Nov 25, 2018

देश को उत्साह, प्रेरणा और गौरव दिलाने का शुक्रिया मैरीकॉम.






संघर्ष की आग में जब कोई तपता है, तब जाकर वह मैरीकॉम बनता है.

भारत के नार्थ-इस्ट स्टेट मणिपुर के एक बेहद ही गरीब परिवार में 1 मार्च 1983 को मैरीकॉम का जन्म हुआ.

उसने जिंदगी के दर्द से हार नहीं मानी. वो लड़ी अपने लिए. अपने सपने लिए. दिन-रात खेतों में काम किया. बचपन से जो जूनून था, उसे दिल में पाले रखा और अब उसी ने छठी दफ़ा वर्ल्ड वीमेन बॉक्सिंग चैम्पियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया है.

गृहस्थ जीवन के साथ अपने सपनों के सफ़र को नया आकार देकर हर भारतीय का गौरव बन गयी हैं ऍम. सी. मैरीकॉम.  

मैरीकॉम ने 48 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में यूक्रेन की हना ओखोता को 5-0 से हरा डाला.

वर्ल्ड चैम्पियनशिप में 6 गोल्ड जीतने वाली वो अब दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बन गई हैं.

इस छठी जीत के साथ ही उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में कुल 8वां पदक भी अपने नाम कर लिया है.

मैरीकॉम अब आयरलैंड की कैटी टेलर को पछाड़कर सबसे अधिक बार वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली दुनिया की पहली वीमेन बॉक्सर हैं.

मैरीकॉम (48 kg केटेगरी) को 10वीं A.I.B.A. वर्ल्ड चैम्पियनशिप का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज भी चुना गया है.

चैंपियन बनने के बाद मैरीकॉम की आंखों में खुशी और गर्व के आंसू थे. उन्होंने अपनी इस रिकॉर्ड जीत को देश को समर्पित किया है.

मैरीकॉम की निगाहें अब 2020 के टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफाई करने के लिए होने वाले टूर्नामेंट पर लगी हुई हैं.


देश को उत्साह, प्रेरणा और गौरव दिलाने का शुक्रिया मैरीकॉम.

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