Oct 7, 2018

शर्तों के साथ रिश्तों की शुरुआत – बाद में शक के साथ रिश्ता ख़त्म





ये गाना तो आपने ख़ूब सुना और पसंद किया. अब इसी गाने को हम अगर relate करें आज की modern और hardworking जनरेशन से तो कमाल की एक चीज़ निकल कर सामने आती है.

वो क्या?
हर बात में जल्दबाज़ी.
वो कैसे?

youth सबकुछ बड़ी तेजी से कर लेना चाहता है. चाहे इधर से या के उधर से. बस किसी भी तरीके से. सबकुछ आज ही मिल जाए. और फ़िसलने का मतलब है कि ना इधर के रहे और ना ही उधर के. युवाओं की सोच बन रही है उस मैगी की तरह जो instant 2 minute में पक जाए.

क्या ये instant theory आज के टाइम का सच है या उनकी बदलती जरूरतों और वातावरण का असर ?

ये आने वाले सालों में पता चल पायेगा कि ये theory कितनी practical रही. फ़िलहाल इस instant theory में क्या हो रहा है? क्या चल रहा है? इस पर नज़र डालते हैं.

देखते हैं कि आखिर चल क्या रहा है? हो क्या रहा है ?
ये क्या हो रहा है..भाई ये क्या हो रहा है ?

शानदार practical लाइफ जी रही ये युवा पीढ़ी, ये मेहनती पीढ़ी आखिर किस सोच के साथ आगे बढ़ रही है ?

पहचानते हैं इनकी कुछ आदतों और रिएक्शन से ?
Ø fast food का क्रेज

Ø सड़क पर ड्राइव करते हुए तेज स्पीड

Ø ज्यादा टाइम तक किसी नौकरी या रिश्ते में ना रह पाना

Ø Emotions, पेशेंस और Giving नेचर को Bye-Bye

Ø मोबाइल हाथ में रखकर CEO टाइप की फीलिंग का प्रदर्शन

Ø Use एंड Throw Theory का Maximum इस्तेमाल

Ø अपनों के साथ – बिताने के लिए समय नहीं - Value ना दे पाना  

Ø तुरंत चाहिए – Success और पैसा 

Ø अपने दोस्तों से ही तुलना – Package उनसे ज्यादा ही हो

Ø रिश्तों में खोखलापन – Loyalty ख़त्म – बस मेरा Enjoyment

Ø मौज-मस्ती के लिए कुछ भी – किसी की इज्ज़त से कोई लेना देना नहीं – और उनके लिए ये है Cool. Wav टाइप.

Ø अपना काम निकालने के लिए रिश्वत देना बुरा नहीं – टाइम बचता है.

Ø Partners ऐसे बदलना जैसे कपड़े बदल रहें हो. Quick Mode

Ø जल्दी अफेयर और उससे जल्दी ब्रेकअप

Ø शर्तों के साथ रिश्तों की शुरुआत – बाद में शक के साथ रिश्ता ख़त्म 

Ø Profession पहले, Relations बाद में – पैसे के बिना कौन से Relations और किस काम के ?

Ø Parenting भी शानदार – तुम आगे निकलो बेटा – इन सबसे आगे – वो इतने आगे निकल जाते हैं कि फ़िर Parents भी आउटडेटिड नज़र आते हैं.

Ø Internet और सोशल मीडिया का असर ज़बरदस्त – नया एंटरटेनमेंट – वो भी सस्ता – अब कहीं और क्यों जाना ?

Ø तुरंत अप्लाई – तुरंत Result चाहिए. Speedy. नो Wait

Ø IQ पर फोकस

हो तो मज़ेदार ही रहा है.
यूथ पहले के मुकाबले ज्यादा Updated, ज्यादा समझदार, सुलझा हुआ और कामयाब. उसे खूब Package भी मिल रहा है. 

लेकिन क्या क्या खो दिया उसने?
v Health - Gone

v Physical body मूवमेंट Missing

v पेरेंट्स से Affection about तो Nil

v रिलेशनशिप में Failure

v उम्र से पहले ही Maturity – यानि Natural Growth फुस्स

v पेशेंस की कोई जगह नहीं – जो चाहा नहीं मिला तो Depression में – ज़िम्मेदार किसी और को ठहरा दो

v मैरिड लाइफ़ Painful – अब Partner के लिए टाइम कहां ?

v सोशल मीडिया – अब दोस्तों से सिर्फ़ ऑनलाइन फीलिंग शेयरिंग

v अकेलापन और भविष्य की चिंता में बालों का उड़ जाना

v जब निभाया नहीं किसी से तो किसी पर भरोसा भी कैसे करें ? – नतीजा – शक करने की आदत Permanent

v काम का Pressure – पर बताएं किसे – किसी से बिना मतलब मिले ही नहीं कभी – कोई रियल दोस्त नहीं – सब ऑनलाइन

v Fast फ़ूड या आउटिंग – घर के खाने का स्वाद नसीब में कहां ?

v ख़ुद समझदार – बाकि सब अक्ल के अंधे – गुस्सा ज्यादा आना – और फ़िर उदासी फ्री

v EQ गायब. लाइफ़ का एसेंशियल Element.

कुल मिलाकर क्या खोया और क्या पाया? ये यूथ को सोचना होगा कि वो Balancing कैसे Achieve करे अपनी लाइफ़, रिश्तों और अपने काम और एक्टिविटीज में.

आज से 20 साल बाद उनके लिए पैसों के सिवा शायद ही कुछ बचे याद करने लायक. कुछ सहज कर रखने लायक. कुछ मुस्कुराने लायक. 

उन्हें सोचना शुरू कर देना चाहिए. सोचना पड़ता है. दिमाग सिर्फ़ भरने के लिए नहीं मिला है. इसमें जीवन को खुश्बू देने वाली रेसिपी तो आपको ही डालनी होगी.

सोचिये साहब. वैसे आप इसे हवा में भी उड़ा सकते हैं. फ़र्क कहां और कैसे और किसे पड़ेगा, ये देखना दिलचस्प होगा.





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