Jul 30, 2018

अच्छी बात है. मैं कोशिश करूंगा

एक बार एक डाकू एक संत के पास आया और बोला, 'महाराज! मैं अपने जीवन से परेशान हो गया हूं. जाने कितनों को मैंने लूटकर दुखी किया है और  उनके घरों को बर्बाद किया है. मुझे कोई ऐसा रास्ता बताइए, जिससे मैं इस बुराई से बच सकूं?'

संत ने बड़े प्रेम से उसे अपने पास बिठाया और कहा,  'बुराई करना छोड़ दो, उससे बच जाओगे.'
डाकू ने कहा, 'अच्छी बात है. मैं कोशिश करूंगा.'
डाकू चला गया. कुछ दिनों के बाद वह फिर लौटकर आया और संत से बोला, ' मैंने बुराई को छोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन छोड़ नहीं पाया.
अपनी आदत से मैं लाचार हूं. कृपा करके मुझे कोई दूसरा उपाय बताइए.'
संत ने थोड़ी देर सोचा, फिर बोले,  'अच्छा, ऐसा करो कि तुम्हारे मन में जो भी बात उठे, उसे कर डालो, लेकिन प्रतिदिन उसे दूसरे लोगों से कह दिया करो.'
संत की बात सुनकर डाकू को बहुत खुशी हुई. उसने सोचा कि इतने बड़े संत ने जो मन में आए, सो कर डालने की आज्ञा दे दी है. अव मैं बेधड़क आराम से डाका डालूँगा और दूसरों से कह दिया करूँगा. यह तो बहुत ही आसान है.
डाकू ने संत के पैरों को छुआ और लौट गया.

कुछ दिनों के बाद वह फिर संत के पास आया और बोला, 'महाराज! आपने मुझे जो उपाय बताया था, उसे मैंने समझा तो बहुत आसान, लेकिन वह निकला बड़ा ही कठिन. बुरा काम करना जितना मुश्किल है, उससे कहीं अधिक मुश्किल है दूसरों के सामने अपनी बुराइयों को कह पाना और स्वीकार कर पाना.'
फिर थोड़ा ठहरकर वह डाकू बोला, 'दोनों में से अब मैंने आसान रास्ता चुन लिया है. डाका डालना ही छोड़ दिया है.'

सार: 
कमियाँ हम सब में ही होती हैं. लेकिन उन्हें पब्लिक में एक्सेप्ट कर पाना और फिर उन्हें दूर कर पाना इतना आसान कहाँ?

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