Nov 11, 2018

दुनिया के 95% लोग कुछ देर के लिए भी Comfortably क्यों नहीं बैठ पाते?




योग का meaning है मिलना यानी addition. मतलब हर चीज़ आपके अनुभव में एक हो गई.

आज जो आदमी बन के आपके सामने खड़ा है, वह कल मिट्टी हो जाएगा. आप भी उसी Process से गुजरेंगे. हर किसी को ऐसा ही होना होगा. धरती के अंश को अपनी मां के स्वरुप में मिल ही जाना होगा. 

फ़िर नयी shape, नया सृजन होगा. ये series ही चलती है. चलेगी. अगर आप आज ही ये समझ लें तो ये योग कहलाता है और आप योगी. लाइफ़ के last step पर यानी अंत में ये समझ आये तो इसे अंतिम संस्कार कहा जाता है. यह अनुभूति आपको अभी हो जाए तो आप विस्तृत हो गए. जुड़ गए अपनी जड़ों से. पहचान गए ख़ुद को. नहीं तो अंत तक आपको इसका wait करना है.

वास्तव में हम सभी ब्रह्मांड के जैविक process के semi – प्रोडक्ट्स हैं. सबके भले के लिए ये जानना बड़ी अहम सोच है. इसे जोड़ने की जरुरत है. ये ही योग है. सहयोग है. जीवनयोग है. unityness है.

अगर आप यह नहीं जान पा रहें हैं कि सहज रुप से जीवन के एक अंश के रूप में कैसे रहा जाए तो ये एक विकृत जीवन जीने का संकेत है. 

आज कम से कम 95% लोगों को यह दिक्कत आ रही है कि वह सहजता से या comfortably एक जगह नहीं बैठ पाते. उन्हें हर वक्त कुछ न कुछ करने के लिए चाहिए होता है. उनको ख़ुद को busy रखना है.

क्यों? क्योंकि हर आदमी को लगता है कि उसका vision क्लियर है कि वह क्या करना चाहता है? लेकिन ऐसा रियलिटी में नहीं होता. ये सच नहीं है. असली कहानी ये है कि वे लोग मजबूर हैं क्योंकि कुछ किए बिना वो अब रह ही नहीं सकते. उनको लगता है कि अगर वे एक जगह बिना कुछ किए कुछ देर बैठे रह गए तो वे पागल हो जाएंगे या पागल करार दे दिए जायेंगे. ये जो इतनी fast लाइफ़ चल रही है. ये ख़ुशी से नहीं चल रही. ये डर से, मज़बूरी से चल रही है कि कहीं हम पीछे ना रह जाएं? सवाल है किससे पीछे? कितना पीछे? किस एंगल से पीछे? लाइफ़ तो ख़ुद ही इतना relaxing process है. फ़िर ये आपको किसी के आगे-पीछे क्यों दौड़ायेगी? सोचिये? ख़ुद को थोड़ा समय दीजिए. आराम कीजिये.

और योग यहां आपके लिए सही दिशा तय करने में मदद करता है. ये आपको सचेतन या अचेतन process के बारे में जागरूक करता है. सचेतना ok है लेकिन अचेतना मजबूर बना डालती है. 

अभी ज्यादातर लोग अचेतना को फॉलो करते हुए दौड़ – भाग में व्यस्त हैं. वो सही या गलत चुनने के logical प्लेटफोर्म पर ट्रेन को पकड़ने की try कर रहें हैं. सचेतना कहती है कि इस सिलेक्शन थ्योरी को मत पकड़ो. अस्तित्व के साथ एक हो जाओ. योग भी ये ही बताने की कोशिश करता है. आप जहां हो वहां सचेतन रहो, अचेतन नहीं. फ़िर सब काम ठीक से हो सकेंगे. शांति से भी, सजगता से भी, विस्तार से भी और productive तरीके से भी.

योग आपको मिलाता है. मिलन का मतलब है कि अब आप कुछ चुन नहीं रहे हैं. चुनने का option ख़त्म. अब हर चीज आपके साथ यहीं मौजूद है, सचेतन रूप से. आप present में हो. actively इन present. अब बेवजह की भागदौड़ से मुक्ति है. परसेप्शन जीरो हो गए है. आप लाइफ़ के साथ, नेचर के साथ, ख़ुद के साथ आराम से हो. ये ही तो करना था.

लाइफ़ का पूरा process या उसकी quality इस बात पर depend नहीं करती कि आप क्या करते हैं और क्या नहीं करते? या आपके पास क्या है और क्या नहीं है? बल्कि ये इस बात पर depend करती है कि आपने लाइफ़ को कैसे संभाला है? सचेतन रूप से या अचेतन रूप से.

अगर आपने अपनी लाइफ को वैसे ही accept कर लिया है, जैसी वो है तो आपकी उससे दोस्ती और मजबूत होने जा रही है. अब आपको नए आयाम ख़ुद ब ख़ुद मिलेंगे. देखते रहिए.

क्रेडिट : hindi.speakingtree.in


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