Feb 3, 2018

पैरामेडिकल जॉब्स



MBBS में एडमिशन के सपने हर मेडिकल स्टूडेंट देखता है. उसके लिए भरपूर मेहनत भी करता है. कोचिंग भी लेता है. लेकिन लाखों स्टूडेंट्स के पीछे कुछ हजारों Seats ही MBBS की होती हैं. 

ऐसे में कई बार स्टूडेंट्स MBBS एंट्रेंस qualify करने में चूक जाते हैं और फिर उन्हें लगता है कि अब वो क्या करें? फिर वो डिप्रेशन में आ जाते हैं. आप बिलकुल ऐसा न करें. घबराने की कोई जरुरत नहीं हैं. करोड़ों लोग इस दुनिया में रहते हैं और हर कोई MBBS नहीं कर सकता. इसलिए निराश बिलकुल नहीं होना है. 

अगर आप MBBS में एडमिशन नहीं ले पाए तो मेडिकल फील्ड में कई ऐसे प्रोग्राम हैं जिनमे आप अपना अपना शानदार भविष्य बना सकते हैं. पैरामेडिकल साइंस भी उनमे से एक है. 

अगर आप लोगों की सेवा करने के साथ-साथ अपना भविष्य भी बनाना चाहते हैं, तो फिर आप पैरामेडिकल के क्षेत्र में खुद को आजमा सकते हैं.

ये वर्ल्ड का सबसे ज्यादा सेवाभाव का पेशा है और आप हैरान होंगे कि मेडिकल फील्ड का ऐसा कोई एरिया नही, जिसमें पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत न पड़ती हो. पैरामेडिकल स्टाफ के बिना तो MBBS डॉक्टर्स भी काम नहीं कर सकते.

क्या है Paramedical Science?
पैरामेडिकल मेडिकल साइंस का ही एक महत्वपूर्ण फील्ड है. पैरामेडिकल स्टाफ डॉक्टर के अहम असिस्टेंट के रोल में रहते हैं. ये लोग एक्स-रे, फिजियोथेरेपी, अल्ट्रासाउंड, डायग्नोसिस और मेडिकल लैब अटेंडेंट आदि का काम  सँभालते हैं और मरीज के इलाज़ के दौरान पूरी मेडिकल टीम को सपोर्ट करते हैं.

आइये जानें कि क्या है Paramedical Career में ख़ास?
इस फील्ड में आप 10वीं और 12वीं के बाद अपनी रूचि के अनुसार अलग-अलग Courses में एडमिशन ले सकते हैं.

उदाहरण के लिए नर्सिंग, रेडियोलॉजिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट, मल्टीपर्पस हेल्थ वर्कर, मेडिकल लैब असिस्टेंट जैसे कोर्स को कर के आप मानव सेवा के साथ-साथ अच्छी कमाई कर सकते हैं. भारत के अलावा विदेशों में भी पैरामेडिकल स्टाफ़ की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है और हमेशा रहेगी.

1.  कॉर्पोरेट हेल्थ केयर सेंटरों के उभर कर आने से भारत में ही 2020 तक लगभग 12 लाख से ज्यादा पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत होगी. अगर आप मेहनत और लगन से काम करना सीख गए तो कभी बेरोजगार नहीं होंगे.

2.  अगर आप विदेश में सेटल होना चाहते हैं तो भी पैरामेडिकल फील्ड आपको बहुत सहारा देगा. आप हैरान होंगे ये जानकर कि पूरे विश्व में लगभग 25% पैरामेडिकल स्टाफ भारतीय होते हैं. देखिये, कितना Scope है आपके लिए. 2020 तक दुनिया को 43% भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ की जरुरत होगी. यूरोप के देशों में भारतीय पैरामेडिकल स्टाफ को बहुत अहमियत दी जाती है क्योंकि हम भारतीय सेवाभाव में पूरे वर्ल्ड में नंबर 1 होते हैं.


3.  अगर आप इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, तो आप 10वीं या फिर 12वीं या Graduation के बाद पैरामेडिकल के अपने पसंदीदा कोर्स में एडमिशन लेकर अपना करियर संवार सकते हैं. शुरुआती दौर में प्राइवेट सेक्टर में 12-15,000 रूपए से आपकी नौकरी शुरू होती है. सरकारी अस्पतालों में मासिक सैलरी 35-40,000 रुपये तक होती है. विदेश में काम करते हैं तो लगभग 1 लाख रुपये तक की सैलरी से शुरुआत हो सकती है. जैसे-जैसे आपका Experience बढेगा आपकी सैलरी में भी इन्क्रीमेंट होता रहेगा.

4.  इस फील्ड में काम काम करने के लिए आपमें कुछ खासियतें जरुर होनी चाहियें. जैसे कि कम्युनिकेशन स्किल्स, शांत स्वभाव, टाइम मैनेजमेंट, लर्निंग एबिलिटी, पॉजिटिव थिंकिंग आदि.


