Jan 20, 2018

अनोखा बंधन


जीवन में आस्था रखो, परमात्मा पर आस्था रखो. तुम्हे जो भी मिला है उसका आनंद लो. परमात्मा को हर बात के लिए धन्यवाद देते रहो. कृतज्ञ हो जाओ इस तरह कि हर साधारण घट्ना भी पवित्र हो उठे. जीवन की हर बात, हर चीज़ साधारण से पवित्र हो जाये.

जब आप इस तरह के नजरिये से चीजों को देखना शुरु कर देतें हैं तो जीवन से बुरी चीजें अलविदा होनी शुरू हो जातीं हैं और आप असीम शांति और सौभाग्य से भर उठते हैं. ये ही जीवन की प्राप्ति है, बाकि सब मृत्यु.

जीवन की छोटी-छोटी बातों का उत्सव मनाते चलिए. नाचते- गाते चलिए, मुस्कुराते चलिए.

ईश्वर ने हमें गंभीर होने के लिए नहीं बल्कि हास्यबोध के साथ हँसते –खेलते हुए रहने के लिए ये जीवन दिया है.

गंभीरता तो मृत्यु का आहवान है. हास्य जीने की निशानी.

प्रार्थना और दिव्यता के साथ हँसते – गाते आगे बढ़ते रहिये. ये सब दोबारा नहीं मिलने वाला.

गंभीरता एक रोग है, एक बीमारी है ग़लतफहमी है कि हम समझदार बन रहे हैं. ये आपको विनम्र नहीं बना रही, ये आपको कठोर बना रही है. फिर आप झुक नहीं पाओगे, जज बनते जाओगे. हर बात को तराजू में रख कर तोलने लगोगे और जिंदगी भर ये करते करते जब मौत आएगी तो सोचोगे की मैं जिया कहाँ ?

अभी वक़्त है, समझने का कि तुम हँसना सिख लो. अभी आसान है, बाद में दिक्कत होगी. चाह के भी हास्य पैदा नहीं कर पाओगे. इसलिए हंस पड़ो. इसकी वजह मत खोजो, बस हंस पड़ो.

मत भूलो कि न कोई पशु हँसता है न ही कोई पक्षी. नेचर ने तुम्हे गिफ्ट दिया है तुम हंस सको और तुम्हे रोने-धोने से ही फुर्सत नहीं है. क्या करोगे इतना रोके, चिल्लाके, गंभीर होके. आओ जी लो थोड़ा. कल ये हँसी बड़ी मिस करोगे फिर.

तुम महान हो, अनोखे हो और तुम्हें किसी से तुलना करने की ज़रूरत नहीं. तुम्हें और बाकी सभी को बिलकुल अलग- अलग और स्पेशल बनाया है ख़ुदा ने. क्यों परेशान हो ?

आओ मिलकर इस दुनिया को इतना खुबसूरत बना दें की हमें बनाने वाले ख़ुदा का भी मन करे कि वो भी हमारे बीच आये और खिलखिलाए. बस ये ही जिंदगी हमसे चाहती है.

चलो अब देखों आसपास की घटनाओं को और उसमें से अपना हास्यबोध निकाल लो. अब तुम्हे कोई परेशानी नहीं बची. अब तुम ओरिजिनल हो गए. अब आराम से जी सकोगे. बिना डरे, बिना मरे.

21 दिन रोज प्रैक्टिस करो हँसने की और तुम हँसना सीख लोगे. क्योंकि ये भी करना इतना मुश्किल नही.

टिप ऑफ़ द डे: हँस लो दोस्तों. इट्स फ्री. और जीवन अपने आप में एक अनोखा बंधन है. ये तुम्हें हँसने से दूर नहीं जाने देगा.


ये पोस्ट आपको कैसी लगी ?  कृपया अपने कमेंट्स व सुझाव ज़रूर दें ताकि हम आपके लिए और अच्छा कंटेंट प्रेजेंट कर सकें.
थैंक यू फॉर वाचिंग दिस ब्लॉग. स्टे कनेक्टेड. स्टे पॉजिटिव. स्टे हैप्पी.

जिंदगी की महक



डेल कार्नेगी – एक ऐसा नाम जो एक उम्र के बाद हर किसी को लाइफ़ में जरुर याद आता है. और ये हो भी क्यों ना ? उन्होंने काम ही ऐसा किया है.

