Dec 4, 2018

1-2-3 और ये क्या? हैंडपंप से ठंडा-ठंडा पानी निकलने लगा।





1 बार 1 आदमी रेगिस्तान में भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी-बहुत चीजें थीं, वो जल्दी ही ख़त्म हो गयीं। पिछले 2 दिनों से वो पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था। वह मन ही मन जान चुका था कि अगले कुछ घंटों में अगर उसे कहीं से पानी नहीं मिला तो उसकी मौत पक्की है।

पर कहीं न कहीं उसे ईश्वर पर यकीन था कि कुछ चमत्कार ज़रूर होगा और उसे पानी मिल ही जाएगा।
तभी उसे एक झोपड़ी दिखाई दी। उसे अपनी आँखों यकीन नहीं हुआ।

पहले भी वह मृगतृष्णा के कारण धोखा खा चुका था। लेकिन बेचारे के पास यकीन करने के सिवा कोई और चारा भी नहीं था। ये उसकी आखिरी उम्मीद थी।

वह अपनी बची-खुची ताकत से झोपड़ी की तरफ रेंगने लगा। जैसे-जैसे करीब पहुँचता, उसकी उम्मीद बढती जाती और इस बार भाग्य भी उसके साथ था। सचमुच वहां एक झोपड़ी थी।

पर ये क्या? झोपड़ी तो वीरान पड़ी थी। ऐसा लगता था जैसे सालों से वहां कोई ना आया हो। फिर भी पानी की उम्मीद में आदमी झोपड़ी के अन्दर घुसा।

अन्दर का नजारा देख उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ। वहां एक हैंडपंप लगा था। आदमी एक नयी एनर्जी से भर गया। पानी की 1-1 बूंद के लिए तरसता वह तेजी से हैंडपंप चलाने लगा। लेकिंग पंप तो कब का सूख चुका था। आदमी निराश हो गया। उसे लगा कि अब उसे मरने से कोई नहीं बचा सकता। और वो निढ़ाल हो कर गिर पड़ा।

तभी उसे झोपड़ी के छत से बंधी पानी से भरी एक बोतल दिखाई दी। वह किसी तरह उसकी तरफ लपका। वह उसे खोल कर पीने ही वाला था कि तभी उसे बोतल से चिपका एक कागज़ दिखाई दिया। उस पर लिखा था- इस पानी का प्रयोग हैंडपंप चलाने के लिए करो और वापस बोतल भर कर रखना मत भूलना।

ये एक अजीब सी स्थिति थी। आदमी को समझ नहीं आ रहा था कि वो पानी पिए या उसे हैंडपंप में डालकर उसे चालू करे।

उसके मन में खूब सवाल उठने लगे कि अगर पानी डालने पर भी पंप नहीं चला और यहाँ लिखी बात झूठी हुई और क्या पता जमीन के नीचे का पानी भी सूख चुका हो। लेकिन क्या पता पंप चल ही पड़े? क्या पता यहाँ लिखी बात सच हो? वह समझ नहीं पा रहा था कि क्या करे?

फिर कुछ सोचने के बाद उसने बोतल खोली और कांपते हाथों से पानी पंप में डालने लगा। पानी डालकर उसने भगवान् से प्रार्थना की और पंप चलाने लगा।

1-2-3 और ये क्या? हैंडपंप से ठंडा-ठंडा पानी निकलने लगा।

वो पानी किसी अमृत से कम नहीं था। आदमी ने जी भर कर पानी पिया। उसकी जान में जान आई। दिमाग काम करने लगा। उसने बोतल में फिर से पानी भर दिया और उसे छत से बांध दिया। जब वो ऐसा कर रहा था, तभी उसे अपने सामने एक और शीशे की बोतल दिखी। उसने उसे खोला तो उसमे एक पेंसिल और एक नक्शा पड़ा हुआ था, जिसमे रेगिस्तान से निकलने का रास्ता था।

आदमी ने रास्ता याद कर लिया और नक़्शे वाली बोतल को वापस वहीँ पर रख दिया। इसके बाद वो अपनी बोतलों में पानी भर कर वहां से जाने लगा।

कुछ आगे बढ़ कर उसने एक बार पीछे मुड़ कर देखा। फिर कुछ सोच कर वापस उस झोपड़ी में गया और पानी से भरी बोतल पर चिपके कागज़ को उतार कर उस पर कुछ लिखने लगा।
उसने लिखा- मेरा यकीन कीजिए, ये काम करता है।


सार
बुरी से बुरी स्थिति में भी अपनी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। ये कहानी हमें ये भी बताती है कि कुछ बहुत बड़ा पाने से पहले हमें अपनी ओर से भी कुछ देना होता है। जैसे उस आदमी ने नल चलाने के लिए मौजूद पूरा पानी पंप में डाल दिया।

ये कहानी “किसी चीज़ की कितनी वैल्यू हो सकती है”, इस पर भी बात करती है। कुछ ऐसी चीजें जिसकी हमारी नजर में वैल्यू है। किसी के लिए ये ज्ञान हो सकता है। तो किसी के लिए प्रेम। और किसी और के लिए पैसा।

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