Mar 20, 2018

असली कमाई



एक बेटे के अनेक मित्र थे, जिसका उसे बहुत घमंड था.
उसके पिता का एक ही मित्र था, लेकिन था सच्चा.
एक दिन पिता ने बेटे को बोला कि तुम्हारे बहुत सारे दोस्त है, उनमें से आज रात तेरे सबसे अच्छे दोस्त की परीक्षा लेते हैं.
बेटा तुरंत तैयार हो गया. देर रात को दोनों, बेटे के सबसे घनिष्ठ मित्र के घर पहुंचे.
बेटे ने दरवाजा खटखटाया पर दरवाजा नहीं खुला.
बार-बार दरवाजा ठोकने के बाद दोनो ने सुना कि अंदर से बेटे का दोस्त अपनी माताजी को कह रहा था कि माँ कह दे, “मैं घर पर नहीं हूं.”
यह सुनकर बेटा उदास हो गया, अतः निराश होकर दोनों घर लौट आए.
फिर पिता ने कहा कि बेटे, आज मैं तुझे मेरे दोस्त से मिलवाता हूं.
फ़िर दोनों टहलते हुए पिता के दोस्त के घर पहुंचे. पिता ने अपने दोस्त को आवाज लगाई. उधर से जवाब आया कि “ठहरना मित्र, दो मिनट में दरवाजा खोलता हूं.”
जब दरवाजा खुला तो पिता के दोस्त के एक हाथ में रुपये की थैली और दूसरे हाथ में तलवार थी.
पिता ने पूछा, यह क्या है दोस्त?
तब मित्र बोला....अगर मेरे दोस्त ने इतनी देर रात को मेरा दरवाजा खटखटाया है, तो जरूर वह मुसीबत में होगा और अक्सर मुसीबत दो प्रकार की होती है: “या तो रुपये पैसे की या किसी से विवाद हो गया हो”. अगर तुम्हें रुपये की आवश्यकता हो तो ये रुपये की थैली ले जाओ और किसी से झगड़ा हो गया हो तो ये तलवार लेकर मैं तुम्हारें साथ चलता हूं.
तब पिता की आँखे भर आई और उन्होंने अपने दोस्त से कहा कि, मित्र मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं, मैं तो बस मेरे बेटे को मित्रता और दोस्ती की परिभाषा समझा रहा था ताकि ये समझ पाए की असली दोस्ती क्या होती है?

सारांश
ऐसे दोस्त हरगिज ना चुने जो खुदगर्ज हो और आपके काम पड़ने पर बहाने बनाने लगें. दोस्त कम चुनें, लेकिन नेक चुनें. ये ही जीवन की असली कमाई है.