जब भी हम उदास, परेशान, निराश या डिप्रेस हो जाते हैं अपनी रूटीन लाइफ़ में तो कई बार कुछ समझ नहीं आता. ना किसी दोस्त की सलाह, ना पेरेंट्स की एडवाइस और ना ही कोई धार्मिक ज्ञान. हम हाँ- हाँ कह कर सामने वाले को ये तो जताने की कोशिश करते हैं कि ‘ठीक हूँ मैं एंड थैंक्स’ कि आपने इतना सोचा मेरे लिए लेकिन सच ये होता है कि तब भी हमारा मन कह रह होता है कि क्या करूँ ऐसा की सब ठीक हो जाये. होता है न ऐसा आपके साथ भी कभी कभी ?

जब कुछ समझ ना आये तो डेल याद आते हैं. उनकी लिखी व्याहारिक क़िताब “ चिंता छोड़ो, सुख से जियो” के प्रैक्टिकल फंडे हमारी बड़ी मदद करते हैं, हमें निराशा से बाहर निकालने में. यकीन ना आये तो एक बार जरुरत के समय पढ़ कर देखिएगा. थोड़ा समय खुद के साथ और इस क़िताब के साथ बिताइये, फिर देखिये आपको अपने साथ साथ दूसरों की पाजिटिविटी भी नज़र आनी शुरू हो जाएगी और जिस पल ये हुआ, आप खुद को दुनिया के सबसे शानदार इंसान के रूप में पसंद करना शुरू कर देंगे.

हो सकता है कि अभी आपको ये सब महज़ एक आर्टिकल या मज़ाक लगे पर जिस दिन आपने डेल के प्रैक्टिकल लाइफ विज़न को अपना लिया आप डेल और मुझे थैंक्स जरुर करेंगे. 

अभी उनके लिखे कुछ महत्वपूर्ण कोट्स पर नज़र डालिए. इनमें से कोई एक भी आपकी जिंदगी बदल सकता है. अभी इस पल भी.


1: अक्सर हम लोगों को थकान काम से नहीं बल्कि निराशा, चिंता और असंतोष के कारण होती है.

2: अगर आप अपने जीवन से निराश हो चुके हैं तो दिल से कुछ काम करें, उसी के लिए जिएं और मरें, निश्चित ही आपको वह ख़ुशी मिलेगी, जिसकी आप तलाश कर रहे हैं. ये ही असली जिंदगी की महक है.

3: अगर आप जो कर रहे हो, वो आपको पसंद नहीं है तो आपको कभी सफलता हासिल नहीं होगी.

4: अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही, तो उठो और कुछ करो, बजाय लेटे रहने और चिंता करने के नीद की कमी नहीं, चिंता तुम्हे नुकसान पहुंचाती है.

5: आप उत्साहित होने का नाटक कीजिये और आप उत्साहित हो जायेंगे.

6: आप जो कार्य करने से डरते हैं उसे जरूर कीजिए और निरंतर करते रहिये. डर पर विजय प्राप्त करने का यह सबसे शानदार और तेज तरीका है जो आज तक खोजा गया है.

7: आपके पास क्या है या आप क्या हैं आप कहाँ हैं या आप क्या कर रहे हैं इन बातों से आप खुश या मायूस नहीं होते, बल्कि आप किस बारे में सोंच रहे हैं उससे होते हैं.

8: अगर आप डर पर काबू पाना चाहते हैं, तो घर में बैठकर इसके बारे में मत सोचें. बाहर जायें और व्यस्त रहें.

9: उनसे मत डरिये जो बहस करते हैं, बल्कि उनसे डरिये जो छल करते हैं.

10: एक मिनट की सफलता बरसों की असफलता की कीमत चुका देती है.

11: कभी भी इस बात की चिंता ना करो कि लोग क्या सोचेंगे बल्कि अपने समय को इस तरह लगाओ कि प्राप्त होने के बाद लोग आपकी ही प्रशंसा करें.

12: कार्य ही सफलता की बुनियाद है.

13: किसी दूसरे को खुशी देने में खुशी पाना ही सारी कलाओं का सार होता है.

14: किसी बहस का सबसे अधिक लाभ उठाने का एक ही तरीका है कि उसे टाल दें।

15: कोई भी मूर्ख आलोचना, निंदा, और शिकायत कर सकता है – और अधिकांश मूर्ख यही करते हैं.

16: खुद के लिए और अपनी मौजूदा स्थिति के लिए अफ़सोस करना,  ना केवल  ऊर्जा की बर्बादी है बल्कि शायद ये सबसे बुरी आदत है जो आपके अन्दर हो सकती है.

17: खुशियां किसी भी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, यह हमारे मानसिक नजरिये से नियंत्रित होती है.

18: जब भाग्य आपको नींबू दे, तो आप उसका शरबत बना लीजिये.

19: जो चीज चाहो वह चीज मिल जाए वही सफलता है और जो मिल गई उसे चाहना ही प्रसन्नता है.

20: जोखिम उठाइये. पूरी जिंदगी एक जोखिम है सब से आगे निकलने वाला व्यक्ति सामान्यतया वह होता है जो कर्म और दुस्साहस के लिए इच्छुक रहता है.

21: ज्ञान तब तक शक्ति नहीं बनता जब तक इसे कहीं लागू नहीं किया जाए.

22: डर कहीं और नहीं बस आपके दिमाग में होता हैं.

23: तुम्हारे सिवा और कोई भी तुम्हे शांति नहीं दे सकता.

24: दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से अधिकांश दुनिया के उन लोगों द्वारा बनायीं गयी है जो कोशिश में लगे रहे जबकि कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी.

25: पहले आप अपने कठिन काम पूरे कीजिये, आसान काम खुद-बखुद पूरे हो जायेंगे.

26: पहले स्वयं से पूछिए: सबसे बुरा क्या हो सकता है? फिर उसे स्वीकार करने के लिए तैयार रहिये और उसके बाद उस बुरे को कम बुरा करने के लिए प्रयास करें.

27: बार-बार असफल होने पर भी उत्साह ना खोना ही सफलता है.

28: यदि तुम जो तुम कर रहे हो उसमे विश्वास रखते हो तो किसी भी चीज को अपने काम को रोकने मत दो. दुनिया के ज्यादातर बेहेतरीन काम असंभव लगने के बावजूद किये गए हैं ज़रूरी है की काम पूरा हो.

29: याद रखें खुशी इस पर निर्भर नहीं करती कि आप क्या हो या आपके पास क्या है. यह पूरी तरह, इस बात पर निर्भर करती है कि आप क्या सोचते हैं.

30: सफल आदमी अपनी गलतियों से लाभ उठाने के लिए फिर से, एक अलग तरह से कोशिश करते हैं.

31: सफलता का एक आसान फार्मूला है, आप अपना सर्वोत्तम दीजिये और हो सकता है लोग उसे पसंद कर लें.

32: सफलता के लिए जरूरी होता है कि आप क्या चाहते हो लेकिन खुशी के लिए जरूरी होता है कि आप क्या देते हो.

33: हम सब में संभावनाएं भरी पड़ी हैं, हम उनके बारे में जानते नहीं हैं, हम वो चीजें कर सकते हैं जो हम सपने में भी करने की नहीं सोच सकते.



टिप ऑफ़ द डे : दूसरों को पसंद करना सीखिए, आप खुद ब खुद सबकी पसंद हो जायेंगे.

Jan 19, 2018

टीचर स्टूडेंट्स रिलेशनशिप रियली मैटर्स.




अब तक हम जितना भी पढ़े – लिखें हैं फिर चाहे वो शिक्षा हमने घर पर ली, स्कूल में, कॉलेज में या कही और भी. उसकी वैल्यू तभी पता चल पाती है  जब हम अपनी बातों को दूसरों के आगे पेश करते हैं. 

हम क्या सोचते हैं ? किसी बात का मतलब किस तरह निकालते हैं ?  कुछ पॉजिटिव देख पातें हैं या सिर्फ़ नेगेटिव बातों में पूरा दिन निकाल देते हैं ? कोई भी आब्जर्वर जो हमें देख या सुन रहा हो, फौरन पहचान सकता है की हमने कैसी शिक्षा ली है या हमें कैसी शिक्षा दी गयी है. हम सभी एक पहचान हैं, एक सिंबल हैं उस परवरिश के जो अब तक हमें मिली है. मतलब ये कि हमें जैसा पाला-पोसा गया होगा और जैसे हमें टीचर्स मिले होंगे, जैसा हमें इन्होंने बताया और समझाया होगा, लगभग वैसे ही हम दुनिया के आगे खड़े हैं. 

