May 12, 2018

लेवल जीरो



वह बेहद मायूस, बेहद उदास था. 
आखिर जिसे उसने अपनी जिंदगी का लक्ष्य माना था, तमाम कोशिशों के बावजूद भी वो वहां नहीं पहुंच सका. निराश हो कर वो बार-बार कहता-मैं थक गया हूं. फेल हो चुका हूं. अपने लक्ष्य को पाने में नाकामयाब कोई भी आदमी शायद इसी तरह से पेश आता है. उसे लगता है कि उसका सब कुछ जैसे लुट गया है. लेकिन क्या ये हमेशा ही सच होता है? 

वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञानी जोनाथन हैत की रिसर्च बताती है कि बुरा समय, फेलियर और कभी कभी लेवल जीरो पर आ जाना जिंदगी में खुशहाल और सफ़ल होने के लिए बहुत जरूरी है.

ऐसा क्यों? वास्तव में जब हम फेल या नाकामयाब हो जाते हैं तो हम संसार की मूवमेंट को छोड़ कर अपनी मूवमेंट की तरफ़ चलना शुरू करते है. अपने भीतर गहरे उतरना सीखना शुरू करते हैं. बाहर-बाहर से दुनिया को देखना बंद होने लगता है. हम रीयलिस्टिक फेज पर क्लिक करना शुरू कर जाते हैं. देखना तो हम बाहर ही चाहते हैं लेकिन उस बाहर की दुनिया में मिले झटकों से हम बाहर से अपने भीतर जाने को मजबूर हो जाते हैं. और जैसे ही ऐसा होता है, हम ख़ुद से मिलना शुरू करते हैं. ख़ुद को पाना, ख़ुद को पहचानना स्टार्ट कर पाते हैं. अपने आप की असलियत, ओरिजिनालिटी को जानने के रास्ते पर चलना शुरू हो जाता है.

फ़िर क्या होता है?
जब हम भीतर यानि सेल्फ़ की ओर मूव करते हैं, तो क्या पा सकते हैं? अपने फेलियर पर सोच-विचार करते हुए हम अपनी कमियों को पहचानना शुरू करने लगते हैं. इन कमियों को हम कामयाबी की आंधी में शायद ही कभी देख पाते. फिर उन कमियों, अपनी गलतियों, अपने गुणों को सही रास्तों पर ले जाने का काम शुरू होने लगता है. और हम अचानक हैरान होते हैं कि अब लाइफ में चीज़ें ठीक होने लगी है. और ठीक यहीं से जिंदगी बदलने लगती है. हम अब ये देख पा रहें हैं कि ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. औरों की अपेक्षा हमारे फेलियर बहुत छोटे और टेम्पररी हैं. और फ़िर जब हम सही तरीकों से ख़ुद को और आस-पास को, इस दुनिया को देखना शुरू करते हैं तो हमें दुनिया, इस दुनिया के लोग बेहद अच्छे लगने लगते हैं. और वो झटके जो हमें लगे थे, वो झटके नहीं बल्कि हमारे असली सलाहकार थे. 

अब हम जीतने लगते हैं ख़ुद को. मुस्कुराना सीख गए हैं हर एंगल से, हर मोमेंट पर. बिना ये परवाह किये कि सक्सेस क्या है और फेलियर क्या. बस जिंदगी इसी का नाम है. तो याद रखिये. फेलियर कोई निगेटिव चीज नहीं है. हार जाना किसी भी जिंदगी का अंत नहीं है. और वैसे भी बिना फेल हुए पास होने का मजा ही क्या है? फेल होना जिंदगी के लिए बेहद जरूरी है. इसके बिना हम असल में कामयाब हो ही नहीं सकते. जब हम अपनी हार से सबक लेना शुरू करेंगे, कामयाबी झक मार के हमारे पास आएगी. और कामयाबी क्या है? - हमारी ख़ुशी, दूसरों को बिना तंग करे.

सार: जिंदगी के सफर में हम सभी जीतना चाहते है. कोशिश ये करिए कि हम जिंदगी जीना सीखें और सफ़र के आनंद को ही सफलता मान लें. सक्सेस बस फेलियर के डर से ख़ुद को आज़ाद कर लेना है, इससे ज्यादा कुछ नहीं. संसार में आना-जाना तो लगा ही रहेगा. और हम हमेशा के लिए इस दुनिया में नहीं रहेंगे. सबके साथ ये ही सर्किल है. मस्त होकर चक्कर लगाते रहिये. बाय-बाय बोलने से पहले लव यू जिंदगी.


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