Nov 6, 2018

हैप्पी दिवाली. जगमगाते रहिए.





दिवाली खुशियों के जगमगाने की, अपने प्रिय राजा के वापिस आ जाने की, अच्छाई की बुराई पर जीत के लिए मुस्कुराने की, रोशनी के दीप जलाने की और अपनी संस्कृति, अपना धर्म निभाने की अनूठी, अनोखी और अद्भुत संवेदनाओं से भरी गाथा है.

ये एक पर्व ही नहीं, एक पूरी चरित्र कथा है जो हमें कितने ही शानदार पलों, नायकों, खलनायकों, समय की गति और मानवीय पहलुओं से रूबरू कराती है.

यह प्रकाश का त्यौहार है. पूरे विश्व के लिए एक बेमिसाल  मार्गदर्शक है दिवाली.

और इससे जुड़े प्रजातंत्र के अनमोल नायक श्रीराम. श्रीराम यानी धर्म - संस्कृति, नैतिकता - राष्ट्रीयता और सुझबुझ –वीरता के 6 चक्रों का नाम - श्रीराम.

एक मनुष्य से श्रेष्ठतम मनुष्य बनने का साक्षात उदाहरण श्रीराम. आप नर से नारायण कैसे बनें - यह उनके जीवन की सीख है. श्रीराम ने ही आसुरी शक्तियों का नाश करके अंतत धर्म की रक्षा की थी.

श्रीराम क्यों हैं मार्गदर्शक? कौन से गुण उन्हें पूजनीय बना देते हैं.

माता-पिता के आदेश को सबसे ऊपर रखना.


सभी से हंसते-मुस्कुराते मिलने की कला.


दूसरे लोगों को यथा-संभव सम्मान देना.


रिश्तों को सहेज कर रखने की कला.


मानव कल्याण की दूरगामी सोच.


आपस में भाईचारे को बनाए रखने का गुण.


नैतिकता, ईमानदारी और सही न्याय करने का गुण.


दूसरे लोगों के विचारों के प्रति आदर का भाव.


लोगों के नामों को याद रखना और उन्हें उनके नाम से आदर-पूर्वक पुकारना.


सबकी बातों को ध्यान और संयम से सुनना.


लोगों के प्रति सच्ची निष्ठा रखना.


वफ़ादारी और दोस्ती का सम्मान करना.


अपने विचार मनवाने के लिए तर्क और विवाद का सहारा लेने से परहेज करना.


सामने वाले की नज़र से भी चीज़ों को देखने का प्रयास करना.


अपनी गलती को जल्दी से जल्दी स्वीकार कर लेना.


आदर्शों व सिद्धांत का पालन करने में हर कठिनाई को सहन करने के लिए हमेशा तैयार रहना.



सच तो ये ही है कि श्रीराम के गुण और आदर्श कभी खत्म न होने वाला धन हैं और आज के दौर में इन गुणों की ज़रूरत पहले के समय से कहीं ज्यादा बढ़ गयी है. 


सोचिएगा ज़रूर.

अपने मन के अंदर भी दीये जलाइए. सबके लिए अच्छा सोचिए. अच्छा करिए.

हैप्पी दिवाली. जगमगाते रहिए.

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