हम अपने घरेलु माहौल, पढाई के माहौल और और अपनी सीखने की लगन के हिसाब से बड़े हुए और अब सबके सामने हैं. याद रहे की हम वो ही बनेंगे, जो हम बनना चाहते होंगे. जब से हम पैदा हुए, सबने हमें खूब प्यार दिया, खूब दुलार दिया, खूब सारी अच्छी बातें भी बताई होंगी. सबने हमें खूब समझाया होगा की ये अच्छा है और ये बुरा. हमें जो सही लगा, हमनें ले लिया और जो नहीं लगा होगा, वो झटक दिया होगा. 

सबके साथ ये ही है सर्किल घूमता है. पर इस सर्किल में सबसे शानदार और जांबाज पर्सनालिटी होते हैं हमारे टीचर्स. इन्हें प्यार और सम्मान से हम गुरु जी भी कहते हैं. गुरु की भूमिका बड़ी अहम है हमारी जिंदगी बनाने और बिगाड़ने में. याद रखिये कि एक अच्छा गुरु वो ही बन सकता है जो पहले एक अच्छा स्टूडेंट रहा हो अन्यथा हम क्या बनेंगे ये ऊपरवाला भी नहीं बता सकता. 

एक गुरु या टीचर बनना हर किसी के बस की बात नहीं है. ये करना इतना आसान  नहीं जितना दिखाई देता है. दूर से देखने में लगता है की क्या करना है ? सिर्फ किताबी ज्ञान ही तो बांटना है. पर ऐसा नहीं है. एक बच्चा, जिसे पता नहीं क्या सीखना है ? कैसे सीखना है ? किस से सीखना है ? कहाँ सीखना है ? कब सीखना है ? क्यों सीखना है ? इन सब सवालों के जवाब सिर्फ़ और सिर्फ़ एक आदमी के पास ही हो सकतें हैं और वो है हमारे टीचर्स. अब आप समझ गए होंगे की हम कैसे बनेंगे ? ......जी हां. जैसे हमारे टीचर्स होंगे या जैसे वो हमें बनाना चाहेंगे. टीचर स्टूडेंट्स रिलेशनशिप रियली मैटर्स.

आइये देखें कुछ महान लोगों द्वारा लिखी गयी बातें जो उन्होंने टीचर्स के बारें में लिखी हैं. इन बातों को पढ़कर ही पता लगता है की वास्तव में टीचर्स, गुरु या शिक्षक हमारे जीवन के वो खुबसूरत फूल होते हैं जिनकी वजह से हम पूरी जिंदगी महक सकते हैं या बहक सकते हैं या चहक भी सकते हैं. जो जीना टीचर्स सिखा जातें हैं, वो तमाम उम्र तजुर्बे के रूप में हमारे साथ रहता है और हमारा मार्गदर्शन करता है.

रोबर्ट फ्रोस्ट- दो तरह के शिक्षक होते हैं: वो जो आपको इतना भयभीत कर देते हैं कि आप हिल ना सकें, और वो जो आपको पीछे से आपको से थोडा सा थपथपा देते हैं और आप आसमान छू लेते हैं.

अरस्तु- जन्म देने वालों से अच्छी शिक्षा देने वालों को अधिक सम्मान दिया जाना चाहिए; क्योंकि उन्होंने तो बस जन्म दिया है, पर उन्होंने जीना सीखाया है.

निकोलस स्पार्क्स- वो आपको प्रेरित करते हैं, आपका मनोरंजन करते हैं, और आप कुछ ना जानते हुए भी बहुत कुछ सीख जाते हैं.

अब्दुल कलाम- अगर किसी देश को भ्रष्टाचार – मुक्त और सुन्दर-मन वाले लोगों का देश बनाना है तो , मेरा दृढ़तापूर्वक मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं. पिता, माता और गुरु.

बिल गेट्स (१)- यदि आपको लगता है कि आपका शिक्षक सख्त है तो तब तक इंतज़ार करिए जब तक आपको बॉस नहीं मिल जाता है.

बिल गेट्स (२)- टेक्नोलॉजी सिर्फ एक उपकरण है. बच्चों को एक साथ करने और प्रेरित करने के लिए, शिक्षक सबसे महत्त्वपूर्ण है.

एलेक्जेंडर महान- मैं जीने के लिए अपने पिता का ऋणी हूँ , पर अच्छे से जीने के लिए अपने गुरु का.

डैन राथर- सपने की शुरआत उस शिक्षक के साथ होती है जो आपमें यकीन करता है, जो आपको खींचता है, धक्का देता है और आपको अगले पठार तक ले जाता है, कभी-कभार  “सच” नामक तेज छड़ी से ढकेलते हुए.

लिली टॉमलिन- मैं उस अध्यापक को पसंद करता हूँ जो घर ले जाने को गृह कार्य के अलावा कुछ और सोचने को देते हैं.

मरिया मोंटेसरी- एक शिक्षक के लिए सफलता का सबसे बड़ा संकेत "यह कह पाना है कि बच्चे अब ऐसे काम कर रहे हैं जैसे कि मेरा कोई अस्तित्व ही ना रहा हो".

हेलेन केलर- अंधे व्यक्ति को किसी शिक्षक की नहीं बल्कि अपने जैसे ही किसी व्यक्ति की ज़रुरत होती है.
गिल्बर्ट के. चेस्टरटन- एक शिक्षक जो सिद्धांतवादी नहीं है वो महज़ एक ऐसा शिक्षक है जो पढ़ा नहीं रहा है.
बेरेनैस एबोट- ऐसे कई अध्यापक होते हैं जो आपको बर्वाद कर सकते हैं. इससे पहले कि आपको पता चले आप अपने इस या उस अध्यापक की धुंधली प्रति बन सकते हैं. आपको खुद अपने दम पर विकसित होना है.
डोनाल्ड नोर्मन- तो एक अच्छा शिक्षक क्या करता है ? तनाव पैदा करता है- लेकिन सही मात्र में.
मैगी गैलेघर- सभी कठिन कार्यों में , एक जो सबसे कठिन है वो है एक अच्छा शिक्षक बनना.


टिप ऑफ़ द डे : शिक्षक मतलब हम और हमारी पहचान  

Jan 18, 2018

सेल्फी फोटो क्लिक


कहानी 1: दो पक्के दोस्त रमेश और सुरेश : नदी किनारे घुमने गए. सुरेश ने कहा – यार रमेश, थोड़ा नदी के बीच में चलते हैं फिर सेल्फी लेंगे और सोशल मीडिया पर शेयर करेंगे. दुनिया भी देखेगी हमारी दोस्ती की तस्वीरें. रमेश बोला – ओके भाई. दोनों आगे गए. सेल्फी ले ही रहे थे की पानी का तेज बहाव आया. दोनों बह गए और फिर कभी नहीं दिखाई दिए दुनिया को.
कहानी 2: दो पक्की सहेलियां उषा और प्रिया. कॉलेज में घुमने का प्रोग्राम बना. पूरी क्लास टूर पर निकल पड़ी. हिल स्टेशन पर खुबसूरत लोकेशन थी. एक ऊँची चट्टान के कोने पर जा पहुंची दोनों. सेल्फी स्टिक से सेल्फी लेने की ख्वाहिश थी. सेल्फी ले ही रहीं थी की अचानक पैर फ़िसले और फिर वो दोनों किसी को जिन्दा नहीं मिलीं. 

दोनों कहानियों में पात्रों के नाम काल्पनिक हैं लेकिन घटनाएं ऐसी ही होतीं हैं. सेल्फी का क्रेज बुरा नहीं परन्तु लाइफ़ ही ख़त्म करदे तो फिर किस काम का. अधिकतर बार देखा गया है की ख़ुद को ख़ुश या खुबसूरत या फिर साहसी दिखाने के चक्कर में यूथ अपनी जान से हाथ गवां बैठता है. सोचिये उनके परिवार वालों का क्या हाल होता होगा. इसलिए टेक्नोलॉजी को एन्जॉय कीजिये लेकिन उसके लिए पागलपन की हद तक मत जाइये. दुनिया को कुछ दिखाने के खेल में अपने और अपने परिवार के सपने मत तोड़िए. किसी हादसे में हुई मौत के कई पहलू हो सकते है. लेकिन सेल्फी डेथ - ये सिर्फ़ शौक में हल्की लापरवाही का नतीजा हैं। सेल्फी लेते वक़्त आपको समझदारी दिखानी ही होगी.

