Sep 21, 2018

क्या सचमुच तुम्हारा सब कुछ ख़त्म हो गया है?



जब जिंदगी बिलकुल करीब आकर आपसे बड़े प्यार से पूछे: 
क्या सचमुच तुम्हारा सब कुछ ख़त्म हो गया है? 
तब आपके मन में पहला क्या विचार आता है? ये पहला विचार ही आपके आने वाले भविष्य का चुनाव करेगा.

आप किधर भी देख रहें हो. जैसे कि पेरेंट्स, फ्रेंड्स, फॅमिली, सामाजिक कामयाबी, nearby रिलेशनशिप, आपका सोशल सर्किल आपकी इमेज, आपकी प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस, सेविंग्स आदि-आदि.

इन सब में से सबसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट क्या है? दिल और दिमाग को इस question का answer देने के लिए 120 सेकंड्स का टाइम दीजिए.
ये आपके सारे पुराने और नए सब फंडे क्लियर कर देगा. यकीन ना आए तो करके देखिए. ये अद्भुत सवाल है और मज़े की बात ये कि इसका आंसर भी अद्भुत ही है.

ये सिंपल सा प्रैक्टिकल सवाल है विद प्रैक्टिकल आंसर.
किसी ग्रंथ को नहीं पढ़ना. कोई intelligency नहीं चाहिए. कोई क्वालिफिकेशन नहीं चाहिए. किसी से गाइडेंस की ज़रूरत भी नहीं. हर कोई इसका आंसर जानता है, लेकिन समझने का समय आपने नहीं लिया. इसे सबसे सस्ता और छोटा मान लिया और दुनिया के ड्रामे में एक्टिंग करते करते सब भूलते चले गए. ये सबके साथ होता है. होगा ही. समय आता है और फ़िर आपको बताता है कि सबसे छोटा ही सबसे बड़ा है.

तो फ़िर करना क्या होगा?

सिर्फ़ आपको अपने मन की स्लेट ख़ाली करके वो तस्वीर देखनी है, जो अब तक किसी वजह से आप देख ही नहीं सके.

जिंदगी आपको बहा ले गई. आप बहते गए. आपको ख़ुश होना चाहिए. सब बातों के लिए जो आपकी लाइफ में हुई हैं. इससे आपको हल्का सा एहसास होना स्टार्ट होगा कि 
1. सब कुछ आपके हाथों में नहीं हो सकता. 
2. जो 10 साल पहले आपकी सोच थी, वो अब नहीं है. 
3. समय के साथ हर किसी को डांस करना पड़ता है, कई बार अपनी पसंद का गाना ना होने पर भी. 
4. जिस बात पर कभी इतराने का मन होता था, आज वो मेमोरी से ही डिलीट हो गयी है. 
5. लाइफ़ में कुछ भी फ़िक्स नहीं होता. जो चाहते हैं, वो नहीं होता और जो नहीं चाहते, वो हो जाता है. 
6. अगर ख़ुशी सिर्फ़ पैसों से ही ख़रीद ली जाती तो सबसे इनोसेंट स्माइल किसी गरीब की कभी ना होती. 
7. अगर by chance सब कुछ अपने हिसाब से हो भी जाए तो भी क्या अलग हुआ. 
8. सब कुछ सिर्फ़ अपने लिए बटोर लेने से अगर शांति मिल जाती तो हॉस्पिटल में बड़े लोग कभी बीमार ही ना पड़ते. 
9. क्या लाइफ़ का purpose होना ज़रूरी है या लाइफ़ होना ही सबसे बड़ा purpose है.

अब उस सवाल का आंसर आपको मिल गया होगा. आप ही के पास था, बस ध्यान कहीं और था. अब 120 सेकंड्स फ्री-माइंड होकर सोचा तो देखो मिला ना मस्त आंसर.

आंसर है: कि अभी आप जिंदा हो. आपका जिंदा होना ही सबसे महत्वपूर्ण है, इम्पोर्टेन्ट है.
अगर आप होते ही नहीं तो क्या कुछ भी होता? जैसे कि पेरेंट्स, फ्रेंड्स, फॅमिली, सामाजिक कामयाबी, nearby रिलेशनशिप, आपका सोशल सर्किल आपकी इमेज, आपकी प्रॉपर्टी, बैंक बैलेंस, सेविंग्स आदि-आदि.

अगर आप होते ही नहीं तो ऐसा कुछ नहीं होता. फ़िर ना कोई लक्ष्य होता, न कोई प्रायोरिटी होती, ना कुछ पॉजिटिव होता, ना नेगेटिव होता. ना कोई मोबाइल होता, ना कोई उम्मीद होती, ना कोई शिकायतें होती. ना आप दुखी होते, ना आप सुखी होते.

मतलब ये कि आपके होने से ही सब कुछ है. वर्ना कुछ भी नहीं.
अब आप ही बताइए कि क्या आप भाग्यशाली नहीं हैं.
आप जिंदा हैं, क्या ये सबसे खुबसूरत बात नहीं है?
और अगर आप जिंदा हैं तो इस जिंदगी के साथ कैसे पेश आना चाहेंगे.
बस आपको, हम सभी को इतना सा, छोटा सा काम करना है. और कुछ भी नहीं करना.

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? प्यार या नफरत?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? कॉन्ट्रिब्यूशन या स्वार्थ?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? मैं और मेरा या के हम सब की सांझी खुशियाँ?

अगर अब आप मानते हैं कि आप जिंदा हैं तो क्या शेयर करना चाहेंगे? सिर्फ़ सबसे लेना या सबमें बाटने का आनंद?

एक जिंदगी. आप जिंदा. दूसरों को भी जिंदा करें. उन्हें मारें नहीं. जिंदगी हमसे बस इतना सा मांगती है. क्या आप देना चाहेंगे?
ये सवाल ख़ुद से पूछते रहिए. अगर आप जिंदा हैं तो. नहीं हैं तो कोई बात नहीं.




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