Sep 23, 2018

एक बार एक बिजनेसमैन ने सोचा ?






चाहे हम कितनी ही बड़ी Post पर हों या हमारी हैसियत का लोहा पूरी दुनिया मानती हो. बावजूद इसके, हमें हर बात की सही-सही Knowledge हो ही, ये हमेशा ज़रूरी नहीं होता.

इसलिए कभी भी किसी बात को बिना पूरा जाने, बिना समझे और जल्दीबाज़ी में ग़लत समझने की भूल ना करें. कई बार हमसे भी गलती हो सकती है. हर समय सामने वाला ही ग़लत हो, ये Misunderstanding भी हो सकती है. ऐसा ही कुछ हुआ टापू के उस राजा के साथ.

आइए, एक छोटी सी स्टोरी से ये समझने की कोशिश करें कि ग़लती हो भी जाए तो उसे सुधारा कैसे जा सकता है?

बात पुराने समय की है. एक बार एक व्यापारी यानि बिजनेसमैन ने सोचा कि क्यों ना, इस बार किसी ऐसी जगह पर बिज़नेस किया जाए, जहां पर कोई गाय के बारे में नहीं जानता हो. ये सोच कर उस व्यापारी ने एक गाय खरीदी और एक ऐसे ही टापू पर चला गया, जहां पर आज तक किसी ने गाय को नहीं देखा था. वहां जाकर उसने उस टापू के कबीले वाले राजा से कांटेक्ट किया और उसे अपने बिज़नेस के बारें में बताया. राजा ने कहा कि हमारे कानून के मुताबिक आपको कुछ टैक्स देना होगा. व्यापारी ने कहा ओके और बोला कि मैं आपको Daily कुछ ना कुछ नया उपहार दिया करूंगा और इसे ही आप मेरा टैक्स मान लें. 

राजा ने परमिशन दे दी. व्यापारी ने काम स्टार्ट कर दिया. अपने वादे के मुताबिक वो रोज राजा को कभी दूध तो कभी दही. कभी लस्सी तो कभी मक्खन तो और कभी-कभी घी ले जाकर दे देता. राजा जब इन चीज़ों को खाता तो बहुत ही खुश होता. वो व्यापारी से मिलने वाले इन डेली गिफ्ट्स से बेहद ख़ुश था.

समय के साथ व्यापारी का सारा सामान बिक गया और वो वापिस अपने घर जाने की तैयारी में लग गया. जब वो जाने लगा तो राजा ने कहा कि आपने मुझे बहुत ही नायाब गिफ्ट्स दिए हैं. आप जाते जाते मुझे वो गिफ्ट बनाने वाली चीज़ दे जाओ ताकि आपके जाने के बाद भी मैं उससे वो गिफ्ट्स ले सकूं. 

व्यापारी ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी गाय राजा को भेंट कर दी और वहां से चला गया.

राजा ने उस गाय के चारों तरफ़ अपने सिक्यूरिटी गार्ड्स तैनात कर दिए और उन्हें आदेश दिया कि जब भी ये कोई गिफ्ट दे तो वो सबसे पहले तुम मुझे लाकर दोगे.

थोड़ी देर के बाद गाय ने अपना मूत्र त्याग किया तो गार्ड ने वो मूत्र एक बर्तन में डालकर राजा को दे दिया. राजा ने उसे चखा तो वो स्वादिष्ट नहीं लगा. थोड़ी देर बाद गाय ने गोबर कर दिया तो गार्ड ने वो भी ले जाकर राजा को दे दिया. राजा को वो भी अच्छा नहीं लगा.

अब तो राजा बहुत ही नाराज़ हुआ और उसे लगा कि उस व्यापारी ने हमें धोखा किया है. राजा ने तुरंत अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि जाओ और उस व्यापारी को पकड़ कर लाओ. व्यापारी तो अभी कुछ ही दूर गया था. सिपाही उसे पकड़ कर अपने राजा के पास ले गए.
राजा ने तमतमाते हुए कहा कि आपने मेरे साथ धोखा क्यों किया?
व्यापारी ने कहा कि मैंने आपको कोई धोखा नहीं दिया है. और फिर उसने गाय से दूध निकाल कर राजा को दिया और दही जमाकर राजा को खिलाया. फिर लस्सी, मक्खन दिया और घी भी दिया.
तब राजा को यकीन हुआ और समझ में आया कि जब तक सही जानकारी न हो, तब तक मूल्यवान वस्तु भी हमारे लिए किसी काम की नहीं होती. फिर राजा ने उस व्यापारी को खूब ईनाम देकर Respect के साथ विदा किया.

सार:
जब तक हमें किसी चीज़ के बारे में पूरी और सही जानकारी ना हो, तब तक हम उसका सही तरीके से यूज़ कर ही नहीं सकते.


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