आइये जाने क्या है सेल्फी :
सेल्फी स्मार्टफोन की ख़ोज है जिसमें कैमरे का रोल बड़ा हो जाता है. अगर आपके पास स्मार्टफोन है तभी आप सेल्फी ले सकते हैं. दुनियाभर में रोज लगभग 96 मिलियन सेल्फी क्लिक होती हैं। 

सेल्फी यानी खुद की फोटो खींचना। 2013 में 'सेल्फी', ऑक्सफोर्ड वर्ड ऑफ द इयर बना जो इसके क्रेज को बखूबी दर्शाता है. स्मार्टफोन के इस आधुनिक काल में सेल्फी सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. 

अलग – अलग सर्वे बताते हैं कि आज के युवा जो पूरे दिन में एवरेज 8 से 12 घंटे अपने स्मार्टफोन पर बिताते हैं, वे पूरे दिन में 2-3 नहीं बल्कि 12-17 सेल्फी फोटो क्लिक करते हैं. कमाल है ना. 

आपको जानकर हैरानी होगी की ज्यादा सेल्फी लेना अब शौक नहीं, ये एक गंभीर बीमारी है जिसको  “सेल्फीसाइटिस” के नाम से पहचाना जाने लगा है. मनोचिकित्सकों के मुताबिक ये एक ऐसी कंडीशन होती है, जिसमें आदमी सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर अगर पोस्ट नहीं करे तो उसे बहुत बेचैनी होने लगती है। शुरू में सब कह देंगे की हमें ऐसी कोई बीमारी नहीं परन्तु इस आदत के शिकार लोग सार्वजनिक रूप से तो बहुत सोशल और अपडेटेड दिखते हैं, खूब फ़ोटो शेयर करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे उनके अंदर का आत्मविश्वास ख़त्म होने लगता है. चूँकि वो चाहते हैं की सोशल मीडिया का उनका सर्किल उनको लाइक और सपोर्ट करे पर कई बार जब ऐसा नहीं हो पता तो वो डिप्रेशन में चले जातें हैं और दवाइयों से भी उनका इलाज़ करना मुश्किल हो जाता है. 

सर्वे बताते हैं कि स्थिति इस हद तक हो गयी है कि कई बार एक पुरुष 24 सेकेंड से ज्यादा समय तक भी अपने मोबाइल फोन या स्मार्टफोन से दूर नहीं रह पाता और महिलाएं अपने मोबाइल से 55 सेकेंड से ज्यादा का गैप बर्दाश्त नहीं कर पाती है. अब आप समझ गए होंगे कि इस बैचनी और उतावलेपन से क्या कुछ हो सकता है? सेल्फी लेनी तो अभी बाकी है मेरे दोस्त. दुनियाभर में सेल्फी के चक्कर में सैकड़ों लोग अपनी जान गँवा चुके हैं. हमें कहाँ रुकना है, ये कोई और नहीं सोचेगा? हमें ही सोचना होगा.

इसके फ़ायदे और नुकसान
फ़ायदे
इसके लिये आपको किसी की जरूरत नहीं. खुद ही अपनी फ़ोटो क्लिक कर सकते हैं.
आप किसी भी एंगल से फ़ोटो क्लिक कर सकते हैं.
आप अगर ग्रुप में दोस्तों के साथ फ़ोटो क्लिक कर रहें हैं तो आप भी उसमें शामिल हो सकते हैं जबकि पहले फ़ोटो खीचने वाला फ़ोटो में नहीं दिख पाता था.
सेल्‍फी लेते समय आप फ़ोटो की क्वालिटी को सेट कर सकते हैं जैसे कि आप कैसे दिख रहे हैं या के आपके पीछे का बैकग्राउंड कैसा है?
आप सोशल मीडिया में अपनी फ़ोटो अपलोड करके उनसे अपनी ख़ुशी तुरंत शेयर कर सकते हैं.

