Nov 2, 2018

10 मिनट बाद एक 3 साल का बच्चा वहां रुक गया.



ह्यूमन साइंस स्टडी में बहुत खोजें होती थी, होती हैं और होती रहेंगी. ख़ासकर विकसित देशों में ये रूटीन लाइफ़ स्ट्रक्चर का हमेशा एक महत्वपूर्ण पार्ट रहीं है. 

इन activities से अच्छे और प्रैक्टिकल results सामने आते हैं और फ़िर उन पर फोकस कर के आप मानवीय सोच को नया आकार दे पाते हैं.

ऐसी ही एक घटना से आप भी परिचित हो सकते है. देखिए.

जनवरी की एक सर्द सुबह. अमेरिका के वाशिंगटन डीसी का मेट्रो स्टेशन.

एक आदमी वहां करीब घंटा भर तक वायलिन बजाता रहा. इस दौरान लगभग 2000 लोग वहां से गुज़रे. उनमें से अधिकतर लोग अपने काम से जा रहे थे. उस व्यक्ति ने वायलिन बजाना शुरू किया. 

उसके 3 मिनट बाद एक अधेड़ आदमी का ध्यान उसकी तरफ गया. उसकी चाल थोड़ी धीमी हुई. वह कुछ पल रुका और फिर जल्दी से निकल गया.

4 मिनट के बाद वायलिन वादक को पहला सिक्का मिला. एक महिला ने उसकी टोपी में सिक्का डाला और बिना रुके चली गई.

6 मिनट बाद एक युवक दीवार के सहारे टिककर उसे सुनता रहा. फिर उसने अपनी घड़ी पर नजर डाली और वो भी वहां से निकल गया.

कुल 10 मिनट बाद एक 3 साल का बच्चा वहां रुक गया. पर जल्दी में दिख रही उसकी मां उसे खींचते हुए जबरदस्ती वहां से ले गयी. मां के साथ लगभग घिसटते हुए चल रहा वो बच्चा मुड़-मुड़कर उस वायलिन वादक को देख रहा था. ऐसा ही कई बच्चों ने किया और हर बच्चे के पेरेंट्स उसे घसीटते हुए ही वहां से ले गये.

लगभग 45 मिनट बाद तक केवल 6 लोग ही वहां रुके थे और उन्होंने भी कुछ देर ही उसे सुना. लगभग 20 लोगों ने सिक्का उछाला पर वे बगैर रुके अपनी सामान्य चाल में चलते रहे. वो सब बिजी थे. उस आदमी को कुल मिलकर 32 डॉलर मिले.

60 मिनट यानी 1 घंटे बाद उसने अपना वादन बंद किया. फिर से शांति छा गयी. पर इस बदलाव पर भी कोई ध्यान नहीं दे सका.

किसी ने वादक की तारीफ तक नहीं की. उसकी मेहनत पर विचार रखना तक किसी ने सही नहीं समझा. हैरानी तो तब ज्यादा बढ़ गयी जब किसी ने उसे पहचाना तक नहीं.

वह वादक था विश्व के महान वायलिन वादकों में से एक जोशुआ बेल

जोशुआ अपनी वायलिन से इतिहास की सबसे कठिन धुन बजा रहे थे. महज 48 घंटे पहले ही उन्होंने बोस्टन शहर में एक प्रस्तुति दी थी, जहां एंट्री टिकट की एवरेज cost लगभग 100 डॉलर थी.

यह एक सच्ची घटना थी.

वास्तव में जोशुआ बेल एक फेमस न्यूज़ पेपर द्वारा sensitivity और understanding को लेकर किये गए एक सोशल experiment का हिस्सा बने थे.

इस experiment का उद्देश्य यह पता लगाना था कि किसी पब्लिक place पर हम ख़ास चीज़ों और बातों पर कितना ध्यान देते हैं? क्या हम सुन्दरता या अच्छाई की सराहना करते हैं?

क्या हम आम अवसरों पर प्रतिभा की पहचान कर पाते हैं?

experiment का रिजल्ट यह निकल कर सामने आया कि जब दुनिया का एक श्रेष्ठ वादक एक बेहतरीन साज़ से history की सबसे कठिन धुनों में से एक बजा रहा था, तब अगर हमारे पास इतना समय नहीं था कि कुछ पल रूककर उसे सुन सके तो सोचिये हम लाइफ़ में कितनी सारी अन्य खुबसूरत बातों या फीलिंग से वंचित हो गये हैं और लगातार कुछ मिस कर रहें हैं.

क्या ऐसा करना ठीक है?

क्या ऐसी सोच के साथ चलते रहना सही है?

क्या कोई भटकाव है जिसे हमें समय रहते ठीक कर लेना चाहिए?

क्या लाइफ़ तेजी से भागती है या केवल हम?

क्या कल इतनी खुबसूरत धुन दोबारा सुनने को मिलेगी?

क्या हम कुछ अच्छा मिस तो नहीं कर जाते हैं?


अब आप कुछ पल आराम से बैठिये और सोचिये. वायलिन आज भी बज रहा है. आपने सुना क्या?


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