5.  अधिक जानकारी के लिए पैरामेडिकल कोर्सेस से जुड़े अच्छे संस्थानों की जानकारी प्राप्त करते रहिये. आप केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित संस्था की वेबसाइट paramedicalcouncilofindia.org पर क्लिक करके भी जानकारी पा सकते हैं.



बेस्ट ऑफ़ लक. क्या पता, आप सबकी सेवा करते हुए खुश रहने के लिए ही पैदा हुए हों?

Feb 2, 2018

किड्स एंड TV




पहले और अब के वातावरण, टेक्नोलॉजी, लाइफ-स्टाइल और एजुकेशन में पल-पल होते बदलावों का असर हमारे बच्चों पर होना ही है. ख़ासकर टेक्नोलॉजी में आई क्रांति ने संयुक्त पारिवारिक संस्कारों से एकल स्मार्टफोन संस्कारों की तरफ तेज़ी से कदम बढ़ा दिए हैं.

अब हर चीज़ ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है. आसानी से उपलब्ध हो रही है तो सुविधाएं बढ़ी हैं. आदतों में चेंज आना उसी परिवर्तन का एक हिस्सा माना जा सकता है.

इस चेंज को स्वीकार करने की ज़रूरत है. पर साथ ही साथ इस बात को भी ध्यान में रखना होगा की आप अपनी भावी पीढ़ी को किस रूप में देखना चाहेंगे ? ख़ासकर जब आप बुजुर्ग की केटेगरी में प्रवेश करेंगे.

विषय रोचक है. समय की कमी हो तो बोरिंग भी लग सकता है. लेकिन आप इसे चाह के भी इग्नोर नहीं कर सकते. सोचना आपने है. समझना आपने है. क्योंकि बच्चों को सही आकार उनके माता-पिता से बेहतर और कोई नहीं दे सकता.

फिलहाल जानते हैं की आज से कुछ साल पहले के और आज के किड्स में क्या कॉमन है? और क्या चेंज आ रहे हैं? और आख़िरकार बच्चें होते क्या हैं?

दुनिया का हर बच्चा इनोसेंट है. हर बच्चे की नेचर अलग-अलग है. किसी को कोई काम अच्छा लगता है तो किसी को कोई दूसरा काम. हर बच्चा इस दुनिया को एक अलग नजरिये से देखता है. आप भी उनको ऐसे ही देखना शुरू कीजिये. तुलना करने से कही उसका बचपन तो ख़त्म नहीं हो रहा?

हर बच्चे के शौक अलग-अलग होते हैं. बातों और चीज़ों को एक्सप्रेस करना या चीज़ों का कलेक्शन करना सभी बच्चों को अच्छा लगता है. मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि एक्सप्रेस करना और कलेक्शन करने का स्वभाव बच्चों की मेंटल और इमोशनल स्टेज को शो करता है. ऐसी एक्टिविटी बच्चों की मेंटल एबिलिटी बढाने में भी मददगार होती देखी गयी है.

कुछ बच्चों को कार्टून्स का कलेक्शन करना अच्छा लगता है तो कुछ को इरेज़र-पेंसिलों का, कुछ को रंगीन पन्नियाँ तो कुछ को पुरानी किताबें संभाल कर रखने का शौक होता है. ऐसा बच्चे तीन कारणों से करते हैं- 1. उनको पुरानी चीज़ों से प्यार होता है या 2. वो चीज़ें कभी काम आएँगी या 3. क्रिएटिव बच्चे इन चीज़ों का यूज़ अपनी क्रिएटिविटी के काम में करते हैं.

हर माता-पिता को बच्चों को समझने के लिए उनकी एक्टिविटी पर ध्यान देना जरुरी है. उन्हें जानना होगा कि आखिर बच्चे के दिमाग में उस समय क्या चल रहा है और वह इन चीजों का कलेक्शन क्यों कर रहा है? इससे न केवल बच्चे को अच्छा लगता है, वहीँ आपको भी ये समझने में आसानी हो जाती है कि आखिरकार बच्चे को किस डायरेक्शन में आगे बढ़ाना चाहिए.  

कुछ ऐसे सवाल जिसके आंसर एज ऐ पैरेंट आपको पता होते हैं, पर क्या आप उन आंसर को अप्लाई करते हैं या अवॉयड कर जाते हैं, कारण चाहे जो भी हो.

1.  बच्चे स्कूल से घर वापस आते ही सबसे पहले अपना फैवरेट कार्टून देखना शुरू कर देते हैं. टी.वी देखने के अलावा उन्हें कोई और काम नजर ही नहीं आता. रिसर्च कहती है कि कार्टून देखने से बच्चों की काल्पनिक शक्ति पर बहुत गलत प्रभाव पड़ रहा है. वे रियल लाइफ से दूर होते जा रहे हैं. आपको भी पता है की ये सच है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?

