Mar 23, 2018

पूछो, “क्या मैं किसी का सच्चा दोस्त हूँ?” ये ही सही प्रश्न है.



विश्व भर में उनके फोलोवेर्स हैं जो स्ट्रेस, नो थॉट मैनेजमेंट और मैडिटेशन के उनके बताये रास्तों से गुजरते हैं और इजी लाइफ महसूस करते हैं. हां, ये जरुर माना जाता रहा है कि उनके खुले विचारों की वजह से जहाँ उन्हें लाखों की संख्या में शिष्य मिलते रहते हैं, वहीँ उनकी आलोचना भी समानांतर रूप से होती रहती है. ये हैं रजनीश यानि ओशो. 

हमें उनके बताये कुछ कोट्स पढने का मौका मिला. पढ़ कर लगा कि इसमें तो जीवन के बारे में ही वो सब लिखा है जो व्यवहारिक आदमी के जीवन की परिस्थितियों और संभावनाओं को सामने ला रहा है. आप भी देखिये. क्या ग़लत और क्या सही. ये तो आप ही बेहतर बता सकते हैं?

उनके दिए कुछ कथन
अगर आप सच देखना चाहते हैं तो ना सहमति और ना असहमति में राय रखिये.

कोई चुनाव मत करिए. जीवन को ऐसे अपनाइए जैसे वो अपनी समग्रता में है.

जब प्यार और नफरत दोनों ही ना हो तो हर चीज साफ़ और स्पष्ट हो जाती है.

किसी से किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा की आवश्यकता नहीं है. आप स्वयं में जैसे हैं एकदम सही हैं. खुद को स्वीकारिये.


जिस दिन आप ने सोच लिया कि आपने ज्ञान पा लिया है, आपकी मृत्यु हो जाती है. क्योंकि अब ना कोई आश्चर्य होगा, ना कोई आनंद और ना कोई अचरज. अब आप एक मृत जीवन जियेंगे.

अर्थ मनुष्य द्वारा बनाये गए हैं. और चूँकि आप लगातार अर्थ जानने में लगे रहते हैं, इसलिए आप अर्थहीन महसूस करने लगते हैं.

आप वो बन जाते हैं जो आप सोचते हैं कि आप हैं.

प्रसन्नता सद्भाव की छाया है. वो सद्भाव का पीछा करती है. प्रसन्न रहने का कोई और तरीका नहीं है.

जीवन कोई त्रासदी नहीं है. ये एक हास्य है. जीवित रहने का मतलब है हास्य का बोध होना.

अधिक से अधिक भोले, कम ज्ञानी और बच्चों की तरह बनिए. जीवन को मजे के रूप में लीजिये – क्योंकि वास्तविकता में यही जीवन है.

सम्बन्ध उनकी ज़रुरत हैं जो अकेले नहीं रह सकते.
कभी ये मत पूछो, ” मेरा सच्चा दोस्त कौन है?” पूछो, “क्या मैं किसी का सच्चा दोस्त हूँ?” ये ही सही प्रश्न है.

ये मायने नहीं रखता है कि आप 'गुलाब' हैं या 'कमल' हैं या के 'मैरीगोल्ड' हैं. मायने ये रखता है कि आप मुस्कुरा रहे हैं.

खुद को खोजिये, नहीं तो आपको दूसरे लोगों की राय पर निर्भर रहना पड़ेगा, जो अभी तक खुद को ही नहीं जानते.

अपनी यूनीकनेस का सम्मान करें, और तुलना करना छोडें. आप जो हैं, उसमे रिलैक्स रहें.

प्रेम तब खुश होता है, जब वो कुछ दे पाता है. अहंकार तब खुश होता है, जब वो कुछ ले पाता है.

एक गंभीर व्यक्ति कभी मासूम नहीं हो सकता. और जो मासूम है, वो कभी गंभीर नहीं हो सकता.

जैसे-जैसे आप अधिक जागरुक होते जाते हैं. इच्छाएं गायब होती जाती हैं. जब जागरूकता 100% हो जाती है, तब कोई इच्छा नहीं रह जाती. ये ही ध्यान है.

खुद को वैसे स्वीकार करें जैसे आप हैं. और ये दुनिया का सबसे कठिन काम है.

शेयर करना सबसे मूल्यवान स्पिरिचुअल अनुभव है. शेयर करना अच्छा है.

ये इम्पेर्फेक्ट है, और इसीलिए ये ग्रो कर रहा है. अगर ये परफेक्ट होता तो ये मर चुका होता. ग्रोथ तभी संभव है जब इम्पेर्फेक्शन हो.

अगर आप बिना प्रेम के काम करते हैं तो आप एक गुलाम की तरह काम कर रहे हैं. जब आप प्रेम के साथ काम करते हैं, तब आप एक राजा की तरह काम करते हैं. आपका काम आपकी ख़ुशी है. आपका काम आपका डांस है.