Dec 25, 2018

ये सब बिना पैसे के माल कैसे उठा लेते हैं?





एक छोटे से क़स्बे में एक आदमी कपड़े सीने यानि टेलरिंग की दुकान चलाता था. उसके पास उस काम को करने का हुनर भी था और साथ ही साथ लोगों के साथ उसका व्यवहार भी काफ़ी अच्छा था. 

अपनी स्किल और विल इन दोनों के सहारे उसका काम ठीक चल जाता था और परिवार की गुजर-बसर अच्छी चल रही थी.

पर वक़्त तो वक़्त है. कब कहाँ क्या सिखाना चाहें, ये तो उसकी मर्ज़ी.

एक दिन ज्यादा काम आने की वजह से वो दुकान पर थोड़ा लेट हो गया. काम खत्म कर जब वो देर रात अपने घर की ओर निकला तो रास्ते में उसे कुछ चोर मिल गए. टेलर ने उनसे पूछा कि साहब इतनी रात को आप सब कहां जा रहे हैं?

अब चोर तो चोर हैं. Highly प्रैक्टिकल, Sharp माइंड, Clever पीपल्स. दूसरे को आगे कर अपना काम निकाल फ़रार.

उनमें से एक मासूम चोर बोला : अरे भाई, हम तो छोटे-मोटे सौदागर है और कुछ माल खरीदने जा रहे हैं. यह सुनकर टेलर ने हैरान होते हुए कहा कि इतनी रात को तुम किससे और कौन सा माल खरीदने जा रहे हो? माल कैश में लेते हो या फिर उधार?  

उस चोर ने कहा – भाई, पैसे तो हम देते ही नहीं कभी.

यह सुनते ही टेलर को और ज्यादा हैरानी हुई. उसे लगा कि मैं पूरे दिन इतना पसीना बहा कर काम करता हूं तब जाकर कुछ मिलता है और ये सब बिना पैसे के माल कैसे उठा लेते हैं?  

कुछ देर बाद टेलर ने कहा कि आप तो कोई बड़ा काम करने वाले मालूम पड़ते है. वो इम्प्रेस हो गया. बोला -ऐसा करिये, मुझे भी अपने साथ ले चलिये. मैं भी टेलरिंग का काम करता करता बोर होने लगा हूं. आप वाला काम सीख कर शायद मेरा कुछ और भला हो जाये.

चोरों ने कहा – ठीक है, तुम भी हमारे साथ चलो. टेलर साथ उनके साथ निकल पड़ा.

रास्ते में उनसे पूछा: मुझे इस काम के बारे में कोई नॉलेज तो है नहीं. ऐसा करिये कि आप मुझे समझा दीजिए कि ये काम कैसे करना होता है?

एक चोर ने समझाना स्टार्ट किया.

ऐसा करो कि जो भी हम तुम्हें बताने वाले है, तुम उसे एक कागज पर अच्छी तरह लिख लो. उसका रट्टा मार लो ताकि कभी भूलो नहीं.

टेलर ने कहा – ठीक है.

चोर ने लिखवाया – ”सबसे पहले किसी के घर के पिछवाड़े चुपचाप सेंध लगाना. फ़िर दबें पाँव घर में घुस जाना. वहां जो कुछ भी मिले, वो सब बटोर लेना. ना तो मकान मालिक से कुछ पूछना और ना ही उसे कोई पैसे देना. अंत में चुपचाप सब कुछ समेटकर अपने घर ले आना“. 

टेलर ने सबकुछ एक कागज पर लिखकर उसे अपनी दाहिने हाथ वाली जेब में रख लिया.

दूसरे क़स्बे में पहुँच कर चोरों ने टेलर से कहा – भाई, अब तुम्हारा सही समय आ गया है. तुम किसी भी घर में घुस जाओ और हाँ कागज पर लिखी सभी बातों का ध्यान ज़रूर रखना. बेस्ट ऑफ़ लक.

टेलर दबे पाँव चुपचाप एक घर के पिछवाड़े से अंदर गया. घर के सभी लोग सो रहे थे. वो घर का सामान बटोरने में लग गया. चूक हुई और उसके हाथ से एक बर्तन फ़र्श पर गिर गया. तेज आवाज़ हुई. घर के सभी लोग जाग गये. चोर-चोर चिल्लाते हुए सभी ने टेलर की धुलाई करनी शुरू कर दी.

अब जब पिटाई जोरों पर थी तो टेलर भी रुआंसा होकर जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि मेरी बात तो सुनो, इस कागज में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा था. पड़ोसी भी आ गये. जब तक सबको बात समझ आती, टेलर साहब बेहोश हो चुके थे और सौदागर फ़रार. 

खैर, अगली सुबह जब सारी कहानी सामने आई तो टेलर महोदय इज्ज़त के साथ अपने घर वापस लौट पाए. 

लेकिन अब उन्होंने कान पकड़ लिए थे कि आज में ही जीऊंगा और जो मेरे पास है, उससे ख़ुश रहूंगा और अपने काम और सही दिशा में आगे बढ़ाऊंगा. रास्ते चलते सलाह देने वालों से भी दूरी बना के चलूंगा. वो अपनी जगह ठीक होंगे. पर मेरे लिए क्या सही है? ये मुझे ही सोचना चाहिये.


प्यारे दोस्तों, 
हमारी लाइफ़ भी कुछ ऐसी ही है. हर इंसान के पास अपना एक ख़ास नजरिया, हुनर और टैलेंट होता है. 

हैरान होइये, Respect कीजिए लेकिन किसी की Copy मत बनिए. आप किसी की Copy नहीं हैं. आप यूनिक हैं. आधार कार्ड की तरह.

आप जो बन सकते हैं, वो हर कोई नहीं बन सकता और जो दूसरे बन सकते हैं, ज़रूरी नहीं आप भी वैसे ही बनकर सक्सेसफुल बनें.  

नतीजा इस कहानी की तरह कोई ना कोई बर्तन गिरता रहता है और शोर चलता रहता है. कागज़ पर लिखी हर बात, हर एक के लिए, एक जैसी नहीं हुआ करती. सबकी अपनी कहानी होती है. सबकी सबसे अलग. ये ही हमारे यूनिवर्स की ब्यूटी है. हर बच्चे की ब्यूटी.

इसलिए हर माता-पिता को, टीचर्स को बच्चों के अंदर की प्रतिभा की पहचान कर उन्हें उस क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए मोटीवेट करते रहना चाहिये. इससे ना केवल वो तेज़ी से आगे बढ़ेंगे, बल्कि अपनी पसंदीदा फील्ड में सही सक्सेस भी हासिल कर पायेंगे. साथ ही साथ अपनी लाइफ़ में ख़ुश रहने का मुकाम पाने में भी ज़रूर कामयाब होंगे. आपका और सबका नाम रौशन करने में भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं, बिना किसी दबाव के, बिना इंसानियत को खोये हुए.

है के नहीं?  
प्रैक्टिकल होकर सोचिये तो ज़रा.

इतनी पापुलेशन में, इतने कम्पटीशन में, इतने स्ट्रेस में आप अपने बच्चे को उसके सपने पूरा करने, उसका नेचुरल हुनर तराशने के मौके दे रहें हैं या केवल अपने सपने उनके माध्यम से पूरा करने की फ़िराक में हैं.

सवाल छोटा है लेकिन आंसर देने के लिए जिंदगी छोटी पड़ेगी. आज नहीं तो कल. सोचियेगा ज़रूर.
(कहानी के सभी पात्र काल्पनिक हैं.)


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