2.  टीवी देखने से आँखों पर ख़राब इफ़ेक्ट भी पड़ता है. कम उम्र में भी बच्चे की आँखों पर चश्मा लग जाता है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


3.  टीवी देखते हुए, खासकर कार्टून देखते हुए खाने-पीने की आदतों में भी बदलाव आ जाता है. अधिकतर कार्टून करेक्टर फ़ास्ट-फ़ूड, बर्गर, समोसे आदि खाते दिखाई देते हैं. अब बच्चें क्या करें? कभी-कभी अलग सा खाना ठीक है, पर एक बार आदत हो गयी तो? कैसा शरीर बनेगा आपके बच्चे का? आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?

4.  लड़ाई, झगडा, हिंसा वाले कार्टून देख कर बच्चे चिडचिडे हो सकते हैं. मारपीट करना शुरू कर देते हैं. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


5.  आप वर्किंग हैं या घर के काम में बेहद बिजी हैं. बच्चे के लिए समय नहीं निकल पा रहे. वो कोई सवाल न करे या शरारत न करे तो आपने उसे कार्टून देखने के लिए टीवी का रिमोट थमा दिया. आपका कोई दोष नहीं लेकिन बच्चे को टीवी की लत लग चुकी है. आप तब क्या उपाय तलाशते हैं?


ऐसा नहीं है कि आपको उपाय पता नहीं हों. आप बेहतर जानते हैं क्योंकि बच्चे के माता-पिता हैं. बस उन उपायों को रियल लाइफ में अपनाइए और अपने बच्चों को भी अपने जैसा रियल बनाइये. फिर जब आप बुजुर्ग होंगे तो आपको किसी बात का दुःख नहीं होगा.

NET 2018



CBSE NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) 2018 की नोटिफिकेशन ज़ारी

1.  पात्रता परीक्षा देने वाले स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी.

2.  CBSE NET (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) 8 जुलाई 2018 को आयोजित की जाएगी.

3.  Online फॉर्म 6 मार्च से 5 अप्रैल तक भर सकतें हैं.

4.  पहले जहां स्टूडेंट्स को 9.30 AM से 4.45 PM तक पेपर देने रुकना पड़ता था और पूरा दिन लग जाता था, वहीँ अब स्टूडेंट्स 1 PM तक फ्री हो जायेंगे. CBSE ने पेपर के पैटर्न में पॉजिटिव बदलाव कर दिया है.

5.  अब स्टूडेंट्स को तीन पेपर की बजाय केवल दो ही पेपर देने होंगे. पहला पेपर 1 घंटे (9.30 AM -10.30 AM) और दूसरा पेपर 2 घंटे (11 AM -1 PM) का होगा.

6.  पहले पेपर में 50 MCQs और दुसरे पेपर में 100 MCQs पूछे जायेंगे. हर सवाल 2 Marks का होगा. यानि पहला पेपर 100 Marks का और दूसरा 200 Marks का. टोटल 300 Marks की परीक्षा. सभी सवाल करने Compulsory होंगे.

7.  पहले पेपर में Reasoning Ability, Comprehension, Divergent Thinking और General Knowledge से जुड़े सवाल पूछे जायेंगे वही दुसरे पेपर में आपके Subject Based सवाल होंगे.

8.  अधिक जानकारी के लिए https://cbsenet.nic.in पर अपडेट लेते रहिये.

9.  Golden Chance है आपके पास. अच्छे से NET Exam की प्लानिंग और तैयारी शुरू करें.



टीम मैजिक की तरफ से आप सभी को Exam के लिए Best of Luck.

म्यूजिक लवर मेंढक




पूरे संसार में मेंढकों की लगभग 5000 प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

मेंढक अपनी स्किन से ही पानी पी सकते हैं.

मेंढक अपनी लम्बाई से 20-30 गुना लम्बी जम्प मार सकते हैं.

नर मेंढक की लम्बाई मादा मेंढक से छोटी होती है.

मेंढक जमीन और पानी दोनों जगहों पर रह सकतें हैं. पानी में इनकी लाइफ ज्यादा रहती है. पर ये समुंदर में नहीं रह सकते.

कुछ केयरिंग नर मेढक अपने बच्चों के व्यस्क होने तक उनको अपनी पीठ पर ही रखते हैं.

“गोल्डन डार्क फ्रॉग” दुनिया का सबसे जहरीला मेंढक माना गया है.

रेगिस्तानी मेंढक कई सालों तक बिना पानी के भी रह सकता है. इट नॉव्स हाऊ टू सर्वाइव.