नुकसान -
सेल्फी लेने के चक्कर लोगों अपनी जान गवां देते हैं. लोग कई बार इतने जोशीले हो उठते हैं की भूल जाते हैं की वो सेल्फी किस जगह पर खड़े होकर क्लिक कर रहे हैं.
सेल्फी लेने का शौक कई मानसिक और शारीरिक बीमारियों को पैदा कर सकता है.
अच्छी सेल्फी क्लिक हो, फेस एक्सप्रेशन शानदार आये, इसके लिए कई लोग तो कॉस्मेटिक सर्जरी तक करा लेते हैं.
वर्किंग टाइम में सेल्‍फी लेने से काम की क्वालिटी लगभग ख़त्म हो जाती है और अगर आप नौकरी में हैं तो नौकरी जाने के चांसेस काफी रहते हैं भले ही आप कोई भी बहाना बनाएं या इसे नज़रंदाज़ करें.
आपने सेल्फी ली और सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर पाए तो बेचैनी होने लगती है और ये तब तक रहती है जब तक आपकी सेल्फी लोगों तक न पहुचे. फिर ये हमेशा की आदत बन जाती है और आप मानसिक रूप से अस्वस्थ होने लगते हैं.
सेल्फी और सोशल मीडिया से सेल्फिशनेस भी बढ़ गयी है. सिर्फ़ दिखाने ही काल्पनिक दुनिया में आप सुपर हीरो बन जाना चाहते हैं और असलियत में अपने से जुड़े लोगों से कटना शुरू कर देते हैं. फ़िर जब दुसरे लोग भी आपमें दिलचस्पी लेना बंद कर देते हैं तो आप सनकी और चिडचिडे हो सकते हैं. दुनिया आपको ख़राब लगने लगती है और आप डिप्रेशन का शिकार बड़ी आसानी से बन जाते हैं.
कुछ जानकारों यह भी मानना है कि स्मार्टफोन की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें आदमी की त्वचा को बेहद नुकसान पहुंचा सकती है.

अब क्या करें ?
रोजाना की वनवे लाइफ में मानसिक स्वास्थ्य के लिए मनोरंजन जरूरी है. सेल्फी का क्रेज़ बुरा नहीं लेकिन इससे पहले की ये क्रेज़ जानलेवा शौक में बदल जाये इससे पीछा छुड़वाना ही बेहतर विकल्प है. सेल्फी की 'अति' पर कंट्रोल रखने की जरूरत है. जिंदगी अनमोल है, एक बार ही मिली है. हमारे अपनों से जुड़ी है. इसे सेल्फी जैसे क्रेज से खत्म करना नाइंसाफी ही होगी.



टिप ऑफ़ द डे : करो टेक्नोलॉजी का यूज़ पर मत करो खुद का मिसयूज.


(कहानी के पात्र काल्पनिक हैं.)

Jan 17, 2018

एवरेस्ट पर चढ़ाई


भारत के सबसे बड़े राज्यों में से एक उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर अंबेडकर नगर के शाहजादपुर इलाके में एक मोहल्ले पंडाटोला की रहने वाली अरुणिमा सिन्हा. विमेंस पॉवर की जीती जागती मिसाल अरुणिमा. आज हर कोई उनको जानना चाहता है, उनसे मिलकर उनके हौसले को सलाम करना चाहता है, उन पर गर्व करता है. ऐसा हो भी क्यों ना ? आइये जाने उनकी कहानी. एक ऐसी कहानी जो सिखाती है की मुसीबतों को कैसे मार गिरा के सफलता की नयी इबारत लिखी जाती है. दुर्घटना में अपना एक पैर खो देने के बाद भी वर्ल्ड की सबसे ऊँची पहाड़ी चोटी – एवरेस्ट को फतह करना.

अरुणिमा के बचपन का सपना था कि भारत को वॉलीबॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले. समय के साथ सपना पूरा होने लगा. पढाई भी साथ साथ चलती रही. समाजशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन और लॉ की डिग्री. धीरे-धीरे अरुणिमा राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी के रूप में पहचानी जाने लगी. 

पर एक दिन अचानक 11 अप्रैल, 2011 की एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी ही बदल दी. अरुणिमा ट्रेन में लखनऊ से नई दिल्ली जा रही थीं. बरेली स्टेशन के पास चलती ट्रेन में कुछ लुटेरों ने लूटपाट के दौरान उन्हें गाड़ी से नीचे फेंक दिया. हादसे में अरुणिमा का बायां पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया. पैर कटने के साथ ही  सारे सपने मानों बिख़र गए थे. एक बार को लगा की सब ख़त्म हो गया पर पॉजिटिव सोच वाली अरुणिमा ने हार नहीं मानी. जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए उनका इलाज़ चलता रहा. पर बायां पैर अब जिन्दा नहीं था. डॉक्टरों ने नकली पैर लगा दिया था. अरुणिमा घर वापिस आ गयीं. लेकिन अब सब पहले जैसा नहीं था.

अरुणिमा ने कहा “ जब मैं खेलने घर से बाहर निकलती तो लोग मेरा मज़ाक उड़ाते और मुझ पर हँसते थें. बहुत दुःख होता था तब. परिवार के लोग और मेरे दोस्त मुझे देखकर पूरा दिन रोते थें. मुझे अबला और बेचारी जैसे शब्द भी सुनने पड़ते. पर ये मुझे मंजूर न था. मुझे जीना था, कुछ करना था। फ़िर मैंने मन ही मन कुछ अलग करने की ठान ली. अपनी कमज़ोरी को ताक़त बनाने की ठान ली. मेरी आँखों से आंसू निकले, लेकिन उन्हीं आंसुओं ने मुझे हिम्मत दी की मैं कुछ ऐसा करूँ जो इतिहास बने. 

मेरी शादी हुई और फिर तलाक भी. इतना कुछ होने के बाद मैंने अपने लक्ष्य को पाने के लिए पूरा जोर लगा दिया. मेरा लक्ष्य था - " विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने का. अब तक किसी भी विकलांग ने ये कारनामा नहीं किया था ”.

उसके बाद क्या हुआ ?  अरुणिमा एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बछेंद्री पॉल से मिलने जा पहुंची. पॉल ने पहले तो अरुणिमा की हालत देखते हुए उन्हें आराम करने की सलाह दी लेकिन उनके बुलंद हौसलों के आगे आखिर वो  भी नतमस्तक हो गयीं. अरुणिमा ने पॉल की निगरानी में नेपाल से लेकर लेह, लद्दाख में पर्वतारोहण के गुर सीखे. नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और टाटा स्टील ऑफ एडवेंचर फाउंडेशन से प्रशिक्षण लेने के बाद 1 अप्रैल, 2013 को उन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की. 53 दिनों की बेहद दुश्वार पहाड़ी चढ़ाई के बाद आखिरकार 21 मई को वे एवरेस्ट की चोटी फतह करने वाली विश्व की पहली महिला विकलांग पर्वतारोही बन गईं.

भारत सरकार ने 2015 में उनकी शानदार उपलब्धियों के लिए उन्हें देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणिमा की जीवनी-'बॉर्न एगेन इन द माउंटेन'-का लोकार्पण किया भी किया और देश की महिलाओं से अरुणिमा जैसी विल पॉवर दिखाने का सन्देश भी दिया.

अरुणिमा कहती हैं, ''विकलांगता व्यक्ति की सोच में होती है”. मैं एवरेस्ट की चोटी पर चढ़कर खूब रोई थी लेकिन मेरे आंसू खुशी के थे. दुख को मैंने पीछे छोड़ दिया था और मैं दुनिया की सबसे ऊंची चोटी से जिंदगी को एक नए पॉजिटिव अंदाज में देख रही थी. हर किसी के जीवन में पहाड़ से भी ऊंची कठिनाइयां आती हैं पर जिस दिन वह अपनी कमजोरियों को ताकत बनाना शुरू कर देता है, हर कठिनाई हार मान जाती है.

आपको नमन है अरुणिमा.

टिप ऑफ़ द डे : मन के हारे हार है, मन के जीते जीत.




रिसर्च पेपर कैसे पब्लिश हो ?



The most challenging part of writing a research paper is just getting started. Let’s do only 3 simple steps to start and complete our research paper with fast publication. All good journals provide their publishing formats and other related details on the web. Let’s know how can we write and publish our paper in the desired journal.
The first thing to do: Ask your guide or take internet help regarding journals details in which paper has to be sent.

Step 1: Study the paper formatting issued by the journals like

a.      Journal format style (IEEE/Springer/ACM) etc.
b.      Abstract size and keywords limits ( max. word length)
c.       Tentative pages, type of citation preferred
d.      Information sources allowed (review papers, websites, books,)
e.      Paper writing formatting details (footnotes, subtitles, heading, double-spacing)

Step 2: Specific Topic selection and start working

a.      Get help from guide/ co-researchers to choose the correct topic.
b.      Select the topic well. It must be specific enough to save our time and energy.
c.       Make separate files/folders of information sources to be taken as references.
d.      Make separate files for your results, graphs, tables, comparisons etc.
e.      Give at- least 1.45 hours daily to your research management.

Step 3: Prepare different writing sections after collecting all research information

a.      Introduction part
b.      Literature review
c.       Proposed methodology
d.      Experiments and results analysis
e.      Conclusion and future work



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