Mar 14, 2018

स्टीफन हॉकिंग


जन्म: जनवरी 8, 1942.
मृत्यु: मार्च 14, 2018.

आधुनिक विज्ञान की दुनिया में अपने ज्ञान और शोध के कारण हॉकिंग दुनिया में एक अलग पहचान रखते थे. वह एक महान वैज्ञानिक और अद्भुत व्यक्ति थे जिनके कार्य और विरासत आने वाले लंबे समय तक जीवित रहेंगे. उनकी बुद्धिमतता और हास्य के साथ उनके साहस और दृढ़-प्रतिज्ञा ने पूरी दुनिया में लोगों को प्रेरित किया है.

हॉकिंग अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद आज विश्व के सबसे बड़े वैज्ञानिक थे. उन्हें मोटर न्यूरॉन नाम की बीमारी थी. इस बीमारी में मनुष्य का नर्वस सिस्टम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और शरीर के मूवमेंट करने और कम्यूनिकेशन पावर समाप्त हो जाती है. स्टीफन हॉकिंग के दिमाग को छोड़कर उनके शरीर का कोई भी भाग काम नहीं करता था.

स्टीफन हॉकिंग ने एक बार बताया भी था कि उनकी बीमारी ने उन्हें वैज्ञानिक बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अदा की थी. बीमारी से पहले वे अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन बीमारी के दौरान उन्हें लगने लगा कि वे अब जिंदा नहीं रहेंगे जिसके बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान रिसर्च पर लगा दिया. हॉकिंग ने ब्लैक हॉल्स पर रिसर्च किया है. स्टीफन हॉकिंग ने बिग बैंग सिद्धांत को समझने में भी अहम योगदान दिया था.

1974 में ब्लैक हॉल्स पर असाधारण रिसर्च करके उसकी थ्योरी मोड़ देने के कारण वे साइंस की दुनिया के सेलेब्रेटी बन गए थे.  हॉकिंग ने अपने रिसर्च के माध्यम से यह कहा था कि “ईश्वर ने यह दुनिया नहीं रची है बल्कि यह तो भौतिक विज्ञान के नियमों का नतीजा है”. अपनी किताब 'ग्रांड डिजाइन' में कहा था कि गुरुत्वाकर्षण जैसे कई नियम हैं और ब्राह्मांड कुछ नहीं से भी खुद को बना सकता है.

स्टीफन हॉकिंग ने ये अनुमान भी लगाया था कि ग्लोबल वार्मिंग और नए वायरसों के कारण संपूर्ण मानवता नष्ट हो सकती है. स्टीफन हॉकिंग की पीएचडी थीसिस को अब तक लाखों बार रेफ़र किया गया है.

हॉकिंग, एल्बर्ट आइंस्टिन के बाद दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिकीविद बने. दुनिया के सबसे प्रसिद्ध इस भौतिकीविद और ब्रह्मांड साइंटिस्ट पर 2014 में 'थ्योरी ऑफ एवरीथिंग' नामक फिल्म भी बन चुकी है.

हॉकिंग के पास 12 मानद डिग्रियां हैं. हॉकिंग के कार्य को देखते हुए अमेरिका का सबसे उच्च नागरिक सम्मान उन्हें दिया जा चुका है. ब्रह्मांड के रहस्यों पर उनकी किताब 'अ ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम' काफी चर्चित हुई थी.

जन्म और मृत्यु क्यों होती है?
और मृत्यु के बाद हमारी प्लेसमेंट कहां होती है? 
ये आने वाली पीढ़ियों के साइंटिस्ट्स ज़रूर खोज पाएंगे. लेकिन ये खेल नेचर को जाने बिना शायद ही खेला जा सके. फ़िर सभी इंडिया को समझने की कोशिश कर सकेंगे. क्या पता ब्रह्माण्ड से आगे भी कोई और हो?
फ़िलहाल स्टीफन हॉकिंग को और उनके ज़ज्बे और खोजों को नमन.