Sep 7, 2018

झूठी प्रशंसा या खुशामद नहीं, बल्कि दिल से थैंक यू.



शब्दों में बहुत शक्ति होती है।

शब्द मरते हुए व्यक्ति को जिंदा कर सकते हैं तो किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिए जहर का कार्य भी कर सकते हैं। किसी को आकाश की ऊँचाई तक ले जा सकते हैं तो किसी को निराशा के पाताल में भी पहुंचा सकते हैं।

ये सब हमारे प्रयोग पर निर्भर है। हमारे शब्दों के तरकश में जो सबसे अमोघ बाण हैं उसका हम सही ढंग से प्रयोग नहीं करते और वो बाण है प्रशंसा के कुछ शब्द।

सबसे इम्पोर्टेन्ट रिलेशन जैसे शादी का अटूट रिश्ता : आज लगभग हर मैरिड कपल जिनके विवाह को एक टाइम बीत चुका है उन्हें सिम्पली ये शिकायत रहती है कि हमारा दाम्पत्य जीवन नीरसता की कगार पर पहुंच गया है। जीवन एक बंधे-बंधाए ढर्रे पर चलने लगा है जिसमें से प्रेम, रोमांच इत्यादि सब तत्व स्वाहा हो गए हैं।

पता है ये सब आखिर क्यों ?

ये सब इसलिए हो रहा है कि हम एक-दूसरे की प्रशंसा करना भूल गए हैं। पति साहब ये समझते है कि पत्नी जो भी कर रही है, उसके एवं परिवार के लिए ये तो उसका धर्म है, उसका कर्तव्य है और कर्तव्य के लिए क्या धन्यवाद देना? यही बात पत्नी साहिबा पर भी अप्लाई होती है।

फेमस विचारक मार्क ट्वेन ने एक बार कहा था कि प्रशंसा के एक वाक्य से मैं दो महीने ज्यादा जिन्दा रह सकता हूँ। इससे प्रशंसा के महत्व का ज्ञान होता है।

ये समस्या यूँ तो सालों से चली आ रही है परंतु सोशल मीडिया के अधिक यूज़ से इसका रूप डीग्रेड होता जा रहा है। पति की या जवान होते बच्चों की या सास-ससुर की उपेक्षा का शिकार किसी नारी की जब कोई दूसरा व्यक्ति प्रशंसा करता है तो न चाहते हुए भी उस व्यक्ति के प्रति उस नारी के मन में कोमल भावनाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। यही स्थिति अपने घर में उपेक्षित अनुभव कर रहे पुरूष की भी होती है। कभी-कभी कोई समान रूचि भी इन दो अनजान व्यक्तियों को समीप लाने का कार्य करती है।

इन संबंधों में कुछ संबंध निर्दोष भी होते हैं लेकिन इन जनरल इन दोनों में से एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति का आर्थिक, शारीरिक या मानसिक शोषण करने की निश्चित योजना के तहत धीरे-धीरे उसको जाल में फंसाता है। इस प्रकार के संबंधों के अंत में दोनों में से एक व्यक्ति को जीवन भर न भरने वाला घाव ही मिलता है। कभी-कभी तो अपराध बोध से वो डिप्रेस भी हो सकता है।

अब सवाल ये उठता है कि इन सबसे बचने का क्या उपाय है? सबसे सरल और सीधा उपाय ये है कि पति-पत्नी को थोड़ा समय एक-दूसरे को अवश्य देना चाहिए और छोटी-छोटी बातों पर प्रशंसा करने से चूकना नहीं चाहिए। झूठी प्रशंसा या खुशामद नहीं, बल्कि दिल से थैंक यू. इट्स नोट टफ. पत्नी द्वारा मेहनत और प्यार से बनाए गए खाने के स्वाद का बखान करना कोई ज्यादा टफ काम नहीं है। इसी प्रकार पति द्वारा अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अथक प्रयासों की या घर के काम में उसके द्वारा की गई छोटी-मोटी सहायता की प्रशंसा करने में कोई हानि नहीं है।

किसी खास अवसर पर तैयार हुए पति या पत्नी की प्रशंसा में कहे गए कुछ शब्द उनको कितनी मोटिवेशन और हैप्पीनेस दे सकते हैं, आप सोच भी नहीं लगा सकते। अब सोचने का समय है.....

आप सब अपने फेसबुक या वाट्सअप्प पर किसी फ्रेंड या किसी और की जितनी प्रशंसा करते हैं आप स्वयं सोचिए क्या आप उतनी प्रशंसा अपने पति या पत्नी की करते हैं? यदि इसका जवाब ना है तो आप बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

ये भी हो सकता है जिस समय आप अपनी प्रशंसा सुनकर इतरा रहे हों या किसी की प्रशंसा के पुल बाँधने में बिजी हों, ठीक उसी समय आपका जीवनसाथी भी यही कर रहा हो ?

और आप विश्वास रखिए कि आपके बीमार होने की स्थिति में या अन्य किसी कठिनाई में आपका जीवनसाथी ही आपके साथ खड़ा रहेगा और आपको उबरने में सहयोग देगा। ये तथाकथित सोशल रिलेशन किसी काम नहीं आने वाले। ये वहम की दुनिया है। लुभावनी इतनी कि रियल लगने लगती है, जबकि है नहीं। इस दुनिया से उतना ही लें जो आपको लाइफ क्वालिटी इम्प्रूव करने में हेल्प कर सके।

इसलिए जब भी आपका जीवनसाथी कुछ अच्छा काम करे, दिल खोलकर उसकी तारीफ करिए। फिर देखिए वो कैसे आप पर प्रेम की बारिश करता है।

सार: प्यार बाटने से ही बढ़ेगा. और कोई रास्ता नहीं है दिल के रिश्तों को अपना कह सकने का. जो भीतर है, उसे बाहर मत तलाशिए। तभी जान पाएंगे कि असली धन कौन सा है और कितना पवित्र भी।

साभार : बी.के.नीलम जी

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