Sep 20, 2018

घर के stress को strength में बदलिए.

इंसान होने की कहानी भी मस्त है.
अगर हमें कोई बता दे कि हमारी लाइफ का aim क्या होना चाहिए तो हम उसे अवॉयड कर देना चाहते हैं.
और अगर कोई ना बताए तो हम कह देते हैं कि ये किसी काम का नहीं. इसके पास विज़न ही नहीं है. ये अभी mature नहीं हुआ.

आप अपने आस-पास ही नज़र घूमा कर देखिए. सब जगह एक बेचारगी सी फ़ैली हुई सी लग रही है. आज से 10-20 साल पहले के मुकाबले हमारे पास कितनी फैसिलिटी आ चुकी हैं. पर क्या हम पहले जैसे निश्चिंत रह पा रहें हैं? पहले जहां विश्वास पर जिंदगी घूमा करती थी, अब उसकी जगह झूठ और फ़रेब ने घर बसा लिया है. ये भला कौन सी डेवेलपमेंट हुई?

आज लगभग सब कुछ ऑनलाइन हो गया है. और शायद relations भी इसके साथ डिजिटल और डिवाइड हो गए है. कॉर्पोरेट कल्चर ने भारत जैसे इमोशनल देश को भी ओवर-प्रैक्टिकल बना दिया. हर चीज़ प्रॉफिट-लोस की केटेगरी में आती जा रही है. धर्म और जाति की आग़ मानवता के मूलभूत अस्तित्व को ख़ाक करने की और बढ़ रहीं है. और ये सब एक दिन में ही नहीं हुआ है.

असल बात ये है कि आज का लाइफ़ स्ट्रक्टर इतना complicated हो गया है कि हम किसी पर विश्वास नहीं कर पा रहे. करें भी तो कैसे? न्यूज़ पेपर पढ़कर तो ऐसा लगता कि हमारे देश में कोई भी एक चीज़ सही नहीं हो रही. सब कुछ डिजिटल होने के बाद भी हमारी सोच का दायरा सिमटता जा रहा है. और ऐसी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं कि 21वीं सदी का ये दौर मानवता के लिए कलंक ही साबित होता दिखाई मालूम होता है.

कहते हैं कि हर चीज़ की शुरुआत अपने घर से होती है. अब समय आ गया है कि हर घर में प्रेम, एक दूसरे को सहयोग और सभी सदस्यों में ज़िम्मेदारी की भावना के विकास पर सोचा जाए. सिर्फ़ अपने तक सीमित ना रह कर आस-पास के सभी लोगों के अच्छे के लिए आगे आने और उनको मुस्कराहट देने का समय है. अगर अब भी ऐसा नहीं किया गया तो हम बस मोबाइल और इन्टरनेट की दुनिया के वो हिस्से बन जाएंगे जो डाटा-पैक ख़त्म होते ही तिलमिलाने लगते हैं.

हम ये ना सोचें कि सब कुछ ही ख़राब है. ये भी हो सकता है कि हम वो ही देख पा रहें हों, जो हम देखना चाह रहें हो?
अब बाहर तो आप सबकुछ बदल नहीं सकते.
आसान ये है कि अपने घर से स्टार्ट करिए. घर के stress को strength में बदलिए. अच्छे संस्कारों को अपने बच्चों में डालिए. ख़ासकर अपने लड़कों को सिखाइए कि लड़कियों की रेस्पेक्ट करें. ये कोई छोटी बात नहीं है. अपने बच्चों की क्वेरीज को समझने और उनका सही solution देने में उनकी मदद करें. एक-दूसरे के contribution की सराहना करना शुरू करें. अगर हर माँ-बाप अपने बच्चों को पॉजिटिव वातावरण और उसके फ़ायदों के बारें में जागरूक करना सीख सकें तो ये पढ़ाई की रटी-रटाई बातों से कहीं ज्यादा उनकी मदद करेगा लाइफ़ को जीने के सही तरीके को जानने में. ये ही आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है और सिर्फ़ आप ही हैं जो इस moment को शानदार तरीके से सबके लिए ख़ुशनुमा बना सकते हैं.

उदाहरण के लिए: (1) अगर आप का बच्चा क्लास में हमेशा A–grade से पास हो जाता है तो आपको कितनी ख़ुशी मिलती है. मिलती है ना. लेकिन (2) वो ही बच्चा अगर कॉमन सेंस यूज़ ना कर सके और कुछ ऐसा कर दे कि आपको सबके सामने शर्मिंदा होना पड़े.
अगर आपको सिचुएशन 1 या 2 में से कोई एक सेलेक्ट करनी पड़े तो आप अपने बच्चे में कौन सी डेवलपमेंट ज्यादा होते देखना चाहेंगे? 
दिमाग लगाइए. 
एक तरफ़ टॉप के grades और दूसरी तरफ़ लाइफ़ के degrading decision. और कई बार तो सिचुएशन ऐसी उलझ जाती हैं कि पेरेंट्स को पता ही नहीं चल पाता कि उनका बच्चा क्या कर रहा है?
कई बच्चे सही काउंसलिंग ना पाने की वजह से कुछ ऐसा कर बैठते हैं जो सबको हैरान कर जाता है.

कुल मिलकर बात ये है कि जैसा आप अपने बच्चों को बनाना चाहेंगे, वो वैसे ही बनेंगे. वो तो कच्ची मिट्टी जैसे हैं. उनको पकाने वाले आप हैं. चाहे झोपड़ी में रह कर पकाएं या महलों में. कोई और उनके लिए उतना ज़िम्मेदार हो ही नहीं सकता जितना कि उनको जन्म देने वाले.

याद रखिए. बच्चों के किए अच्छे और बुरे दोनों कामों के लिए उनके माता-पिता के रोल को ही पहला कारण माना जाएगा. और इसके लिए कौन सही मायनों में responsible है, ये सबको समझ ही लेना चाहिए. किसी को दोष दे देना आसान है. लेकिन ज़िम्मेदारी से लाइफ़ जीना बेहद कठिन.

आइए, कुछ कोट्स पर नज़र डालें. ये हमारी लाइफ़ के garbage को साफ़ करने में मदद कर सकते हैं.

Quote: बहरा या गूंगा होना कहीं ज्यादा अच्छा है बजाय इसके कि आप स्वस्थ हों और किसी की परेशानी का कारण बनें.

Quote: भगवान् बाहर कहीं नहीं रहते. आपके अंदर ही कहीं है. बस आप उन्हें वहां देखने से चूक जाते हैं और पाप बढ़ते जाते हैं. इसमें किसी और का दोष कैसे हुआ?

Quote: बच्चे पैदा करना आसान है. लेकिन उन्हें इंसान बनाना 100 गुना मुश्किल.

Quote: कल्पना और प्रार्थना आपका जीवन बदल सकती हैं. ये अंधविश्वास नहीं है. साइंटिफिक है.

Quote: मुर्दा होना बुरी बात नहीं है. ऐसा सबको होना है. असल बात ये है कि मरने से पहले आपके जीने का तरीका कैसा था? matter ये ही करता है.






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