“क्यूबन ड्‍वार्क” दुनिया का सबसे छोटा मेंढक माना जाता है. ये क्यूबा से बिलोंग करता है.

“गोलियथ” मेंढक दुनिया का सबसे बड़ा मेंढक माना जाता है. ये अफ्रीका से बिलोंग करता है. लगभग 3.5 किलोग्राम वजनी और 30 सेंटीमीटर लम्बा.

अमेजन नदी के पास चिड़िया की शेप वाले और हरे रंग से लाल रंग में बदल जाने वाले मेंढक भी रहते हैं. लाल रंग में बदलना मतलब बारिश आने के संकेत. हर्बल ज्योतिषी होते हैं ये मेंढक.

दो सिंग वाले खुरदरे मेंढक एशिया, ब्राजील और अर्जेंटीना में मिलते हैं.

लाल रंग के सुंदर मेंढक दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में होते हैं और पता है, उनकी आवाज कैसी होती है? - घोड़े की हिनहिनाहट जैसी.

कुछ म्यूजिक लविंग मेंढक भी होते हैं. उनकी आवाज़ ऐसी जैसे कोई बांसुरी बजा रह हो. ये प्यारे मेंढक थाईलैंड में मिलते हैं. कभी वहां जाएँ तो इनसे जरुर मिलिएगा.

मेंढक की औसत लाइफ 10-12 साल की होती है. वैसे कुछ मेंढक 22-35 साल भी जिन्दा रहते देखे गए हैं.

अफ्रीका के कुछ मेंढक बेहद खतरनाक भी होते हैं. इन्हें एरो मेंढक कहा जाता है.

अफ्रीका में ही ब्राई” ब्रांड के मेंढक ऐसे भी पाए गए हैं जो 6 फुट के सांप को भी निगल जायें.


तो ये थे कुछ नेचुरल मेंढक जो अलग- अलग व्यवहार दिखाते हैं.


और हाँ, बारिश में मेंढकों का उछलना-कूदना कभी मिस न करें. क्या पता "मेंढक कल हो ना हो"??

Feb 1, 2018

Birthday Wish



परमात्मा ने हम सबको अलग-अलग जगह पैदा किया. हमें रहने की अलग-अलग परिस्थितियाँ दी. उसका उद्देश्य होगा कि हम अलग-अलग रह कर भी एक दुसरे को समझ सकें और दुनिया को और खुबसूरत बनाएं. 

उस प्रभु ने हमें माँ-बाप दिए, रिश्तेदार दिए और कुछ प्यारे और शानदार दोस्त भी जो वक़्त-बेवक्त हमारे सुख-दुःख में हमारे लिए खडें हो सकें. 

उसने हमें मानवता दी, सौभाग्य दिया कि हम इस यूनिवर्स को देख सकें और सभी जीवों के अलग-अलग होने के कारण जान पाएं और इस विभिन्नता का आनंद उठाएं. 

सबसे शानदार बात ये है कि उस परमपिता ने सबको अलग-अलग खूबियाँ दी हैं. ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम किस दिन जन्मे. मतलब ये कि हम किस दिन पैदा हुए थे उससे हमारे स्वभाव और व्यवहार की ख़ासियत का भी पता चल सकता है. 

सप्ताह में 7 दिन होते हैं और हर दिन अलग होता है, ठीक उसी तरह हर व्यक्ति का स्वभाव भी अलग हो सकता है. हां, ये ज़रूर है की हम अपनी थिंकिंग के द्वारा भी अपने व्यवहार को पॉजिटिव या नेगेटिव बना सकते हैं. 

आइये, देखते हैं कि आप किस दिन पैदा हुए और उस दिन के हिसाब से आपका मूल स्वभाव कैसा हो सकता है.

रविवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप सामान्य तौर पर भाग्यशाली होते हैं. कम बोलते हैं. जल्दबाज़ी में कार्य करना पसंद नहीं करते. कला एवं शिक्षा के क्षेत्र में आगे रहते हैं. धर्म में भी रूचि रखते हैं. रिश्तेदारों और दोस्तों को भी खुश रखतें हैं. नेतृत्व करने की शानदार क्षमता रखतें हैं और बेहतर परिणाम देते हैं.

सोमवार को पैदा हुए व्यक्ति
आप हमेशा चर्चा का विषय बने रहते हैं. बुद्धिमान, कला प्रेमी और बहादुर होते हैं. हंसमुख होते हैं और काफी मीठा बोलते हैं. अक्सर कठिनाइयों से रुबरू होते रहते हैं. आपका मन चंचल रहता है और विचार बदलते रहते हैं. सुख-दुख में एक जैसे रहते हैं। आपकी याददाश्त बहुत तेज होती है. धैर्य की कमी होती है. पारिवारिक जीवन अच्छा नहीं रहता.

मंगलवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप अनुशासनप्रिय, ऊर्जावान, बहादुर, क्रोधी और नए विचारों का समर्थन करने वाले होते हैं. सभी बाधाओं को पार कर हमेशा प्रगति करते हैं. अपनी प्रशंसा सुनने के बहुत इच्छुक रहते हैं. पारिवारिक  जीवन में समय-समय पर दिक्कतों का सामना करते है.

बुधवार को पैदा हुए व्यक्ति –
सब लोग आपको पसंद करते हैं. आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. तेज बुद्धि के मालिक हैं. वाकपटुता में माहिर हैं. माता-पिता और भाई-बहनों से, दोस्तों से बहुत प्यार करते हैं. सभी विपत्तियों को हरा कर बाहर निकल आते हैं. धन कमाने में कामयाब होते हैं.

गुरुवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आप महत्वाकांक्षी हैं. आपका स्वभाव गंभीर होता है. आप किसी भी मुश्किल समय का सामना बड़ी ही समझदारी और साहस के साथ करते हैं। आपके तर्क के आगे किसी का टिक पाना मुश्किल है. आप अपने विचारों और भावनाओं को दूसरे के सामने अच्छी तरह से पेश करते हैं. आपसे लोग जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। आप दोस्ती भी अच्छी संगत वालों से ही करना पसंद करते हैं.

शुक्रवार को पैदा हुए व्यक्ति –
आपकी वाणी में मधुरता और सरलता होती है. आप वाद-विवाद करने वाले से नफरत तक कर बैठते हैं. मनोरंजन के साधनों पर अधिक खर्च करते हैं जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ सकता है. ऐश्वर्य से भरा जीवन आपको अच्छा लगता है. कला के क्षेत्र में अपनी छाप छोड सकते हैं. प्रेम के मामले में एक जगह पर नहीं टिक पाते. स्वभाव में ईर्ष्या अधिक होती है. वैवाहिक जीवन सफल रहता है.

शनिवार को पैदा हुए व्यक्ति –  
आपके जीवन में कितने ही कष्ट क्यों न आएं, अपने हंसमुख स्वभाव के कारण आप विचलित नहीं होते. आप थोड़े आलसी और संकोची हैं. कार्य की योजना तो बनाते हैं लेकिन उसके अनुरूप कार्य नहीं कर पाते. दोस्ती करते वक्त सावधानी बरतें. परिवार वालों और रिश्तेदारों से भी आपको कम ही सुख मिल पाता है.

आप सभी को हैप्पी बर्थडे विश.


Jan 31, 2018

February Born People




February Born People से जुड़ी ख़ास बातें 

अगर आपका जन्म किसी भी साल के फरवरी माह में हुआ है तो आपमें गजब की आकर्षण शक्ति है.

आपका स्वभाव रोमांटिक तो होना ही है. आखिर 'वेलेंटाइन डे' वाला महीना जो है. आपका प्यार बेहद गहरा और पवित्र होता है. छल-कपट से कोसों दूर.

बाहरी ब्यूटी आपको उतनी आकर्षि‍त नहीं करती जितना कोई मासूम सीधा-सच्चा दिल. 

आप अपने दिल की बात सबसे कह देंगे मगर जिससे कहना है उससे कभी खुलकर कह नहीं पाते हैं. कुछ करिए जनाब.

आपमें दो बातें ख़ास हैं. 1. अन्तर्बोध क्षमता यानी इंट्यूशन पावर और 2. ग्रहण करने की क्षमता. यानि ग्रॉस्पिंग पावर.

आप जब खुश होते हैं तो खूब खुश होते हैं इतने कि खुशी आपसे संभाले नहीं संभलती और जब दुखी होते हैं तो खूब दुखी.

आपको समझ पाना बहुत मुश्किल तो नहीं लेकिन इतना आसान भी नहीं. 

आपके दोस्तों की संख्या खूब हो सकती है. हर उम्र के, हर वर्ग के दोस्त आपके ग्रुप में मिल जाएंगे. मगर सच्चा दोस्त मिलना बेहद मुश्किल होता है.

आप अक्सर बैठे-बैठाए धोखा खा जाते हैं क्योंकि हर किसी पर विश्वास कर लेना आपकी कमजोरी है.

बचत करना आपको आता ही नहीं है. फरवरी में जन्म लेने वाले कुछ तो इतने मासूम होते हैं कि थोड़ी-सी भी बचत करेंगे तो सारी दुनिया में हल्ला मचा देंगे.

आप भाग्य से ज्यादा कर्म से आगे बढ़ते हैं.

आपकी ईगो आपको साथी के सामने झुकने से रोकती है. 

आपकी ईमानदारी और स्पष्ट व्यवहार की दुनिया तारीफ करती है. आप हमेशा दूसरों मदद के लिए तत्पर रहते हैं.

