Dec 12, 2018

"अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दो।"







लाइफ कई बार गज़ब का सेंस ऑफ़ ह्यूमर ख़ुद ही create कर देती है और आप फ़िर हसे बिना रह ही नहीं सकते। कुछ ऐसा ही हुआ एक पति-पत्नी के वार्तालाप के दौरान। आप भी देखिए कि एक लैंग्वेज की जादूगरी से क्या से क्या हो सकता है?

बच्चे के पैदा होने के 5 साल बाद एक दिन अचानक माँ को एहसास हुआ कि यह बच्चा हमारा नहीं लगता, क्यों न इसका DNA Test करवाया जाए।

शाम को उसका पति थका हारा ड्यूटी से घर वापस आया तो उसने अपना संदेह व्यक्त किया कि देखो यह बच्चा बड़ा विचित्र व्यवहार करता है। इसका चलना, खाना, पीना और सोना, इत्यादि हमारे से बहुत भिन्न है। मुझे नहीं लगता कि यह बच्चा हमारा है। चलो इसका DNA Test करवाते हैं।

पति: डार्लिंग! तुम्हें यह बात आज अचानक 5 साल बाद क्यों याद आ गई? यह तो तुम मुझसे 5 साल पहले भी पूछ सकती थी...!

पत्नी (आश्चर्यचकित होते हुए) : क्या मतलब है तुम्हारा? तुम कहना क्या चाहते हो?

पति : याद करो अस्पताल की वह पहली रात, जब हमारा बच्चा पैदा हुआ था और कुछ ही देर बाद उसने पैम्पर खराब कर दिया था। तब तुम्हीं ने तो मुझसे कहा था कि "अजी सुनिए! प्लीज़ बेबी को चेंज तो कर दो।"

तब मैंने बड़ा हैरान होकर तुम्हारी ओर देखा था तो तुमने ही कहा था कि "तुम्हारे प्यार की खातिर मैंने 9 महीने इस बच्चे को अपनी कोख में रखा है और अब जबकि मैं हिल भी नहीं सकती तो क्या आप यह छोटा सा काम भी नहीं कर सकते."..???

तब मैं अपने बच्चे को उठाकर दूसरे वार्ड में गया था, वहाँ अपने गंदे बच्चे को चेंज करके दूसरे साफ बच्चे को उठाकर तुम्हारे पास लाकर सुला दिया था।

सार: 
जैसा क्वेश्चन, वैसा आंसर. जैसा इनपुट, वैसा आउटपुट.

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