Apr 7, 2018

और कार, ऑटो रिक्शा से टकराते-टकराते बची....

एक व्यक्ति ऑटो रिक्शा से रेलवे स्टेशन जा रहा था. ऑटो वाला बड़े आराम से ऑटो चला रहा था. एक कार अचानक ही नजदीकी पार्किंग से निकलकर सड़क पर आ गई. ऑटो ड्राइवर ने तेजी से ब्रेक लगाया और कार, ऑटो रिक्शा से टकराते-टकराते बची. कार चला रहा आदमी गुस्से में ऑटो वाले को ही भला-बुरा कहने लगा जबकि गलती उसकी थी.


ऑटो चालक एक सत्संगी स्वभाव वाला यानि पॉजिटिव विचार सुनने-सुनाने वाला था. उसने कार वाले की बातों पर गुस्सा नहीं किया और ख़ुद ही उससे माफ़ी मांगते हुए आगे बढ़ गया.

ऑटो में बैठे व्यक्ति को कार वाले की हरकत पर गुस्सा आ रहा था और उसने ऑटो वाले से पूछा “तुमने उस कार वाले को बिना कुछ कहे ऐसे ही क्यों जाने दिया?” उसने तुम्हें कितना भला-बुरा कहा जबकि गलती तो उसकी ही थी. हमारी किस्मत अच्छी है, नहीं तो उसकी वजह से अभी हम किसी अस्पताल में होते.

ऑटो वाले ने बड़ी शांति से जवाब दिया “साहब बहुत से लोग Garbage ट्रक (कूड़े का ट्रक) की तरह होते हैं. वे बहुत सारा कूड़ा अपने दिमाग में भरे हुए घूमते हैं, चलते हैं, जागते हैं और सोते हैं. जिन चीजों की जीवन में कोई ज़रूरत नहीं होती, उनको मेहनत करके जोड़ते रहते हैं जैसे गुस्सा, नफ़रत, जलन, चिंता, निराशा और हमेशा दूसरों की गलतियां निकालना. अब जब उनके दिमाग में ये कूड़ा बहुत अधिक हो जाता है तो वे अपना बोझ हल्का करने के लिए इसे दूसरों पर फेंकने का मौका ढूँढ़ने लगते हैं.

इसलिए मैं ऐसे लोगों से दूरी बनाए रखता हूं. और उन्हें दूर से ही मुस्कराकर उन्हें अलविदा कह देता हूं. क्योंकि अगर उन जैसे लोगों द्वारा गिराया हुआ कूड़ा मैंने स्वीकार कर लिया तो मैं भी कूड़े का ट्रक बन कर रह जाऊंगा. और अपने साथ-साथ आसपास के लोगों पर भी वह कूड़ा गिराता फिरूंगा. और इससे किसी का कोई भला तो होने वाला नहीं.

साहब, मैं तो सोचता हूँ जिंदगी बहुत ख़ूबसूरत है. इसलिए जो हमसे अच्छा व्यवहार करते हैं, उन्हें थैंक यू कहो और जो हमसे अच्छा व्यवहार नहीं करते उन्हें मुस्कुराकर माफ़ कर दो. हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि सभी मानसिक रोगी केवल हॉस्पिटल्स में ही नहीं रहते हैं. कुछ हमारे आसपास खुले में भी घूमते रहते हैं. और आप उन्हें देख कर हैरान हो जाते हैं. अगर वो दूसरों की बजाय थोड़ा समय ख़ुद को पहचानने में लगा दें तो 70% बीमार लोग एकदम स्वस्थ हो जायेंगे क्योंकि वो मन से बीमार हैं, तन से नहीं.

प्रकृति का नियम:
जिसके पास जो होता है वह वही बाटता है. हंसने वाला हंसी बाटता हैं. रोने वाला रोना बाटता है. डरने वाला डर बाटता है. बड़ा आदमी बड़प्पन और छोटा आदमी छोटापन. सुखी आदमी सुख और दुखी आदमी दुख बाटता है. कन्फ्यूज्ड आदमी कन्फ्यूजन बाटता है. विज़न वाला विज़न बाटता है. कामयाब आदमी कामयाबी और फेल आदमी निराशा बाटता है. वफ़ादार वफ़ा और धोखेबाज धोखा बाटता है. ज्ञानी ज्ञान और अज्ञानी अज्ञान बाटता है. चमका हुआ आपको चमका देता है. बुझा हुआ आपको बुझा देता है. लालची आदमी लालच और दयालु प्रेम बाटता है. सारा खेल होने और बांटने का है.
ये समझ आ जाये तो हर पल सतयुग. और इससे सिंपल कोई और चीज़ कहां?

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