Sep 30, 2018

वह बड़ा खुश था. हैप्पी.





एक राजा ने अपनी सेवा के लिए अपने दरबार में एक नाई की अपॉइंटमेंट की. नाई उसकी मालिश करता, शेव बनाता और कुछ गुनगुनाता रहता. 

राजा हैरान. क्यों? नाई हर पल प्रसन्न, बड़ा आनंदित, हमेशा मस्ती में. 

राजा से उसे 1 रुपया रोज की सैलरी मिलती. उस 1 रुपया सैलरी में वह खूब खाता-पीता, दोस्तों को भी खिलाता-पिलाता और लाइफ़ को एन्जॉय करता. नाई रात को जब सोता तो उसके पास एक फूटी कोड़ी ना बचती लेकिन वो रिलैक्स होकर सोता. अगले दिन उसे फिर उसे फ़िर 1 रुपया मिल जाता और उसका रूटीन वैसे ही चलता. वह बड़ा खुश था. हैप्पी.

वो इतना खुश था कि राजा को मन ही मन उससे जलन होती. राजा होते हुए भी वो इतना खुश नहीं था. खुशी राजा बनने से मिल ही जाए, ये ज़रूरी तो नहीं. उदासी और चिंताओं के बोझ और पहाड़ उसके सिर पर थे.

उसने पूछा तेरी हैप्पीनेस का सीक्रेट बता ओ नाई?
नाई: मैं तो जीरो हो महाराज. मैं कोई बड़ा बुद्धिमान नहीं. लेकिन, जैसे आप मुझे ख़ुश देख कर सरप्राइज होते हो. वैसे ही मैं भी आपको देख कर सरप्राइज होता हूं कि आपके दुखी होने का कारण क्या है?

मेरे पास तो कुछ भी नहीं और मैं फ़िर भी happy फील करता हूं. आपके पास सब है और आप फ़िर भी sad. आप मुझे ज्यादा surprise में डाल देते हैं. मैं तो ख़ुश हूं क्योंकि ख़ुश रहना स्वाभाविक है, और होने को है ही क्या?

राजा के मन को तसल्ली नहीं हुई. उसने अपने वफ़ादार मिनिस्टर को बुलाया और कहा कि ये नाई इतना ख़ुश है कि मेरे मन में विचार आता है कि राजा होने से बेहतर तो मैं नाई ही होता तो ज्यादा अच्छा था. राजा होकर क्यों फंस गया? ना मुझे रात को नींद आती है. न दिन में चैन मिलता है और रोज चिंताएं बढ़ती ही चली जाती हैं. 1 problem solve करो तो 10 दूसरी खड़ी हो जाती हैं. नाई होना कितना lucky है.

मिनिस्टर ने कहा, आप tension मत लीजिए. let मी find the solution.

राजा ने कहा, क्या करोगे

उसने कहा, कुछ नहीं. आप कुछ दिनों में फ़र्क देखना. मिनिस्टर ने क्या किया? एक रात को 99 रुपये एक थैली में रखे और नाई के घर में फेंक आया. जब सुबह नाई उठा, तो उसने 99 गिने, वह परेशान हो गया. उसने कहा, बस 1 रुपया आज और मिल जाए तो आज उपवास ही रखेंगे, 100 पूरे हो जायेंगे.

अब क्या था. टेंशन स्टार्ट हो गयी. खेल शुरू हो गया. 

जिसने कभी “कल” की चिंता ही नहीं की थी. जो बस “आज” में जीता था वो दुविधा में फंस गया. 99 उसके पास थे, 100 करने में देर ही क्या बची थी. केवल एक दिन की तकलीफ उठानी थी कि पूरे 100 हुए. फ़िर क्या हुआ?

जब दूसरे दिन वो राजा के पैर दबाने पहुंचा तो वो मस्ती, वो ख़ुशी, वो चहकना गायब था. बड़ी उदासी थी. चिंता में पड़ा मालूम हो रहा था. कोई गणित मन ही मन उसे उलझा रहा था.

राजा ने पूछा, क्या हुआ भाई? आज अचानक इतने परेशान? चक्कर क्या है?
उसने कहा: नहीं मालिक, कुछ भी नहीं. सब ठीक है।

मगर आज नाई की बातों में वो पुरानी मिठास, वो सुगंध नहीं थी, जो हमेशा होती थी. जब पहले कहता था तो सब ठीक था ही. आज formality  करता मालूम हो रहा था.

राजा ने कहा, नहीं मैं नहीं मान सकता. तुम उदास दिखाई देते हो. आंखों में वो रौनक नहीं. तुम रात ठीक से सोए भी?
उसने कहा, अब आप पूछ ही रहें हैं तो आपसे झूठ कैसे बोलूं. रात नहीं सो पाया. लेकिन सब ठीक हो जाएगा, बस एक दिन की बात है. आप चिंता ना करें.

लेकिन tension तो tension है. वो जल्दी से कहाँ विदा होती है.

उसकी tension अब रोज बढ़ने लगी. 100 रूपए पूरे हो गए तो नाई सोचने लगा कि अब 100 तो हो ही गए. अब धीरे-धीरे इकट्ठा कर लूं तो कभी ना कभी 200 भी हो ही जाएंगे.

अब naturality समझदारी के mathematics में बदलने की और थी. एक-एक कदम धन इकठ्ठा करने की तरफ़ उठता हुआ. नतीजा, 20 दिनों में ही नाई बिलकुल ठुस्स हो गया. उसकी सब खुशी चली गई. उसकी happiness अब sorrow में कन्वर्ट हो चली थी.

राजा ने कहा, अब तू सच-सच बता ही दे कि आख़िर मामला क्या है? मेरे मिनिस्टर ने कुछ किया?

तब नाई चौका? बोला, क्या मतलब? आपका मिनिस्टर...?

अच्छा, तो अब मैं समझा. अचानक मेरे घर में एक रात 99 रूपए से भरी एक थैली पड़ी मिली. बस, उसी दिन से ही मैं मुश्किल में पड़ गया हूं. ओह. ये है असली बात. धीरे-धीरे उसे सब समझ आने लगा.

राजा ज़ोर से हंसा और जिंदगी फ़िर से मुस्कुराने लगी. थोड़ी देर में मिनिस्टर भी आ गया. सब ये जान कर ख़ुश थे कि उन्हें लाइफ़ की मिठास का राज पता चल गया था. उसके बाद उनमें से किसी को कभी टेंशन नहीं हुई.



साभार: ओशो

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