Nov 22, 2018

मुझे नहीं पता कि ख़ुदा का घर कहां है?





आज सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव जी का जन्मदिन है. करोड़ों लोगों के लिए गुरु नानक जयंती बड़ा पर्व है. इस दिन को प्रकाश पर्व के तौर पर भी मनाया जाता है.

गुरु नानक से जुड़ी बातें बेहद रोचक और मानवता के संदेश से भरपूर हैं.

एक संवाद से जानने का प्रयास करते हैं. आइए.

गुरु नानक जी के दो शिष्य थे. एक का नाम था “बाला” जो हिंदू था और दूसरा था “मरदाना” जो मुस्लिम था. मरदाना ने गुरु जी से कहा कि मुझे मक्का जाना है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब तक एक मुसलमान मक्का नहीं जाता, तब तक वह सच्चा मुसलमान नहीं कहलाता है.

गुरु जी यह बात सुनी तो वह उसे लेकर मक्का गए. गुरु जी जैसे ही मक्का पहुंचे तो वह थक गए थे. वहां पर हाजियों के लिए एक आरामगाह बनी हुई थी. आराम करने के लिए गुरु जी मक्का की तरफ पैर करके लेट गए.

आरामगाह में हाजियों की सेवा करने वाले एक शख्स जियोन को यह देखकर बहुत गुस्सा आया और वह गुरु जी से बोला कि आप कैसे आदमी हैं? आपको दिखता नहीं है कि वहां पर मक्का- मदीना है और आप उसी तरफ पैर करके लेट गए हो.

तब गुरु जी ने कहा कि जियोन, तुम गुस्सा मत करो. मैं बहुत थका हुआ हूं और मुझे बस आराम चाहिए. मैं भी तुम्हारी तरह ख़ुदा को मानता हूं. तभी तो मैं यहां आया हूं. मुझे नहीं पता कि ख़ुदा का घर कहां है? पर तुम्हें तो पता है ना. तो तुम ही मेरे पांव उस तरफ कर दो, जहां तुम्हें ठीक लगे.

जैसे ही जियोन ने गुरु जी का पांव दूसरी तरफ किया तो देखा मक्का भी उसी और चला गया. यह देखकर जियोन की हालत पतली हो गयी. वो समझ गया कि यह शख्स कोई आम आदमी नहीं है, बल्कि ख़ुदा का ही बंदा है. जियोन ने तुरंत ही गुरु जी से माफी मांग ली.

गुरुजी उसे कहते हैं “ऐ ख़ुदा के बंदे”, खुदा दिशाओं में राज नहीं करते. वह तो दिलों में राज करते हैं. अच्छे कर्म करो और ख़ुदा को दिल में रखो. यही खुदा का सच्चा सदका है. ख़ुदा की सच्ची सेवा है.


No comments: