Sep 20, 2018

जो तेरे अंदर बैठा है, वो ही तो मेरे अंदर भी बैठा है.




पुरानी कहानियाँ कितनी सरलता से हमें सच का एहसास करा देती हैं, पता ही नहीं चलता.

आइए, इसे मॉडर्न स्टाइल से ना देखते हुए इसके पीछे छिपी फीलिंग को टच करने की कोशिश करें.

एक बुजुर्ग महिला अपने गांव रामपुर से पड़ोस के गांव श्यामपुर अपने किसी जानकार से मिलने जा रही थी. उसके पास थोड़ा सामान भी था जो उसने एक गठरी बांध रखा था. वो पैदल अपनी यात्रा पर थी. काफ़ी देर चलने के बाद वो थक गई. थकान के कारण सामान उठाना भी उसके लिए दर्दनाक हो रहा था.  

तभी उसने देखा कि उसी रास्ते से एक घुड़सवार चला आ रहा है. महिला ने उम्मीद के साथ उसे आवाज लगाई.
घुड़सवार ने स्पीड स्लो की और महिला के पास आ गया.
बोला: क्या बात है, मुझे क्यों बुलाया ?

महिला ने रिक्वेस्ट मोड में कहा: बेटा, मुझे साथ वाले गांव श्यामपुर जाना है. पैदल चलते चलते मैं बहुत थक गई हूं. और ये सामान मुझसे उठाया नहीं जा रहा. तू शायद उसी रास्ते जा रहा है तो मेरी एक छोटी से मदद करता जा. ये सामान की गठरी अपने घोड़े पर रख कर श्यामपुर तक पंहुचा दे. इससे मैं आराम से चल कर गांव पहुँच जाउंगी और थकान भी नहीं होगी.

घुड़सवार बोला : आप पैदल हो और मैं घोड़े पर. श्यामपुर अभी 5 किलोमीटर दूर है. अब पता नहीं आप कब तक वहां पहुचोगे. मैं तो फटाफट वहां पहुंच जाऊंगा और मुझे तो और भी आगे जाना है. अब मैं वहां जाकर आपका इंतजार तो नहीं कर सकता ना? इतना कहकर वह अपना घोड़ा लेकर आगे निकल गया.

थोड़ी दूर जाने के बाद उसको ख्याल आया कि मैं भी कितना बेवकूफ हूं. वो औरत ठीक से चल भी नहीं पा रही थी. बुजुर्ग वैसे है. अपना सामान भी मुझे विश्वास करके दे रही थी.

क्या पता उस गठरी में कोई कीमती सामान ही हो? मैं उसे लेकर आगे भाग भी जाता तो कौन पूछने वाला था? धत तेरे की. बेकार में ही मैंने उसे मना कर दिया.

अपने लालच को छिपाता हुआ वो फ़िर से उस महिला के पास वापिस पहुंचा और कहा: माता जी, लाओ दो अपना सामान. मैं ले जाऊंगा और श्यामपुर पहुंच कर आपका इंतजार कर लूंगा.

लेकिन ये क्या? उस औरत ने उसे अब मना कर दिया. बोली: कोई बात नहीं बेटे, तू क्यों परेशान होता है. मैं धीरे-धीरे चल कर वहां पहुंच जाऊँगी. यह सुन घुड़सवार हैरान हो कर बोला: अभी कुछ देर पहले तो आप कह रही थी कि ये गठरी ले जा. अब मैं लेकर चलने को रेडी हूं तो मना कर रही हो. यह अचानक उल्टा पाठ आपको इतनी से देर में किसने पढ़ा दिया?

बुजुर्ग महिला मुस्कराकर बोली: बेटा, ये पाठ मुझे उसी ने पढ़ाया है जिसने तुझे पढ़ाया कि इस गरीब का सामान ले चल. बेटा, जो तेरे अंदर बैठा है, वही तो मेरे अंदर भी बैठा है.
जब तू इस तरह अचानक वापिस आया, तभी मुझे शक हो गया था कि तेरी बुद्धि में लालच आ चुका है.
घुड़सवार अपना छोटा सा मुहं लेकर वहां से ख़िसक गया.

सार: 
लालच का कोई ईमान नहीं होता. इसका अमीरी या गरीबी से भी कोई नाता नहीं. ये आदमी की अपनी थिंकिंग होती है. फ़िर चाहे उसका रुतबा कैसा भी क्यों ना हो? 

(सभी नाम काल्पनिक हैं.)

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