Oct 3, 2018

इन 4 आदतों वाले लोग आख़िर क्यों रहते हैं हमेशा ख़ुश






 इस संसार में वो कौन है जो खुश रहना नहीं चाहता?
जीवन में खुश रहने के लिए क्‍या किया जाए, ये सबको पता होता है. लेकिन खुश रहने के लिए यह जानना भी दिलचस्प है कि कौन से काम आप ना करें. आइए जानने की कोशिश करें कि रियल हैप्पीनेस यानि ख़ुशी चाहने वाले लोग आखिर क्या नहीं करते?

ऐसे लोग - बेवजह अपना टाइम बर्बाद नहीं करते.
खुश रहने वाले लोग किसी काम में उतना ही टाइम देते हैं, जितना जरूरी है. ना कम, ना ज्यादा. वहीं दुखी लोग टाइम की रेस्पेक्ट नहीं कर पाते. दुखी लोग काम न करने के बहाने तलाशते हैं और अपना टाइम बर्बाद करते चलते हैं. ये ख़ुद को दुखी तो रखते ही हैं, साथ ही आसपास का माहौल भी नेगेटिव बना डालते हैं. 

खुश रहने और अपने आसपास के माहौल को एनर्जेटिक बनाने के लिए आपको टाइम पर अपना काम कर लेने की आदत डालनी चाहिए. ख़ुशी आपको अपना काम पूरा करके ही मिलेगी. दुखी लोग दूसरों के कामों पर नज़र गड़ाए रहते हैं और गलती ये करते हैं कि उनका अपना काम पेंडिंग रह जाता है. तो अगर आप आलरेडी ख़ुश हैं तो ग्रेट और अगर आपको अभी भी लगता है कि आप टाइम ख़राब कर रहें हैं तो जल्दी से अपने पेंडिंग काम का dustbin ख़ाली कर लीजिए और ख़ुशी का बास्केट भर लीजिए.


ऐसे लोग- पुराने फेलियर से बाहर निकल कर नया सोचते हैं.
खुश रहने वाले लोग अपनी गलतियों को याद रखते हैं. उनसे सबक लेकर आगे बढ़ते है लेकिन हमेशा अपनी गलतियों की माला जपते नहीं घूमते फिरते. वो सहानुभूति के मारे नहीं बनते. अपनी गलती से सीखते हैं और फ्यूचर की तरफ़ देखते हैं. 

दुखी लोग अपने पुराने फेलियर के गीत गाते रहते हैं और उनसे कभी बाहर नहीं निकल पाते. इससे नुकसान क्या होता है? उनका प्रेजेंट और फ्यूचर खतरे में पड़ जाता है और वो डिप्रेशन और टेंशन के शिकार हो सकते हैं.  


ऐसे लोग – कभी दूसरों को दोष देकर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं भागते.
जिन लोगों को आप खुश और हँसमुख देखेंगे तो पाएंगे कि अपनी प्रोब्लेम्स के लिए दूसरों को ब्लेम कभी नहीं करते. वे आगे बढ़कर ख़ुद जिम्‍मेदारी लेते हैं फिर चाहे भले ही इसके लिए कोई दूसरा व्‍यक्ति ही जिम्‍मेदार क्‍यों न हो. 

दुखी लोग झट से किसी भी दिक्कत के लिए अपने माहौल, किस्मत या दूसरे किसी अन्य को तुरंत ज़िम्मेदार ठहरा देते हैं. इससे वो उस समय तो उस स्थिति से बच जाते हैं लेकिन उनको लाइफ में किसी भी काम को अपने कंधों पर लेने से डर लगने लगता है. तो ख़ुश रहना है तो रेस्पोंसिबिलिटी मैनेजमेंट ज़रूर सीखिए. इससे आपका कॉन्फिडेंस बहुत बढ़ जाता है और समस्‍याओं को सुलझाने का रास्ता भी मिल जाता है. साथ ही किसी और का नुकसान भी नहीं होता.


ऐसे लोग – ख़ुद को कहीं पर फंसा या उलझा हुआ फील नहीं करते.
दिल से ख़ुश रहने लोग ख़ुद को कभी भी, कहीं भी फंसा हुआ महसूस नहीं करते. वो हर जगह लाइफ को सेलिब्रेट करना सीखते रहते हैं. हमेशा मौजूद विकल्‍पों पर फोकस करते हैं. उनके रास्‍ते में जब मुश्किलें आती हैं, तब भी वे उन हालात से निकलने के रा‍स्‍ते सर्च करते मिलेंगे.

दुखी लोग हर जगह किस्मत का रोना लेकर बैठ जायेंगे. वो किसी भी एंगल से कुछ भी पॉजिटिव नहीं देख पाते और एक नार्मल माहौल को भी बद से बद्तर बनाने का हुनर रखते हैं. उन्हें थोड़ा शांत होकर सिर्फ़ ये जानने की ज़रूरत है कि समाधान कैसे निकले. अगर कभी मन परेशान हो तो ख़ुद से सवाल करें कि आखिर कैसे आप ख़ुद की क्षमताओं का बेहतर मैनेजमेंट कर सकते हैं. ये आपको ख़ुश रहने वालों के बीच सम्मानजनक स्थान दिला सकता है और आपकी लाइफ को नयी डायरेक्शन दे सकता है.


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