फरवरी में जन्में व्यक्ति अधिकतर डॉक्टर, लेखक, शिक्षक, चित्रकार, कंप्यूटर विशेषज्ञ या नेता बनते देखे गए हैं. किसी अलग क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए आपको खासा संघर्ष करना पड़ता है.

आपको योग्यता और प्रतिभा की तुलना में पद और पैसा दोनों अक्सर नहीं मिलता, या कहें कि कुछ देर से मिलता है.

फरवरी माह में जन्मे लोगों में एक विशेष तरह का लुभावना अंदाज होता है। वे वाकपटुता से महफिल को जीत लेते हैं.


सभी फरवरी वालों को सलाह दी जाती है कि आप अपना व्यक्तित्व मजबूत बनाएं. अपने आत्मविश्वास को कभी कमजोर ना पड़ने दें. समय के साथ जरूरी परिवर्तन को स्वीकार करें. पुरानी विचारधारा को त्यागें तो आप जैसा शानदार इंसान कोई नहीं.

हैप्पी बर्थ डे फ़रवरी अवतार.





स्त्रोत:इंटरनेट 

ख़ुशी के पल



क्या जीवन में पैसा ही सबकुछ है?

उदाहरण 1 : जमीन-ज़ायदाद भी खूब है. हँसता-खेलता परिवार है. घर पर बर्तन, सफ़ाई और कपड़े धोने के लिए मेड भी उपलब्ध है. फ्यूचर प्लानिंग भी की हुई है. सब कुछ सही है पर जब सुबह आप नौकरी पर निकलते हैं, तो भी चेहरे से ख़ुशी गायब है? पैसा है तो ख़ुशी के पल कहाँ चले गए? क्या ख़ुशी के पीछे सिर्फ़ पैसे का रोल बड़ा हुआ या कुछ और है जिसे आप मिस कर रहे हैं?

उदाहरण 2 : घर में खाने के लाले पड़ें हुए हैं. पिता जी पर क़र्ज़ का बोझ है. बड़ी बहन की शादी के लिए अच्छा लड़का नहीं मिल पा रहा है. माँ की तबियत भी ठीक नहीं रहती. उधार की सी जिंदगी है पर जब सुबह आप नौकरी पर निकलते हैं, तो चेहरे से ख़ुशी झलकती चलती  है? पैसा नहीं है तो ख़ुशी कैसे आ गयी? क्या ख़ुशी के पीछे सिर्फ़ पैसे का रोल बड़ा हुआ या कुछ और है जिसे आप एन्जॉय कर रहे हैं?

हम में से अधिकांश लोग हर सुबह ऐसी नौकरी पर जाने के लिए तैयार होते हैं जिसमे हमें ख़ुशी नहीं मिलती. कभी हमें काम करना बोरिंग लगता है तो कभी लगता है कि जैसे किसी मजबूरी के चलते हम नौकरी में फंसे हुए हैं? वास्तव में हम महीने के अंत में सैलरी के रूप में मिलने वाले पैसे के लिए काम कर रहे हैं. कभी, हमें उन पैसों की जरूरत होती है, कभी कम पैसों में भी हम काम कर सकते हैं.  

सवाल ये है कि हम क्यों ऐसे काम करते रहते हैं, जो हमारी पसंद नहीं है? इसका जवाब है वो पोपुलर धारणा कि "हम तभी खुश रहेंगे जब हमारे पास पैसा होगा".
हम इस धारणा को हर जगह देखते हैं. हम ये सोचते हुए बड़े होते हैं कि हर महीने अच्छा वेतन मिलने से रिटायरमेंट तक बहुत सारी सेविंग्स हो जाएगी जो हमारे बाद में काम आएगी.

लोगों पर की गयी अनेकों स्टडीज में ये पाया गया है कि पैसे का हमारी खुशियों पर क्षणिक प्रभाव होता है. मतलब ये कि पैसा हमें सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही ख़ुशी देता है.

उदाहरण के लिए  - बिलकुल वैसे ही जैसे आपने आज खरीददारी की. अब आपकी ख़ुशी तभी तक रहेगी जब तक आप कोई नया विज्ञापन देख कर फिर से खरीददारी का नहीं सोचने लगते. और ये अंतहीन सिलसिला थमता नहीं, उल्टा हमें बैचनी और निराशा के कुँए में ले जाता है. पिछली ख़ुशी गायब, अगली ख़ुशी का इंतजार. बीच के लम्बे समय में उदासी, पैसों की चिंता, समाज में आगे रहने को होड़ और फिर एक दिन जलवा ख़त्म.

