Dec 11, 2018

क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है।




एक राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिये उम्मीद लगाये बैठा था, पर पुत्र नहीं हुआ। उसके सलाहकारों ने तांत्रिकों से सहयोग की बात बताई। सुझाव मिला कि किसी बच्चे की बलि दे दी जाये तो पुत्र प्राप्ति हो जायेगी। राजा ने राज्य में ये बात फैलाई कि जो अपना बच्चा देगा, उसे बहुत सारे पैसे दिये जायेंगे

एक परिवार में कई बच्चें थे, गरीबी भी थीएक ऐसा बच्चा भी था जो ईश्वर पर आस्था रखता था और सन्तों के संग सत्संग में ज्यादा समय देता था।
परिवार को लगा कि इसे  राजा को दे दिया जाये क्योंकि ये कुछ काम भी नही करता है और शायद हमारे किसी काम का भी नही। इससे राजा ख़ुश होकर बहुत सारा धन भी देगा। ऐसा ही किया गया और उस बच्चे को बलि के लिए राजा को दे दिया गया।

राजा के तात्रिकों द्वारा बच्चे की बलि की तैयारी हो गई राजा को भी बुलाया गया और बच्चे से पूछा गया कि तुम्हारी आखिरी इच्छा क्या है? क्योंकि आज तुम्हारे जीवन का अन्तिम दिन है।

बच्चे ने कहा कि ठीक है। ऐसा कीजिए कि मेरे लिये परात भर मिट्टी मंगवा दीजिए। मिट्टी आ गयी। बच्चे ने मिट्टी के 4 ढ़ेर बनाये 1-1 करके मिट्टी से बनाए 3 ढ़ेरों को तोड़ दिया और चौथे ढ़ेर के सामने अपने दोनों हाथ जोड़कर बैठ गया और कहा कि अब जो करना है, आप कीजिए।

ये सब देखकर तॉत्रिक डर गये बोले कि ये तुमने क्या किया है, पहले बताओ? 
राजा ने भी पूछा तो बच्चे ने कहा कि पहली ढ़ेरी मेरे माता पिता की है। मेरी रक्षा करना उनका कर्तब्य था पर उन्होनें पैसे के लिये मुझे बेच दिया, इसलिए मैंने ये ढ़ेरी तोड़ी। दूसरी मेरे सगे-सम्बन्धियों की। उन्होंने भी मेरे माता-पिता को नहीं समझाया, इसलिए मैंने दूसरी ढ़ेरी भी तोड़ी। तीसरा नंबर आपका है राजा जी। क्योंकि राज्य के सभी इंसानों की रक्षा करना राजा का ही काम होता है, लेकिन राजा ही मेरी बलि देना चाह रहा है तो ये ढ़ेरी भी मैंने तोड़ दी। अब सिर्फ मेरे ईश्वर पर ही मुझे भरोसा है, इसलिए ये 1 ढ़ेरी मैने छोड़ दी है।

राजा ने मन ही मन चिंतन किया और सोचा कि पता नहीं बच्चे की बलि से बाद भी मुझे पुत्र प्राप्त हो या न हो, क्यों ना इस बच्चे को ही अपना पुत्र बना ले? इतना समझदार और ईश्वर भक्त बच्चा है। इससे अच्छा बच्चा और कहाँ मिलेगा? राजा ने उस बच्चे को ही अपना बेटा बना लिया और राजकुमार घोषित कर दिया।

सार: जो ईश्वर पर यकीन रखते हैंउनका जीवन तकलीफों में भी संवर सकता है। भाग्य कब दुर्भाग्य से सौभाग्य में बदल जाए, उसके अलावा और कौन जान सकता है? और कौन कर सकता है?

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