Mar 26, 2018

बच्चे की मां ख़ुशी से रो पड़ी.

एक आइसक्रीम वाला रोज एक मोहल्ले में आइसक्रीम बेचने जाया करता था.


उस कालोनी में पैसे वाले लोग रहा करते थे. लेकिन किराये पर रहने वाला एक परिवार ऐसा भी था जो आर्थिक तंगी से गुजर रहा था. उनका एक 5 साल का बेटा था जो हर दिन खिड़की से उस आइसक्रीम वाले को ललचाई नजरो से देखा करता था.

आइसक्रीम वाला भी उसे पहचानने लगा था. लेकिन कभी वो लड़का आइसक्रीम खाने घर से बाहर नहीं आया. एक दिन उस आइसक्रीम वाले का मन नहीं माना तो वो खिड़की के पास जाकर उस बच्चे से बोला, "बेटा क्या आपको आइसक्रीम अच्छी नहीं लगती. आप कभी मेरी आइसक्रीम नहीं खरीदते?". उस बच्चे ने बड़ी मासूमियत के साथ कहा, "मुझे आइसक्रीम बहुत पसंद है. पर मां के पास पैसे नहीं है. "उस आइसक्रीम वाले को यह सुनकर उस बच्चे पर बड़ा प्यार आया. उसने कहा, "बेटा तुम मुझसे रोज आइसक्रीम ले लिया करो. मुझे तुमसे पैसे नहीं चाहिए".

बच्चा बहुत समझदार था. बहुत सहज भाव से बोला, "नहीं ले सकता, मां ने कहा है कि किसी से मुफ्त में कुछ लेना गंदी बात होती है. इसलिए मैं कुछ बिना दिए आपकी आइसक्रीम नहीं ले सकता". आइसक्रीम वाला बच्चे के मुहं से इतनी गहरी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गया.

उसने कहा, "तुम मुझे आइसक्रीम के बदले में रोज एक प्यारी सी मुस्कराहट (स्माइल) दे दिया करो”. इस तरह मुझे आइसक्रीम की कीमत मिल जाया करेगी". बच्चा ये जानकर बहुत खुश हुआ. दौड़कर घर से बाहर आया. आइसक्रीम वाले ने उसे एक आइसक्रीम दी और बदले में उस बच्चे ने उस आइसक्रीम वाले को  स्माइल दी और खुश होकर घर के अन्दर भाग गया. अब ये सिलसिला रोज चल निकला. वो आइसक्रीम वाला आता और एक स्माइल के बदले उस बच्चे को आइसक्रीम दे जाता. करीब 20 दिनों तक ऐसा ही चलता रहा.

उसके बाद, बच्चे ने अचानक बाहर आना बंद कर दिया. अब वो खिड़की पर भी नजर नहीं आता था.
जब कुछ दिन और बीत गए तो आइसक्रीम वाले का मन नहीं माना और वो उस घर पर पहुच गया.
दरवाजा पर बच्चे की मां थी. आइसक्रीम वाले ने उत्सुकता से उस बच्चे के बारे में पूछा तो उसकी मां ने कहा, "देखिये भाई साहब, हम गरीब लोग हैं. हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि हम अपने बच्चे को रोज आइसक्रीम खिला सके”. आप उसे रोज मुफ्त में आइसक्रीम खिलाते रहे. जिस दिन मुझे ये बात पता चली तो मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई. आप एक अच्छे इंसान हो सकते हैं पर इस कलयुग में किसी अजनबी पर भरोसा करना और अपने बेटे को मुफ्त में आइसक्रीम खिलाने का कोई मतलब नहीं बनता.

बच्चे की मां की बाते सुनकर उस आइसक्रीम वाले ने कहा, "बहनजी , कौन कहता है कि मैं  उसे मुफ्त में आइसक्रीम खिलाता था. मैं इतना दयालु या उपकार करने वाला नहीं हूं. व्यापार करता हूं. आपके बेटे से जो मुझे मिला, वो उस आइसक्रीम की कीमत से कही अधिक मूल्यवान था. और कम मूल्य की चीज़ का अधिक मूल्य वसूल करना ही व्यापार का नियम है. एक बच्चे का निश्छल प्रेम पा लेना, सोने और चांदी के सिक्के पा लेने से कहीं अधिक बढ़कर है.

आपने अपने बेटे को बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं. लेकिन छोटा और गरीब होते हुए भी मैं  आपसे पूछता हूं कि “क्या प्रेम का कोई मूल्य नहीं होता”?. उस आइसक्रीम वाले के शब्द सुनकर मां की आँखें भर आई. उन्होंने बच्चे को आवाज़ दी. वो दौड़ता-दौड़ता दरवाजे पर आ गया. मां का इशारा पाते ही बालक दौड़कर आइसक्रीम वाले से लिपट गया.

आइसक्रीम वाले ने बालक को गोद में उठा लिया और बाहर जाते हुए कहने लगा, "तुम्हारे लिए आज दूध-मलाई वाली आइसक्रीम लाया हूं. तुम्हें बहुत पसंद है ना?" बच्चा उत्साह से बोला, "हां बहुत". बच्चे की मां ख़ुशी से रो पड़ी.