May 9, 2018

क्या अब आप ताली बजा सकते हो?

एक बार की बात है. एक गांव में एक औरत घर का सामान लेने एक दूकान पर गयी. दुकान का मालिक उस समय एक बुजुर्ग की बातें सुनने में व्यस्त था. औरत को भी उस बुजुर्ग की बातें अच्छी लगी और उनसे प्रभावित होकर उसने उन्हें अपने घर खाने का निमंत्रण दिया. 

बुजुर्ग निमंत्रण स्वीकार कर उस औरत के घर भोजन के लिए चल पड़े. रास्ते में जब लोगों ने उस औरत के साथ बुजुर्ग को देखा तो अचानक एक आदमी भीड़ को चीरता हुआ उनके पास आया और बोला कि आप इस औरत के साथ कैसे

बुजुर्ग ने बताया कि वह इस औरत के निमंत्रण पर उसके घर भोजन के लिए जा रहे हैं. यह जानने के बाद उस व्यक्ति ने कहा कि आप इस औरत के घर मत जाइये. आप की बहुत बदनामी होगी, क्योंकि यह औरत चरित्रहीन है. लेकिन बुजुर्ग नहीं रुके और उस औरत के साथ चलते रहे. कुछ ही देर में यह बात पूरे गांव में जंगल में आग की तरह फैल गई. 

आनन फानन में गांव का मुखिया दौड़ता हुआ आ गया और बुजुर्ग से उस औरत के घर न जाने की प्रार्थना की. विवाद बढ़ता बुजुर्ग ने सबको शांत रहने को कहा. फिर मुस्कराते हुए मुखिया का एक हाथ अपने हाथ में कस कर पकड़ लिया और बोले - मुखिया जी, क्या अब आप ताली बजा सकते हो? मुखिया बोला - एक हाथ से भला कोई ताली कैसे बजा सकता है?  
इस पर बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले - जैसे एक हाथ से ताली नहीं बज सकती तो एक अकेली औरत चरित्रहीन कैसे हो सकती है, जब तक कि एक पुरुष उसे चरित्रहीन बनने पर बाध्य न करे?

सभी लोग अपना छोटा सा मुहं ले कर वहां से निकल गए. औरत की आंखों में पानी भर आया. घर पहुँच कर उसने बड़े प्रेम से उन्हें खाना खिलाया और विदा किया.

सार: दूसरों का जज बनने से पहले एक बार ख़ुद को भी परख कर देख लेना चाहिए. 

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