Nov 15, 2018

धरती पर घुटने टेकने और उसे चूमने के हज़ारों तरीके हैं.






धरती पर लाइफ़ आई तो जीव आए. जीवों के बायोलॉजिकल डेवलपमेंट की मदद से कुछ सालों बाद आदमी भी आ गया. 

आदमी समझदार था क्योंकि उसे लगा कि सिर्फ़ वो ही सोच सकता है और बाकी जीवों से ज्यादा प्रैक्टिकल और सक्सेसफुल हो सकता है, दुनिया में + या – करने की ताकत उसी में है. सही भी रहा. आज भी सही है. सभी आदमी सही हो गए. नेचर ने चुप्पी साध ली. आगे देखते हैं कि क्या शानदार करने वाला है आदमी.

फ़िलहाल कुछ बेहतरीन थॉट्स जो समय समय पर अनेक महान लोगों ने दुनिया के साथ शेयर किए और सबकी लाइफ़ में अच्छे बदलाव लाए.

आइए. एक नज़र उन थॉट्स पर.


झूठी लड़ाई लड़ने में कोई सच्ची वीरता नहीं होती.

इंसान का करैक्टर उसके विचारों से बनता है.

लोग और बेहतर तरीके से काम तब और जल्दी करते हैं जब उन्हें पता होता हैं कि लक्ष्य क्या और क्यों है?

लम्बे समय तक नाराज़ रहने के लिए ज़िन्दगी बहुत छोटी है.

मैं एक बच्चे के रूप में बस कुछ सवाल पूछता हूँ. 

लक्ष्‍मी को पाना है तो या तो आपको उल्‍लू बनना होगा या फ़िर भगवान विष्‍णु. क्योंकि माता लक्ष्‍मी केवल इन्‍हीं दोनों के पास ही रहती है. 1 की वो सवारी करती हैं और 1 की सेवा. जितने % तक उल्‍लू या विष्‍णु के गुण आप के भीतर होंगे, उतने ही % तक माँ लक्ष्‍मी आप के पास रहेगी. ये सिंपल मैथमेटिक्स है.

नाम में क्या रखा है? अगर हम गुलाब के फूल को किसी और नाम से पुकारें तो भी वो वैसी ही खुशबू देगा जैसी उसकी खुशबू हैं. है के नहीं?


खाली बर्तन ही सबसे सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं. फ़िर चाहे वो घर के अंदर हों या बाहर की दुनिया में. उस संगीत का आनंद लीजिए.

एक मूर्ख व्यक्ति अपने आपको बुद्धिमान समझता है, लेकिन एक बुद्धिमान व्यक्ति खुद को मूर्ख समझता है.

पढ़ने के विरुद्ध जो तर्क देता है, समझो, वह कितने अच्छे से पढ़ा हुआ है.

धीमे स्वर में बोलो, अगर प्यार के विषय में बोल रहे हो तो.

सबसे बढ़कर ये ज़रूरी होता है कि हम खुद से अपने आप में सही रहे.

जब हम जन्म लेते हैं तब हम रोते हैं कि क्योंकि हम मूर्खों के इस विशाल मंच पर आ गए. फ्रेश मूर्ख.

जैसा कर सकते हो, वैसा ही बोलो और जैसा बोलो तो वैसा ही करो. बी ओरिजिनल.

हमारे जीवन में कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता,  बस उसे हमारी सोच बनाती है.

ये हम अच्छे से जानते हैं कि हम क्या हैं, लेकिन यह नहीं कि हम क्या हो सकते हैं?

जब इंसान के जीवन में दुःख आता है तो वह अकेले नहीं आता, बल्कि पूरी फ़ौज के साथ आता है.

संदेह यानी डाउट हमेशा कसूरवार को सताता रहता है.

किसी काम को करने के लिए थोड़ी-बहुत गलतियाँ भी करिए. जो कुछ भी नहीं करेगा, वो कोई गलती ही नहीं करेगा. इट्स 100% प्योर फेलियर. क्या ये सच नहीं है? गलती ना करना असफ़ल हो जाने जैसा है. आप क्या होना चाहेंगे? सक्सेसफुल या फेलियर?