ये ही विचार हमें नौकरी से चिपकाये रखता है फिर चाहे हम अंदर से बिखरे ही क्यों ना पड़े हों? लोग स्वयं को दुसरें लोगों के बराबर खुश दिखने-दिखाने के चक़्कर में एक दूसरे के साथ ही कॉम्पीटीशन में लग जाते हैं जिससे न केवल उनका आपसी प्रेम और समझ ख़त्म होने लगती है उल्टा ऑफिस और घर के माहौल पर भी नेगेटिव इफ़ेक्ट पड़ने लग जाता है.


तो इसका समाधान क्या है?

आप जिस प्रकार के काम को पसंद करते हैं उस प्रकार के कार्य करने वाली कम्पनी को ज्वाइन करें या अपना खुद का कोई स्टार्ट-अप शुरू करें. स्टार्ट-अप पारम्परिक कम्पनियों की तुलना में, पूरे वर्ल्ड में नए रोजगार के अवसर सृजन करा रहे हैं. भारत में ही बहुत से लोग अपनी सामान्य नौकरी छोड़ कर अपने पसंदीदा सामाजिक या मीडिया के क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं. याद रखें की अपने पसंदीदा काम की शुरुआत करने में कभी देर नहीं होती.

आप या तो जहाँ हैं, उस जगह काम करना पसंद कर लें या फिर अपना काम कर लें. तीसरा कोई उपाय नहीं है खुश रहने का और ध्यान दें की पैसा यहाँ कही चर्चा का विषय नहीं बन रहा है. आपका नजरिया पैसे से कही ज्यादा ज़िम्मेदार है, आपकी ख़ुशी के लिए.

चाहें तो आज ही आजमा के देख लीजिये. नहीं पसंद आयें तो पूरे पैसे वापस. हा- हा.


इन शोर्ट, यदि पैसा नहीं है तो क्या हम संतुष्ट रहते हैं?

यह इस पर निर्भर करता है आप किन कामों में अपना कितना समय बिता रहे हैं. अगर आपके लिए ख़ुशी का मतलब है किताबें पढ़ना, और अपनों के साथ समय बिताना है और आप काम, उससे जुड़े मसलों, और जॉब में अधिक समय बिताते हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि आप खुश नहीं रहते. आप अपनी रूचि का कार्य करना शुरू करें और देखेंगे कि पैसा आप कमाने लगें हैं वो भी ख़ुशी के साथ.


तीन चीज़ें जो खरीदी नहीं जा सकतीं?

एक इंसान कामयाब होने और इसका एहसास करने के लिए उधार पर बड़ी-बड़ी और महंगी चीज़ें खरीद लेता है. यह ऐसा है जैसे कोई अच्छा महसूस करने के लिए नशा करता है. दोनों ही चीज़ें सस्ती लग सकती हैं और शायद असर भी करें, मगर सिर्फ कुछ समय के लिए. वहीं दूसरी तरफ, ये हमें लंबे समय के लिए नुकसान पहुँचा सकती हैं.

ध्यान रखिए, दुनिया की सोच हमें गुमराह करती है. जीवन के साधनों का दिखावा करना बेकार है. सच्चाई तो यह है कि ज़्यादा-से-ज़्यादा चीज़ें बटोरने की चाहत में हम इस हद तक भटक सकते हैं कि ज़िंदगी में ज़्यादा अहमियत रखनेवाली चीज़ें हमें नज़र नहीं आ पातीं.

याद रखिए, कुछ चीज़ें पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं. आखिर ये चीज़ें क्या हैं, आइए देखें.


पहली चीज़ है : परिवार की एकता और सदस्यों में प्यार का भाव

नॉएडा में रहनेवाली, 18 साल की नियारा कहती हैं कि मेरे पापा नौकरी और उससे मिलनेवाले पैसों को बहुत ज़्यादा अहमियत देते हैं. हमारे पास ज़रूरत की हर चीज़ है, बल्कि उससे कहीं ज़्यादा है. फिर भी मेरे पापा कभी घर पर नहीं रहते, वे अकसर काम के सिलसिले में सफर करते रहते हैं. मेरे और मम्मी के लिए उनके पास वक़्त ही नहीं होता. मैं मानती हूँ कि पापा ये सब नौकरी की वजह से करते हैं, लेकिन परिवार के लिए भी उनकी कुछ ज़िम्मेदारियाँ बनती हैं.

ज़रा सोचिए: अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आगे चलकर नियारा के पापा को किस बात का अफसोस रहेगा? धन-दौलत और ऐशो-आराम की चीज़ों को ज़्यादा अहमियत देने की वजह से, क्या बेटी और पत्नी  के साथ उनके रिश्ते पर कोई असर पड़ेगा? पैसों से बढ़कर, परिवार के सदस्यों को उनसे और क्या चाहिए?

सच क्या है? - पैसों से परिवार की एकता खरीदना नामुमकिन है. अगर आप परिवार में एकता हासिल करना चाहते हैं तो ज़रूरी है कि आप उनके साथ समय बिताएं, प्यार और परवाह दिखाएं.


