Sep 5, 2018

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा.


एक राजा था. पक्षी पालने का बड़ा शौक़ीन. उसने एक सुंदर चकोर पक्षी को पाला. एक बार की बात है, राजा वन में शिकार के लिए गया लेकिन गलती से रास्ता भटक गया. उसे बहुत प्यास भी लगी थी. इतने में उसे दूर चट्टान से पानी टपकता दिखाई दिया.

राजा ने टपकते हुए पानी के नीचे एक प्याला रख दिया. चकोर पक्षी भी उस समय राजा के साथ था. जब प्याला पानी से भरने ही वाला था तभी अचानक चकोर पक्षी ने अपने पंखों से उस प्याले को गिरा दिया. राजा को गुस्सा आया लेकिन उसने कुछ नहीं कहा.

राजा ने एक बार फिर से प्याले को चट्टान से टपकते पानी के नीचे रख दिया. इस बार भी जब पहले बार की तरह प्याला भरने ही वाला था. चकोर पक्षी ने अपने पंखों से प्याला गिरा दिया. अब राजा से सहन नहीं हुआ और उसने उस सुंदर चकोर पक्षी को पकड़कर गुस्से में उसकी गरदन मरोड़ डाली. चकोर अब स्वर्ग जा चुका था. 
(राजा बाबू ये नहीं जानते थे कि चकोर पक्षी जब भी अपने मालिक के भोजन में जहर देख लेता है तो मालिक को अपनी एक्टिविटी से अलर्ट जरुर करता है.)

इधर राजा प्यास से पागल हो रहा था. राजा इस बार थोड़ी ऊंचाई पर पानी भरने के लिए प्याला रखने ही वाला था कि उसने देखा कि चट्टान पर एक मरा हुआ सांप पड़ा है. जहरीले सांप के मुंह से टपकता पानी ही नीचे आ रहा था, जिससे वो प्याला भर रहा था. सुंदर चकोर पक्षी को यह बात मालूम चल गयी थी, इसलिए उसने राजा को वह पानी नहीं पीने दिया था. पूरी घटना को समझने के बाद राजा को अपने किए पर बहुत ही पछतावा हुआ.

सार – गुस्सा आग की तरह होता है और उसका फल आदमी को भुगतना पड़ता है. इसीलिए गुस्से पर कंट्रोल रखते हुए आदमी को सही स्थिति का एनालिसिस करते रहना चाहिए ताकि बाद में ख़ुद के लिए गिल्ट फील ना हो. 
आप भी अगर राजा हैं तो जरा गौर करते रहिये. कहीं आपको बचाने वाला ही आपको विलेन ना लगता हो.

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