Jul 30, 2018

रॉकफेलर और 10 लाख डॉलर का कर्ज़



अमेरिका की बात हैं. एक युवक को अपने बिज़नेस में बहुत नुकसान उठाना पड़ा. उस पर बहुत कर्ज चढ़ गया और उसे अपनी तमाम जमीन जायदाद गिरवी रखना पड़ी. उसके अपने ख़ास दोस्तों ने भी मुसीबत के समय उससे मुंह फेर लिया.
सीधी बात ये कि अब वह बहुत हताश और निराश था. उसे अपनी प्रॉब्लम सोल्व करने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था.

एक दिन वह अकेला एक पार्क में बैठा अपनी परिस्थितियों के बारें में सोच रहा था और काफ़ी टेंशन में था. तभी अचानक एक बुजुर्ग वहां पहुंचे. चेहरे और कपड़ों से वे काफी अमीर दिखाई दे रहे थे. बुजुर्ग ने युवक से उसकी टेंशन का कारण पूछा. पहले तो युवक चुप रहा, फ़िर कुछ सोचकर उसने अपनी सारी कहानी उनको बता डाली.
बुजुर्ग बोले - ” डोंट वरी. टेंशन मत लो. मेरा नाम जॉन डी रॉकफेलर है. मैं तुम्हें नहीं जानता लेकिन पता नहीं क्यों तुम मुझे सच्चे और ईमानदार लग रहे हो. इसलिए मैं तुम्हें 10 लाख डॉलर का कर्ज देने को तैयार हूं ”.

फिर रॉकफेलर ने जेब से अपनी चेकबुक निकाल कर उस पर रकम लिखी और उस युवक को देते हुए बोले, ओ यंग जेंटलमैन, आज से ठीक 1 साल बाद हम इसी जगह पर मिलेंगे. तब तुम मेरा सारा कर्ज चुका देना ”. इतना कहकर वो चले गए.

युवक हक्का-बक्का रह गया. रॉकफेलर उस दौर में अमेरिका के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक माने जाते थे. युवक को तो भरोसा ही नहीं हो पा रहा था कि उसकी लगभग सारी प्रॉब्लम इतने पैसों से तो आसानी से हल हो जायेंगी. उसके पैरो को तो मानो पंख लग गये. घर पहुंचकर वह अपने कर्जे का हिसाब लगाने लगा.

अचानक उसके मन में ख्याल आया. उसने सोचा एक अनजान आदमी ने मुझ पर भरोसा किया लेकिन मैं खुद पर भरोसा क्यों नहीं कर पा रहा हूं ?

यह ख्याल आते ही उसने चेक को संभाल कर रख लिया. उसने निश्चय कर लिया कि पहले वह अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेगा, पूरी मेहनत करेगा कि अपनी तमाम प्रॉब्लम से निकल जाए. उसके बाद भी अगर कोई चारा न बचा तो वो ये चेक यूज़ कर लेगा. 

उस दिन के बाद से युवक ने खुद को मेहनत के कुएं में झोंक दिया. उसकी बस एक ही धुन थी कि किसी तरह सारे कर्ज चुकाकर अपनी इज्ज़त को फिर से पाना हैं. धीरे-धीरे उसकी कोशिशे रंग लाने लगी. बिज़नेस नेगेटिव से पॉजिटिव में जाने लगा. कर्ज चुकने लगा. साल भर बाद तक वो पहले से भी अच्छी पोजीशन में आ चुका था.

रॉकफेलर से मिलने के वादे वाले दिन वो युवक ठीक समय पर उसी पार्क में पहुँच गया जहाँ 1 साल पहले उनसे मिला था. वह चेक हाथ में लेकर रॉकफ़ेलर की राह देख ही रहा था कि वे दूर से आते दिखे. जब वे पास पहुंचे तो युवक ने बड़ी विनम्रता से उनका अभिवादन किया. उनकी ओर चेक बढ़ाकर उसने कुछ कहने के लिए मुंह खोल ही था कि एक नर्स भागते हुए आई और झपट्टा मारकर उस बुजुर्ग को पकड़ लिया.

युवक हैरान रह गया. नर्स बोली, “ यह पागल बार-बार पागलखाने से भाग जाता हैं और लोगों  को जॉन डी. रॉकफेलर के रूप में चेक बाँटता फिरता हैं. ”

अब वह युवक पहले से भी ज्यादा हैरान रह गया. जिस चेक के बल पर उसने अपना पूरा डूबता कारोबार फिर से खड़ा किया, वह तो वास्तव में फर्जी चेक था. 
फ़िर ऐसा क्या हुआ था कि उस युवक के अच्छे दिन लौट आये थे....

सार :
कहानी में चाहे ट्विस्ट है पर यह बात जरुर साबित होती है कि असल जिंदगी में हमारी जीत हमारे इरादे, हमारे हौंसले, हमारी सोच और हमारे एफर्ट की वजह से ही होती है. और यदि हम सभी खुद की पाजिटिविटी पर विश्वास करना सीख सकें तो यकीन मानिये कि कोई भी प्रॉब्लम ज्यादा दिनों तक हमारी मेहमान बन कर नहीं रह सकती. 
पर ये आदत समय मांगती है. कुछ अलग सोचना मांगती है. जरा हट के सोचने जैसा. वरना जिंदगी तो चल ही रही है अपने हिसाब से. 
क्या आपके पास इसके लिए कुछ समय है ? फ़िर से ख़ुद को पाने जैसा. 

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