दूसरी चीज़ है : सच्ची सुरक्षा

कानपुर की 23 साल की आशा का कहना है कि मेरी मम्मी हमेशा मुझसे कहती हैं कि मुझे ऐसे लड़के से शादी करनी चाहिए जो बहुत पैसे वाला हो. साथ ही, मुझे कुछ हुनर भी सीखना चाहिए ताकि मुसीबत की घड़ी में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े. मम्मी को हमेशा पैसों की धुन सवार रहती है.

ज़रा सोचिए: भविष्य के बारे में योजनाएँ बनाते वक्‍त, आपको कौन-सी ज़रूरी बातें ध्यान में रखनी चाहिए? कब ये ज़रूरी बातें आपके लिए हद-से-ज़्यादा चिंता करने की वजह बन सकती हैं? सच्ची सुरक्षा के बारे में, आशा की मम्मी को किस तरह का नज़रिया अपनाने की ज़रूरत है?

सच क्या है? - सिर्फ पैसा इकट्ठा करने से हमारा भविष्य सुरक्षित नहीं होता क्योंकि पैसा कभी-भी चुराया जा सकता है. ये बीमारी या मौत को नहीं मिटा सकता. सच्ची सुरक्षा ईश्वर और उसके मकसद को समझने-जानने से ही मिल सकती है.


तीसरी चीज़ है: आत्म-संतोष

हिसार की 25 साल की सोम्या का कहना है कि मेरे माता-पिता ने मेरी परवरिश इस तरह की कि मैं सादा जीवन जी सकूं. कभी-कभी तो हमें थोड़ी चीज़ों में ही गुज़ारा करना पड़ता था. ऐसे माहौल में भी, मैं और मेरा भाई सुरेश हमेशा खुश रहते थे.

ज़रा सोचिए: कम चीज़ों में संतोष पाना क्यों मुश्किल हो सकता है? जब पैसे की बात आती है तो आप परिवार के सामने कैसी मिसाल रखते हैं?

सच क्या है? - ज़िंदगी में पैसा ही सबकुछ नहीं होता. पैसों से हर चीज़ खरीदी नहीं जा सकती. चाहे आदमी के पास बहुत कुछ हो, तो भी उसकी ज़िंदगी उसकी संपत्ति की बदौलत नहीं होती. सही मायनों में जीवन में संतोष तभी मिलेगा, जब हम हर इच्छा को मन की आँखों से नहीं बल्कि ईश्वर के आशीर्वाद के रूप में देखना शुरू कर देंगे.


तो अब आप पैसा या खुशी, किसे चुनेंगे?

एक इंग्लिश बुक “खुद से प्यार करने का रोग” कहती है कि ऐशो-आराम के पीछे भागनेवाले लोग खुश कम और निराश ज़्यादा रहते हैं. पैसा पाने की चाहत रखनेवाले, मानसिक तौर पर तंदुरुस्त नहीं रहते. उन्हें सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे सिरदर्द, गले और पीठ का दर्द. पैसों के पीछे भागने से व्यक्‍ति की हालत बदतर हो जाती है. वो व्यक्ति चिडचिडा, नेगेटिव, स्वार्थी, अकड़-भरा और दगाबाज़ बन जाता है और कोई कितना भी उसे समझाए, वो किसी की भी सुनना बंद कर देता है.”



“बदलती सोच” के 2 उदाहरण

उदाहरण 1 : 1970-1990 के शुरूआती सालों में कॉलेज जाने वाले स्टूडेंट्स से पूछा गया कि उनके कॉलेज जाने की वजह क्या है? ज़्यादातर ने कहा कि वे पढ़ा-लिखा इंसान बनना चाहते हैं या ज़िंदगी में कुछ करना चाहते हैं. सिर्फ गिने-चुने स्टूडेंट्स ने कहा कि उनके कॉलेज जाने की वजह है बहुत-सा पैसा कमाना.

उदाहरण 2 : 1990-2010 में देखें तो ज़्यादातर स्टूडेंट्स ने कॉलेज जाने की सबसे बड़ी वजह बतायी कि वे बहुत-सा पैसा कमाना चाहते हैं. अचानक स्टूडेंट्स की सोच में यह बदलाव क्यों आया? जबकि एक तरफ इन्हीं स्टूडेंट्स में निराशा, आत्महत्या और दूसरी मानसिक समस्याओं से जूझनेवालों की गिनती तेज़ी से बढ़ रही है.


जरा सोचिए? सोचना ज़रूरी है. आपका भी कोई इंतजार कर रहा होगा या आप किसी का? इस वक़्त कहाँ है आप?


चलते चलते (हँसना मना है):
NASA ने “Whatsapp” के बाहर भी जीवन की सम्भावना जताई है.


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