जान परत हैं काक पिक, रितु बसंत के माहिं.
मीनिंग : कौवा और कोयल समान रूप से काले रंग के होते हैं. जब तक उनकी आवाज़ नहीं सुनाई देती तब तक उनकी पहचान नहीं होती है. लेकिन जब बसंत ऋतु आ जाती है, तो दोनों के बीच का अंतर कोयल की मीठी सुरीली आवाज से स्वयं ही प्रकट हो जाता है.

जो बड़ेन को लघु कहें, नहीं रहीम घटी जाहिं.
गिरधर मुरलीधर कहें, कछु दुःख मानत नाहिं.
मीनिंग : बड़े को छोटा कहने से बड़े की भव्यता कम नहीं होती, क्योंकि गिरधर को कन्हैया कहने से उनके गौरव में कमी नहीं होती.

वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग.
बांटन वारे को लगे, ज्यों मेंहदी को रंग.
मीनिंग ; धन्य हैं वो लोग जिनका जीवन सदा परोपकार के लिए बीतता है. जिस तरह फूल बेचने वाले के हाथों में खुशबू रह जाती है ठीक वैसे ही इन परोपकारियों का जीवन भी खुश्बू से महकता रहता है.

जैसी परे सो सहि रहे, कहि रहीम यह देह.
धरती ही पर परत है, सीत घाम औ मेह.
मीनिंग : जो भी परिस्थिति इस शरीर पर पड़ती है – सहन करनी चाहिए, क्योंकि इस धरती पर ही सर्दी, गर्मी और वर्षा पड़ती है. अर्थात जैसे धरती शीत, धूप और वर्षा सहन करती है, उसी प्रकार शरीर को सुख-दुःख सहन करना चाहिए.

रहिमन मनहि लगाईं कै, देख लेहूँ किन कोय.
नर को बस करिबो कहा, नारायण बस होय.
मीनिंग : यदि आप अपने मन को एक स्थान पर रखकर काम करेंगे तो आप अवश्य ही सफलता प्राप्त कर लेंगे. अगर मनुष्य एक मन से ईश्वर को चाहे तो वह ईश्वर को भी अपने वश में कर सकता है.

रहिमन चुप हो बैठिये, देखि दिनन के फेर.
जब नीके दिन आइहैं, बनत न लगिहैं देर.
मीनिंग : जब ख़राब समय चल रहा हो तो मौन रहना ही ठीक होता है, क्योंकि जब अच्छा समय आता हैं तब काम बनते देर नहीं लगती. इसलिए हमेशा अपने सही समय का सब्र करे.

समय पाय फल होत है, समय पाय झरी जात.
सदा रहे नहिं एक सी, का रहीम पछितात.
मीनिंग : कोई भी स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं रहती है. जब वसंत ऋतु आती है तो पेड़ पर फल लगते है और जब शरद ऋतु आती है तो सब गिर जाता है इसलिए विकट स्थिति में पछताना नहीं चाहिए.

रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय.
सुनी इठलैहैं लोग सब, बांटी न लेंहैं कोय.
मीनिंग : आपके मन की उदासी को अपने मन के भीतर ही छुपाये रखे, क्योंकि दूसरों की उदासी को सुनने के बाद लोग बातें भले ही कर लेते है लेकिन उस उदासी को बाँट कर कम करने वाले बहुत कम लोग ही होते हैं.

तरुवर फल नहीँ खात हैं, सरवर पियहि न पान.
कही रहीम पर काज हित, संपति संचही सुजान.
मीनिंग : पेड़ अपने फल-फूल स्वयं नहीं खाते हैं, और नदियाँ भी अपना जल स्वयं नहीं पीती हैं. उसी प्रकार सज्जन लोग वे हैं जो दूसरों की सेवा के लिए, दान के काम के लिए अपने धन दौलत को खर्च करते हैं.

रहिमन विपदा हू भली, जो थोरे दिन होय.
हित अनहित या जगत में, जान परत सब कोय.
मीनिंग : संघर्ष का समय आना बहुत जरूरी है क्योंकि इस समय के दौरान ही यह पता चलता है कि हमारे हित में कौन है और अहित में कौन है?

बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर.
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर.
मीनिंग : बड़ा होना इसका मतलब यह नहीं है कि किसी के लिए अच्छा है. जैसे खजूर के पेड़ की तरह, वो बहुत बड़ा है लेकिन इसके फल इतनी दूर है कि इसे तोड़ना मुश्किल है और ये मुसाफ़िर को छाँव देने के काम भी नहीं आता.


रहीम जी के दोहे मानों चाय में चीनी. जैसे चाय में चीनी कम मात्रा में ही डाली जाती है लेकिन उसकी मिठास बहुत होती है. ठीक उसी तरह रहीम जी के दोहे में शब्दों की मात्रा बहुत ही कम है, लेकिन दोहों का मीनिंग, उनकी महत्ता और बताया गया जीवन का अनुभव महान है.