Jul 24, 2018

टेंशन की नो पेंशन पार्ट 1


हम में से हर एक को हर दिन अलग अलग तरीके से किसी ना किसी टेंशन से जंग लड़नी ही पड़ती है. जहां कर्म और जिम्मेदारियों का दबाव होगा, वहां चाहे-अनचाहे कोई ना कोई टेंशन तो रहनी नेचुरल है.

किसी के जीवन में कोई टेंशन हो ही नहीं, ये तो मरने के बाद ही संभव है.

हां, ये बात अलग है कि अगर हम थोड़ा इस पर सही तरीके से फोकस कर पाएं तो जीवन को हल्का और खुबसूरत ज़रूर बना सकेंगे. हमें शानदार मानव जीवन गिफ्ट मिलता है तो डेली की टेंशन भी मिलती ही हैं. हम गरीब हो, रिक्शा-चलाते हो, मजदूरी करतें हो या मिडिल-क्लास हो, नौकरी करने वाले हों या हमारे कई बिज़नस चल रहें हो- ध्यान से देखने पर हम पाएंगे कि सभी केटेगरी के लोग किसी-न-किसी टेंशन में डूबे ही रहते हैं. सबकी टेंशन अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन टेंशन है जरुर.

टेंशन का रीज़न नंबर 1
जैसे ही हम ख़ुद को भविष्य में रखना शुरू करते हैं, टेंशन पलक झपकते ही हमारे गले से लिपटना शुरू कर देती है. ये टेंशन से एक लव-अफेयर कर लेने जैसा है. धीरे-धीरे हम इसके गुलाम बन जाते हैं.  

टेंशन का रीज़न नंबर 2
किसी से तुलना करना टेंशन का दूसरा सबसे बड़ा कारण होता है. हम एक समाज में रहते हैं तो तुलना से बचना मुश्किल है. बस यहीं से टेंशन दीमक की तरह हमारे दिमाग में अपना घर बनाना स्टार्ट करती है और हम प्राण त्यागने से पहले तक इस दीमक से परेशान झुझते दिखाई देते हैं.

टेंशन का रीज़न नंबर 3
हम रीज़न 1 और रीज़न 2 के साथ जीने के इतने आदि हो जाते हैं कि एक्सेप्ट करने लगते हैं कि अब तो ऐसा ही चलेगा. कोई भी सिचुएशन आ जाए, हमारा पेशेंस हर परिस्थिति में लूज़ होने लगता है और हम कई बार इतने नेगेटिव हो जाते हैं कि जीवन की हर घटना ही टेंशन लगने लगती है. ये हमारे अंदर घर कर चुकी आदत का रिजल्ट होता है ना कि सच्चाई.

तो अब क्या करें?
थोड़ा रुकिए. दुनिया को भागते देख आप भी उसकी चाल से भागने के चक्कर में हैं कि कहीं आप पीछे ना रह जायें. ऐसा कुछ नहीं होता. दुनिया आपके आने से पहले भी ऐसी ही थी. आपके जाने के बाद भी ऐसे ही चलेगी.
·       भविष्य की प्लानिंग करना इज ओके बट उसके लिए टेंशन लेना इज नॉट ओके.
·     विनर बनने के लिए, प्रेरणा लेने के लिए किसी से तुलना करना इज ओके बट किसी से तुलना करके उससे जलते-भूनते जिंदगी काटना इज़ नॉट ओके.
·       किसी काम को टाइम पर ख़त्म करने का उत्साह दिखाना इज ओके बट हर वक़्त जल्दीबाज़ी दिखाना या हमेशा लेटलतीफी करना इज़ नॉट ओके.

अब आप समझ गए होंगे की अक्सर हम एक्चुअल मिस्टेक कहाँ और क्यों कर रहें हैं? रीज़न क्लियर मतलब प्रॉब्लम साल्व्ड.  

उदाहरण 1: एक दिन आप सवेरे थोड़ा देर से उठे. काम पर समय पर पहुंचने की जल्दी. हड़बड़ी में नाश्ता किया. आपकी शर्ट पर चाय गिरी. जल्दी-जल्दी शेव की. ब्लेड लग गया. चलो किसी तरीके से ऑफिस आ गए. पर ये क्या? आपका  मोबाइल या पर्स शायद घर पर ही रह गया. अब आपको भयंकर टेंशन है और गुस्सा आ रहा है. आप सही हैं......फ़िर इस टेंशन के लिए ज़िम्मेदार कौन? और ये टेंशन क्या ख़त्म की जा सकती है?

उदाहरण 2: आप भीड़ वाले ट्रेफिक में फंसे हुए हैं और आपका पारा धीरे-धीरे चढ़ता जा रहा है. कोई आपसे आगे गाड़ी निकालने की कोशिश करता है और आप उबल पड़ते हैं, आप हार्न बजाते हैं, कोसते हैं, झुंझलाते हैं. इस तरह आप बड़े बुरे मूड में ऑफिस या अपने बिज़नस प्लेस पर पहुँचते हैं. आपकी टेबल पर सारी चीज़ें अस्त-व्यस्त पड़ी हैं. आप ज़रूरी कागज़ तलाश रहे हैं और वो है कि मिल ही नहीं रहा.

उदाहरण 3: डिजिटल मीडिया आज का हीरो है. लेकिन आपका मेल अकाउंट उदासी की हालत में है. आपको 15 ईमेल का रिप्लाई देना बाकि है. आप इससे पहले भी कई असाइन्मेंट और प्रोजेक्ट्स में देरी कर अपने बॉस का गुस्सा झेल चुके हैं. 11.30 am से पहले आपको बहुत ज़रूरी 4 काम पूरे करने थे और अब 12.30 pm का समय हो चला हैं. काम करते-करते कब दोपहर के 3 बज गए, पता ही नहीं चला. आपकी पत्नी ने प्यार से भरा जो लंच बॉक्स दिया था वो सुबह से वहीँ पड़ा रह गया. आपसे लंच मिस हो गया.

अब आप समझ ही गए होंगे कि मैं आपसे क्या कहना चाहता हूं???

पूरे दिन का फीडबैक
आपका दिन ठीक से नहीं गुजरा. शाम को वर्किंग प्लेस से घर वापसी में भी आप वही ट्रेफिक झेलते हैं. घर पहुचने तक आप बिलकुल एनर्जी-लेस, लेट, और टेंशन से भरे हुए हैं. इसके बाद भी आपका ध्यान अगले दिन की ज़रूरी बातों पर लगा रहता है. घर के दूसरे मेम्बेर्स की लाइफस्टाइल भी आपकी ही तरह की हो गई है और शायद इसलिए आपस में हमेशा खटपट होती ही रहती है. बच्चे अपनी चीज़ों को जगह पर नहीं रखते और आप उन पर चिल्लाते रहते हैं. टीवी देखते समय आप जल्दी में खाना खा लेते हैं और उदासीन से होकर सोने चले जाते हैं. ये ही कुछ आजकल की रूटीन लाइफ का सच है. 

टेंशन के पीछे छुपे कारणों को जानकर उन्हें दूर किया जा सकता है. 
जानने के लिए टेंशन की नो पेंशन पार्ट 2 पढ़ना ना भूलें.

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