Mar 21, 2018

आर्ट ऑफ़ लिविंग




Quote 1: प्रेम कोई भावना नहीं है. यह आपका खुद का अस्तित्व है.

Quote 2: मैं आपसे बताता हूँ आपके भीतर एक परमानंद का फव्वारा है. प्रसन्नता का झरना है. आपके मूल के भीतर सत्य, प्रकाश, प्रेम है. वहां कोई अपराध बोध नहीं है. वहां कोई डर नहीं है. मनोवैज्ञानिकों ने कभी इतनी गहराई में नहीं देखा.

Quote 3: श्रद्धा क्या है? यह समझने में है कि आप हमेशा वो पा ही जाते हैं जिसकी आपको ज़रुरत होती है.

Quote 4: आप खुद आज भगवान का दिया हुआ एक उपहार है इसीलिए इसे “प्रेजेंट” कहते हैं.

Quote 5: मानव विकास के दो चरण हैं. कुछ होने से कुछ ना होना. और कुछ ना होने से सबकुछ होना. यह ज्ञान दुनिया भर में योगदान और देखभाल ला सकता है.

Quote 6: जब आप अपना दुःख बांटते हैं वो कम नहीं होता. जब आप अपनी ख़ुशी बांटने से रह जाते हैं तो वो कम हो जाती है. अपनी समस्याओं को सिर्फ ईश्वर से सांझा करें और किसी से नहीं. अपनी ख़ुशी सबके साथ बांटें.

Quote 7: दूसरों को सुनो. फिर भी मत सुनो. अगर तुम्हारा दिमाग उनकी समस्याओं में उलझ जाएगा. ना सिर्फ वो दुखी होंगे. बल्कि तुम भी दुखी हो जाओगे.

Quote 8: जीवन ऐसा कुछ नहीं है जिसके प्रति बहुत गंभीर रहा जाए. जीवन तुम्हारे हाथों में खेलने के लिए एक गेंद है. गेंद को पकड़े मत रहो.

Quote 9: हमेशा आराम की चाहत में तुम आलसी हो जाते हो. हमेशा पूर्णता की चाहत में तुम क्रोधित हो जाते हो. हमेशा अमीर बनने की चाहत में तुम लालची हो जाते हो.

Quote 10: बुद्धिमान वो है जो औरों की गलती से सीखता है. थोड़ा कम बुद्धिमान वो है जो सिर्फ अपनी गलती से सीखता है. मूर्ख एक ही गलती बार बार दोहराते रहते हैं और उनसे कभी सीख नहीं लेते. अपने अंदर सीखने की चाहत रखे.

Quote 11: एक निर्धन व्यक्ति नया साल वर्ष में एक बार मनाता है. एक धनी व्यक्ति हर दिन. लेकिन जो सबसे समृद्ध होता है वह हर क्षण नव वर्ष मनाता है.

Quote 12: आप अपने कार्य के पीछे की मंशा को देखो. अक्सर तुम उस चीज के लिए नहीं जाते जो तुम्हे सच में चाहिए.

Quote 13: यदि तुम लोगों का भला करते हो तो तुम ये अपनी प्रकृति की वजह से करते हो.

Quote 14: मैं स्वर्ग से कितना दूर? आप अपनी आँखें खोलो और देखो तुम स्वर्ग में हो.

Quote 15: तुम दिव्य हो. तुम मेरा हिस्सा हो. मैं तुम्हारा हिस्सा हूँ.

Quote 16: भगवान के यहाँ से तुम्हे सर्वोच्च आशीर्वाद दिया गया है. इस गृह पृथ्वी का सबसे अनमोल ज्ञान दिया गया है. तुम दिव्य हो. तुम परमात्मा का हिस्सा हो. विश्वास के साथ बढ़ो. यह अहंकार नहीं है. यह पुन: प्रेम है.

Quote 17: तुम्हारा मस्तिष्क भागने की सोच रहा है और उस स्तर पर जाने का प्रयास नहीं कर रहा है. जहाँ भगवान ले जाना चाहते हैं. वो तुम्हे उठाना चाहते हैं.

Quote 18: चाहत या इच्छा तब पैदा होती है जब आप खुश नहीं होते. क्या आपने देखा है? जब आप बहुत खुश होते हैं तब संतोष होता है. संतोष का अर्थ है कोई इच्छा ना होना.

Quote 19: इच्छा हमेशा ‘मैं’ पर लटकती रहती है. जब स्वयं “ मैं ” लुप्त हो रहा हो इच्छा भी समाप्त हो जाती है. गायब हो जाती है.

Quote 20: हर एक चीज के पीछे तुम्हारा अहंकार है. मैं, मैं, मैं, मैं. लेकिन सेवा में कोई "मैं" नहीं है. क्योंकि यह किसी और के लिए करनी होती है.