जब एक पिता अपने बेटे को कुछ देता है तो दोनों हँसते हैं, लेकिन जब एक बेटा अपने पिता को कुछ देता है तो दोनों रोते हैं. 

समय के साथ जिससे हम अक्सर डरने लगते हैं उससे हम नफरत करने लगते हैं.

वे लोग प्रसन्न हैं जो अपने ऊपर लगे कलंक को जानकर उस कलंक को मिटाने में लग जाते हैं.

1 मिनट देर से आने से अच्छा है कि आप 3 घंटे पहले आ जाएं.

इंसान का रोना दुःख की गहराई को कम कर देता है.

जिस तरीके से तुम अपने विचारों में महान रहे हो, उसी तरह अपने कर्मों में भी महान बनो.

"एक पुरानी कहावत है" जो हम सब पर भी लागू होती है. जो खेल आप खेल ही नहीं रहे हैं, उसमें आप हार ही नहीं सकते.


इंसान के लिए मौत एक भयानक चीज है. मगर एकमात्र सच भी तो ये ही है.

जिस तरह मछलियाँ पानी में रहती हैं और अपनी भूख मिटने के लिए छोटी मछलियों को खा जाती हैं, उसी तरह इंसान जमीन पर रहता है और बड़े लोग छोटे लोगों को खा जाते हैं.

आप सभी लोगों की सुनें लेकिन अपनी बात कुछ ही लोगों से कहें.


प्यार करने वाले अंतिम रूप से कहीं मिलते नहीं. वे हमेशा एक दूसरे में ही रहते हैं.

धरती पर घुटने टेकने और उसे चूमने के हज़ारों तरीके हैं.

दुखी मत हो, जो कुछ भी तुमने खोया है, वह दोबारा लौटकर तुम्हारे पास ही आ जायेगा, किसी न किसी दूसरे रूप में.

आप जिस किसी से भी प्यार करते हो, उसकी ख़ूबसूरती को अपने काम में भी झलकने दो.


हर एक इंसान किसी ना किसी एक खास काम के लिए बनाया गया है और उस काम को भी करने की इच्छा उसके मन के अन्दर भर दी गयी है. ये अद्भुत है.

यदि आप हर रगड़ से चिढ़ते हो तो आपको पॉलिश कैसे किया जाएगा?

ईश्वर द्वारा जो कुछ भी सुन्दर, अच्छा, और खुबसूरत बनाया गया है वह केवल उसी के लिए होता है जो उन्हें करीब से देख पाता है.

आप दुनियादारी से इतने प्रभावित किसलिए हो? जबकि जानते हो कि सोने की खान तो आपके भीतर ही मौजूद है?

जब भी कोई एक गलीचे को पीटता है तो वह प्रहार गलीचा के खिलाफ़ नहीं होता है. वह प्रहार तो केवल धूल के खिलाफ़ होता है.

अगर हम हर वो चीज कर दें, जो हम सोचते हैं कि हम नहीं कर सकते हैं, तो सचमुच हम खुद को आश्चर्यचकित कर देंगे.

सच में प्रकृति अदभुत है. बेईमान तो केवल मनुष्य है.

मैं असफल नहीं हुआ हूँ, बल्कि मैंने बस 10,000 ऐसे तरीके खोज लिए हैं जो काम नहीं करते हैं.

व्यस्त होने का मतलब हकीकत में हमेशा काम करना ही नहीं होता.

अपनी जिंदगी में मैंने एक भी दिन काम नहीं किया. यह सब तो मनोरंजक खेल था.

आप जो भी हैं वो आपके काम में दिखेगा. आपको अलग से कुछ बताने की जरुरत नहीं.

प्रकृति जल्दबाजी नहीं करती, फिर भी सारी चीजें पूरी हो जाती हैं.

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